यूनुस · 94/109
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूनुस
فَإِن كُنتَ فِي شَكٍّ مِّمَّا أَنزَلْنَا إِلَيْكَ فَاسْأَلِ الَّذِينَ يَقْرَءُونَ الْكِتَابَ مِن قَبْلِكَ ۚ لَقَدْ جَاءَكَ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ ۝٩٤
Fa in kunta fee shakkim mimmaaa anzalnaaa ilaika fas`alil lazeena yaqra`oonal Kitaaba min qablik; laqad jaaa`akal haqqu mir Rabbika falaa takoonanna minal mumtareen
📖 हिंदी अर्थ
पस जो कुरान हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है अगर उसके बारे में तुम को कुछ शक़ हो तो जो लोग तुम से पहले से किताब (ख़ुदा) पढ़ा करते हैं उन से पूछ के देखों तुम्हारे पास यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ किताब आ चुकी तो तू न हरगिज़ शक़ करने वालों से होना

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • شَكّ: संदेह, भ्रम
  • الَّذِينَ يَقْرَءُونَ الْكِتَابَ مِن قَبْلِكَ: वे लोग जो आपसे पहले उतरी किताबें (तौरात और इंजील) पढ़ते हैं
  • الْمُمْتَرِينَ: संदेह करने वाले, शक करने वाले

तफसीर (व्याख्या):

हे नबी! यदि आपको उस चीज़ के बारे में कोई संदेह हो जो हमने आपकी ओर उतारी है (अर्थात क़ुरआन), तो आप उन लोगों से पूछ लें जो आपसे पहले उतरी किताबों (तौरात और इंजील) को पढ़ते हैं। वे आपको बता देंगे कि यह सत्य है, क्योंकि आपका वर्णन और आपके आने की ख़बर उनकी किताबों में मौजूद है। यहूदी और ईसाई अपनी किताबों में आपकी निशानियाँ पाते हैं और आपके नबी होने की सच्चाई को जानते हैं, लेकिन अपनी जिद और हठ के कारण इसे छिपाते हैं।

निश्चय ही आपके पास आपके रब की ओर से सत्य आ चुका है—वह सत्य जिसमें कोई संदेह नहीं, अर्थात क़ुरआन और वह सारी शिक्षा जो आपको दी गई है। अतः आप कदापि संदेह करने वालों में से न हों। यह आयत नबी ﷺ को तसल्ली देने के लिए है, और इसका अर्थ यह नहीं कि नबी ﷺ को वास्तव में कोई संदेह था, बल्कि यह उम्मत के लिए एक सबक़ है कि सत्य के प्रति किसी भी प्रकार का संदेह न रखा जाए।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य की तलाश में हमें उन लोगों से भी जानकारी ले सकते हैं जो हमसे पहले की किताबों के जानकार हैं, बशर्ते कि वह जानकारी सत्य के अनुरूप हो।
  2. क़ुरआन और इस्लाम की सच्चाई इतनी स्पष्ट और प्रमाणित है कि उसमें किसी भी प्रकार का संदेह करना उचित नहीं है। पिछली किताबों में भी इसकी पुष्टि मौजूद है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान में दृढ़ता और यक़ीन होना चाहिए, संदेह और भ्रम से बचना चाहिए, क्योंकि संदेह इंसान को सत्य से भटका सकता है।
  4. अल्लाह ने अपने नबी ﷺ को भी यह नसीहत दी कि सत्य के आ जाने के बाद संदेह की कोई गुंजाइश नहीं—यह हमारे लिए एक शिक्षा है कि जब सत्य स्पष्ट हो जाए तो उसे बिना किसी झिझक के स्वीकार कर लेना चाहिए।
  5. यह आयत इस बात की ओर भी इशारा करती है कि इस्लाम का संदेश कोई नई चीज़ नहीं है, बल्कि यह उन्हीं सत्यों की पुष्टि है जो पहले की किताबों में मौजूद थे, इसलिए यह सभी मानवता के लिए एक सच्चा और स्थायी मार्गदर्शन है।


📜 आयत 92-96 — सूरा यूनुस

92فَالْيَوْمَ نُنَجِّيكَ بِبَدَنِكَ لِتَكُونَ لِمَنْ خَلْفَكَ آيَةً ۚ وَإِنَّ كَثِيرًا مِّنَ النَّاسِ عَنْ آيَاتِنَا لَغَافِلُونَ
तो हम आज तेरी रुह को तो नहीं (मगर) तेरे बदन को (तह नशीन होने से) बचाएँगें ताकि तू अपने बाद वालों के लिए इबरत का (बाइस) हो और इसमें तो शक़ नहीं कि तेरे लोग हमारी निशानियों से यक़ीनन बेख़बर हैं
93وَلَقَدْ بَوَّأْنَا بَنِي إِسْرَائِيلَ مُبَوَّأَ صِدْقٍ وَرَزَقْنَاهُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ فَمَا اخْتَلَفُوا حَتَّىٰ جَاءَهُمُ الْعِلْمُ ۚ إِنَّ رَبَّكَ يَقْضِي بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فِيمَا كَانُوا فِيهِ يَخْتَلِفُونَ
और हमने बनी इसराइल को (मालिक शाम में) बहुत अच्छी जगह बसाया और उन्हं अच्छी अच्छी चीज़ें खाने को दी तो उन लोगों के पास जब तक इल्म (न) आ चुका उन लोगों ने एख्तेलाफ़ नहीं किया इसमें तो शक़ ही नहीं जिन बातों में ये (दुनिया में) बाहम झगड़े रहे है क़यामत के दिन तुम्हारा परवरदिगार इसमें फैसला कर देगा
94فَإِن كُنتَ فِي شَكٍّ مِّمَّا أَنزَلْنَا إِلَيْكَ فَاسْأَلِ الَّذِينَ يَقْرَءُونَ الْكِتَابَ مِن قَبْلِكَ ۚ لَقَدْ جَاءَكَ الْحَقُّ مِن رَّبِّكَ فَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الْمُمْتَرِينَ
पस जो कुरान हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है अगर उसके बारे में तुम को कुछ शक़ हो तो जो लोग तुम से पहले से किताब (ख़ुदा) पढ़ा करते हैं उन से पूछ के देखों तुम्हारे पास यक़ीनन तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से बरहक़ किताब आ चुकी तो तू न हरगिज़ शक़ करने वालों से होना
95وَلَا تَكُونَنَّ مِنَ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِ اللَّهِ فَتَكُونَ مِنَ الْخَاسِرِينَ
न उन लोगों से होना जिन्होंने ख़ुदा की आयतों को झुठलाया (वरना) तुम भी घाटा उठाने वालों से हो जाओगे
96إِنَّ الَّذِينَ حَقَّتْ عَلَيْهِمْ كَلِمَتُ رَبِّكَ لَا يُؤْمِنُونَ
(ऐ रसूल) इसमें शक़ नहीं कि जिन लोगों के बारे में तुम्हारे परवरदिगार को बातें पूरी उतर चुकी हैं (कि ये मुस्तहके अज़ाब हैं)
यूनुसकुरान सूची
109आयत
मक्कीअवतरण स्थान
94आयत

अनुवाद — यूनुस 94

सूरा यूनुस आयत 94 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पस जो कुरान हमने तुम्हारी तरफ नाज़िल किया है अगर…

सूरा आयत 94/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 92–96. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Friday, October 2, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए