Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُمَّةً وَاحِدَةً: एक ही धर्म और एक ही मार्ग पर चलने वाला एक समुदाय।
- مُخْتَلِفِينَ: अलग-अलग धर्मों, विचारधाराओं और रास्तों पर विभाजित रहने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! यदि आपका रब चाहता, तो वह सभी इंसानों को एक ही धर्म—इस्लाम—पर चलने वाली एक ही उम्मत बना देता, और सब लोग बिना किसी मतभेद के एक ही रास्ते पर चलते। लेकिन अल्लाह ने अपनी गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) के कारण ऐसा नहीं किया। उसकी मर्ज़ी यही है कि लोग अपनी पसंद और अपनी मर्ज़ी से रास्ता चुनें। इसलिए लोग हमेशा अलग-अलग धर्मों और विचारों में बँटे रहेंगे—कोई यहूदी बनेगा, कोई ईसाई, कोई मजूसी (आग की पूजा करने वाला), कोई मुशरिक (अल्लाह का साझीदार ठहराने वाला)। यह अंतर उनकी अपनी हवस (इच्छाओं) और सरकशी की वजह से है, क्योंकि उन्होंने सच्चाई को ठुकरा दिया और अपनी मनमानी पर चल पड़े। यह विभाजन अल्लाह की हिकमत का हिस्सा है, ताकि सच्चाई पर चलने वाले और झूठ पर चलने वाले स्पष्ट हो जाएँ, और इंसान की आज़ादी की परीक्षा हो सके।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह की इच्छा और उसकी हिकमत के आगे हर चीज़ है—वह चाहता तो सबको जबरदस्ती मुसलमान बना देता, लेकिन उसने इंसान को चुनने की आज़ादी दी है, ताकि उसका इम्तिहान हो।
- लोगों में मतभेद और अलग-अलग रास्तों पर चलना अल्लाह के क़ानून (सुन्नतुल्लाह) का हिस्सा है, इसलिए हमें लोगों के अलग होने पर हैरान नहीं होना चाहिए, बल्कि हक़ (सच्चाई) पर डटे रहना चाहिए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमारा फर्ज़ लोगों को जबरदस्ती सीधे रास्ते पर लाना नहीं, बल्कि सच्चाई पहुँचाना और अच्छा उदाहरण पेश करना है। हिदायत तो अल्लाह के हाथ में है।
- इस्लाम की खूबसूरती यह है कि वह इंसान को उसकी आज़ादी देता है, लेकिन साथ ही उसे सच्चाई का रास्ता दिखाता है—जो कोई चाहे ईमान लाए और जो चाहे इनकार करे, लेकिन हर इंसान को अपने किए का हिसाब देना होगा।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि मुसलमानों को चाहिए कि वे आपसी मतभेदों को दूर करके एकता पर कायम रहें, क्योंकि अल्लाह ने जो एकता (इस्लाम) दी है, वह सबसे बड़ी नेमत है।
📜 आयत 116-120 — सूरा हूद
अनुवाद — हूद 118
सूरा हूद आयत 118 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर तुम्हारा परवरदिगार चाहता तो बेशक तमाम लोगों को…सूरा आयत 118/123 — सूरा हूद هود (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा हूद सुनें, सूरा हूद अनुवाद, सूरा हूद mp3, सूरा हूद pdf. आयत 116–120. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा हूद
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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