हूद · 118/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
وَلَوْ شَاءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ النَّاسَ أُمَّةً وَاحِدَةً ۖ وَلَا يَزَالُونَ مُخْتَلِفِينَ ۝١١٨
Wa law shaaa`a Rabbuka laja`alannnaasa ummatanw waa hidatanw wa laa yazaaloona mukhtalifeen
📖 हिंदी अर्थ
और अगर तुम्हारा परवरदिगार चाहता तो बेशक तमाम लोगों को एक ही (किस्म की) उम्मत बना देता (मगर) उसने न चाहा इसी (वजह से) लोग हमेशा आपस में फूट डाला करेगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُمَّةً وَاحِدَةً: एक ही धर्म और एक ही मार्ग पर चलने वाला एक समुदाय।
  • مُخْتَلِفِينَ: अलग-अलग धर्मों, विचारधाराओं और रास्तों पर विभाजित रहने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! यदि आपका रब चाहता, तो वह सभी इंसानों को एक ही धर्म—इस्लाम—पर चलने वाली एक ही उम्मत बना देता, और सब लोग बिना किसी मतभेद के एक ही रास्ते पर चलते। लेकिन अल्लाह ने अपनी गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) के कारण ऐसा नहीं किया। उसकी मर्ज़ी यही है कि लोग अपनी पसंद और अपनी मर्ज़ी से रास्ता चुनें। इसलिए लोग हमेशा अलग-अलग धर्मों और विचारों में बँटे रहेंगे—कोई यहूदी बनेगा, कोई ईसाई, कोई मजूसी (आग की पूजा करने वाला), कोई मुशरिक (अल्लाह का साझीदार ठहराने वाला)। यह अंतर उनकी अपनी हवस (इच्छाओं) और सरकशी की वजह से है, क्योंकि उन्होंने सच्चाई को ठुकरा दिया और अपनी मनमानी पर चल पड़े। यह विभाजन अल्लाह की हिकमत का हिस्सा है, ताकि सच्चाई पर चलने वाले और झूठ पर चलने वाले स्पष्ट हो जाएँ, और इंसान की आज़ादी की परीक्षा हो सके।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की इच्छा और उसकी हिकमत के आगे हर चीज़ है—वह चाहता तो सबको जबरदस्ती मुसलमान बना देता, लेकिन उसने इंसान को चुनने की आज़ादी दी है, ताकि उसका इम्तिहान हो।
  2. लोगों में मतभेद और अलग-अलग रास्तों पर चलना अल्लाह के क़ानून (सुन्नतुल्लाह) का हिस्सा है, इसलिए हमें लोगों के अलग होने पर हैरान नहीं होना चाहिए, बल्कि हक़ (सच्चाई) पर डटे रहना चाहिए।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हमारा फर्ज़ लोगों को जबरदस्ती सीधे रास्ते पर लाना नहीं, बल्कि सच्चाई पहुँचाना और अच्छा उदाहरण पेश करना है। हिदायत तो अल्लाह के हाथ में है।
  4. इस्लाम की खूबसूरती यह है कि वह इंसान को उसकी आज़ादी देता है, लेकिन साथ ही उसे सच्चाई का रास्ता दिखाता है—जो कोई चाहे ईमान लाए और जो चाहे इनकार करे, लेकिन हर इंसान को अपने किए का हिसाब देना होगा।
  5. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि मुसलमानों को चाहिए कि वे आपसी मतभेदों को दूर करके एकता पर कायम रहें, क्योंकि अल्लाह ने जो एकता (इस्लाम) दी है, वह सबसे बड़ी नेमत है।
🎧 सुनें

📜 आयत 116-120 — हूद

116فَلَوْلَا كَانَ مِنَ الْقُرُونِ مِن قَبْلِكُمْ أُولُو بَقِيَّةٍ يَنْهَوْنَ عَنِ الْفَسَادِ فِي الْأَرْضِ إِلَّا قَلِيلًا مِّمَّنْ أَنجَيْنَا مِنْهُمْ ۗ وَاتَّبَعَ الَّذِينَ ظَلَمُوا مَا أُتْرِفُوا فِيهِ وَكَانُوا مُجْرِمِينَ
फिर जो लोग तुमसे पहले गुज़र चुके हैं उनमें कुछ लोग ऐसे अक़ल वाले क्यों न हुए जो (लोगों को) रुए ज़मीन पर फसाद फैलाने से रोका करते (ऐसे लोग थे तो) मगर बहुत थोड़े से और ये उन्हीं लोगों से थे जिनको हमने अज़ाब से बचा लिया और जिन लोगों ने नाफरमानी की थी वह उन्हीं (लज्ज़तों) के पीछे पड़े रहे और जो उन्हें दी गई थी और ये लोग मुजरिम थे ही
117وَمَا كَانَ رَبُّكَ لِيُهْلِكَ الْقُرَىٰ بِظُلْمٍ وَأَهْلُهَا مُصْلِحُونَ
और तुम्हारा परवरदिगार ऐसा (बे इन्साफ) कभी न था कि बस्तियों को जबरदस्ती उजाड़ देता और वहाँ के लोग नेक चलन हों
118وَلَوْ شَاءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ النَّاسَ أُمَّةً وَاحِدَةً ۖ وَلَا يَزَالُونَ مُخْتَلِفِينَ
और अगर तुम्हारा परवरदिगार चाहता तो बेशक तमाम लोगों को एक ही (किस्म की) उम्मत बना देता (मगर) उसने न चाहा इसी (वजह से) लोग हमेशा आपस में फूट डाला करेगें
119إِلَّا مَن رَّحِمَ رَبُّكَ ۚ وَلِذَٰلِكَ خَلَقَهُمْ ۗ وَتَمَّتْ كَلِمَةُ رَبِّكَ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ أَجْمَعِينَ
मगर जिस पर तुम्हारा परवरदिगार रहम फरमाए और इसलिए तो उसने उन लोगों को पैदा किया (और इसी वजह से तो) तुम्हारा परवरदिगार का हुक्म क़तई पूरा होकर रहा कि हम यक़ीनन जहन्नुम को तमाम जिन्नात और आदमियों से भर देगें
120وَكُلًّا نَّقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنبَاءِ الرُّسُلِ مَا نُثَبِّتُ بِهِ فُؤَادَكَ ۚ وَجَاءَكَ فِي هَٰذِهِ الْحَقُّ وَمَوْعِظَةٌ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ
और (ऐ रसूल) पैग़म्बरों के हालत में से हम उन तमाम क़िस्सों को तुम से बयान किए देते हैं जिनसे हम तुम्हारे दिल को मज़बूत कर देगें और उन्हीं क़िस्सों में तुम्हारे पास हक़ (क़ुरान) और मोमिनीन के लिए नसीहत और याद दहानी भी आ गई
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीRevelation
118आयत

अनुवाद — हूद 118

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Tuesday, August 18, 2026

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