यूनुस · 95/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ فَتَكُونَ مِنَ الْخَاسِرِينَ ۝٩٥
Wa laa takoonanna minal lazeena kazzaboo bi Aayaatil laahi fatakoona minal khaasireen
📖 हिंदी अर्थ
न उन लोगों से होना जिन्होंने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया (वरना) तुम भी घाटा उठाने वालों से हो जाओगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَاتِ اللهِ: अल्लाह की निशानियाँ, प्रमाण और चमत्कार, जो उसकी एकता और सच्चाई पर दलील देते हैं।
  • الْخَاسِرِينَ: घाटे में रहने वाले, वे लोग जिन्होंने अपने आपको और अपने अच्छे कर्मों को बर्बाद कर लिया।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! तुम उन लोगों में से मत बनो जिन्होंने अल्लाह की आयतों (निशानियों और प्रमाणों) को झुठलाया, वरना तुम भी उन घाटे में रहने वालों में से हो जाओगे, जिन पर अल्लाह का क्रोध उतरा और जिन्होंने अपने कुकर्मों के कारण अपना सब कुछ गँवा दिया। यह चेतावनी नबी को सम्बोधित करके उम्मत को सिखाया जा रहा है कि सत्य को झुठलाने और उस पर शक करने का अंजाम बहुत भयानक है। हालाँकि नबी इससे पाक और मासूम हैं, लेकिन इस तरह की बात से यह स्पष्ट होता है कि अल्लाह की आयतों को झुठलाना कितना बड़ा पाप है, जो इंसान को हमेशा के लिए घाटे में डाल देता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की आयतों और निशानियों को झुठलाना सबसे बड़ा नुक़सान है, जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में बर्बाद कर देता है।
  2. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के दीन (धर्म) पर दृढ़ रहना चाहिए और किसी भी हालत में सच्चाई से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए।
  3. इंसान को चाहिए कि वह अपने जीवन में अल्लाह के भेजे हुए मार्गदर्शन को अपनाए, क्योंकि यही उसकी सफलता और कामयाबी का ज़रिया है।
  4. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह के रसूल (ﷺ) की पैरवी करना और उनके बताए रास्ते पर चलना ही हमें घाटे से बचा सकता है, क्योंकि उन्होंने हमें हर उस चीज़ से आगाह किया जो हमारे लिए नुक़सानदेह है।


📜 आयत 93-97 — सूरा यूनुस

93وَلَقَدْ بَوَّأْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مُبَوَّأَ صِدْقٍ وَرَزَقْنَاهُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ فَمَا اخْتَلَفُوا حَتَّىٰ جَاءَهُمُ الْعِلْمُ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
और हमने बनी इसराइल को (मालिक शाम में) बहुत अच्छी जगह बसाया और उन्हं अच्छी अच्छी चीज़ें खाने को दी तो उन लोगों के पास जब तक इल्म (न) आ चुका उन लोगों ने एख्तेलाफ़ नहीं किया इसमें तो शक़ ही नहीं जिन बातों में ये (दुनिया में) बाहम झगड़े रहे है क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार इसमें फैसला कर देगा
94فَإِن كُنتَ فِي شَكٍّ مِّمَّا أَنزَلْنَا إِلَيْكَ فَاسْأَلِ الَّذِينَ يَقْرَءُونَ الْكِتَابَ مِن قَبْلِكَ ۚ لَقَدْ جَاءَكَ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ
पस जो कुरान हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है अगर उसके बारे में तुम को कुछ शक़ हो तो जो लोग तुम से पहले से किताब (ख़ुदा) पढ़ा करते हैं उन से पूछ के देखों तुम्हारे पास यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ किताब आ चुकी तो तू न हरगिज़ शक़ करने वालों से होना
95وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ فَتَكُونَ مِنَ الْخَاسِرِينَ
न उन लोगों से होना जिन्होंने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया (वरना) तुम भी घाटा उठाने वालों से हो जाओगे
96إِنَّ الَّذِينَ حَقَّتْ عَلَيْهِمْ كَلِمَتُ رَبِّكَ لَا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल) इसमें शक़ नहीं कि जिन लोगों के बारे में तुम्हारे परवरदिगार को बातें पूरी उतर चुकी हैं (कि ये मुस्तहके अज़ाब हैं)
97وَلَوْ جَاءَتْهُمْ كُلُّ آيَةٍ حَتَّىٰ يَرَوُا الْعَذَابَ الْأَلِيمَ
वह लोग जब तक दर्दनाक अज़ाब देख (न) लेगें ईमान न लाएंगें अगरचे इनके सामने सारी (ख़ुदाई के) मौजिज़े आ मौजूद हो
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
95आयत

अनुवाद — यूनुस 95

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Thursday, October 1, 2026

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