हूद · 22/123
अनुवाद उच्चारण — हूद
لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْأَخْسَرُونَ ۝٢٢
Laa jarama annahum fil Aakhirati humul akhsaroon
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में बड़े घाटा उठाने वाले होगें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا جَرَمَ: निस्संदेह, यक़ीनन, हक़ीक़त में।
  • الْأَخْسَرُونَ: सबसे अधिक घाटे में रहने वाले, सबसे बड़ा नुक़सान उठाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के अंजाम को बयान कर रही है जो अल्लाह की आयतों को झुठलाते हैं और उनके रसूलों पर ईमान नहीं लाते। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इसमें कोई शक नहीं कि ये लोग आख़िरत (क़ियामत के दिन) सबसे ज़्यादा घाटे में रहने वाले होंगे। उनका नुक़सान इसलिए सबसे बड़ा होगा क्योंकि उन्होंने ईमान के बदले कुफ़्र को, जन्नत के बदले जहन्नम को और अल्लाह की रहमत के बदले उसके अज़ाब को ख़रीद लिया। उन्होंने दुनिया की फ़ानी (क्षणभंगुर) चीज़ों को आख़िरत की हमेशा रहने वाली नेमतों पर तरजीह दी, और इस तरह उन्होंने अपना सब कुछ गँवा दिया। दुनिया में वे भले ही अपने आपको समझदार या कामयाब समझते रहे हों, लेकिन आख़िरत में उनका यह भ्रम टूट जाएगा और उन्हें अपनी सच्ची हालत का पता चलेगा कि वे ही सबसे बड़े घाटे में हैं। यह घाटा कोई साधारण घाटा नहीं, बल्कि ऐसा घाटा है जिसकी कोई तلافी (भरपाई) नहीं हो सकती, क्योंकि वहाँ से लौटना और दोबारा मौक़ा पाना नामुमकिन है।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि असली कामयाबी और नाकामी दुनिया के माल-दौलत और ओहदों से नहीं, बल्कि आख़िरत में अल्लाह की रहमत और जन्नत हासिल करने से है। जो इसे भूलकर सिर्फ़ दुनिया के पीछे पड़ जाता है, वह असल में सबसे बड़ा घाटे में है।
  2. इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि ईमान और नेक अमल ही वह चीज़ें हैं जो आख़िरत में हमारे काम आएँगी। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी में इन्हें सबसे अहमियत देनी चाहिए।
  3. यह आयत हमें दुनिया की चमक-दमक और उसके अस्थायी सुखों से मोहित होकर आख़िरत को भूल जाने के ख़तरे से आगाह करती है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह दुनिया का इस्तेमाल आख़िरत की कामयाबी हासिल करने के लिए करे, न कि उसे ही अपना आख़िरी मक़सद बना ले।
  4. इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी तसल्ली है जो ईमान पर क़ायम हैं और नेक अमल करते हैं, क्योंकि उनका अंजाम कामयाबी है, जबकि कुफ़्र और गुनाह पर ज़िद करने वालों का अंजाम यही बताया गया है कि वे आख़िरत में सबसे ज़्यादा नुक़सान उठाने वाले होंगे।
🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — हूद

20أُولَٰئِكَ لَمْ يَكُونُوا مُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِنْ أَوْلِيَاءَ ۘ يُضَاعَفُ لَهُمُ الْعَذَابُ ۚ مَا كَانُوا يَسْتَطِيعُونَ السَّمْعَ وَمَا كَانُوا يُبْصِرُونَ
ये लोग रुए ज़मीन में न ख़ुदा को हरा सकते है और न ख़ुदा के सिवा उनका कोई सरपरस्त होगा उनका अज़ाब दूना कर दिया जाएगा ये लोग (हसद के मारे) न तो (हक़ बात) सुन सकते थे न देख सकते थे
21أُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
ये वह लोग हैं जिन्होंने कुछ अपना ही घाटा किया और जो इफ्तेरा परदाज़ियाँ (झूठी बातें) ये लोग करते थे (क़यामत में सब) उन्हें छोड़ के चल होगी
22لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْأَخْسَرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में बड़े घाटा उठाने वाले होगें
23إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَأَخْبَتُوا إِلَىٰ رَبِّهِمْ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए और अपने परवरदिगार के सामने आजज़ी से झुके यही लोग जन्नती हैं कि ये बेहश्त में हमेशा रहेगें
24۞ مَثَلُ الْفَرِيقَيْنِ كَالْأَعْمَىٰ وَالْأَصَمِّ وَالْبَصِيرِ وَالسَّمِيعِ ۚ هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًا ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
(काफिर, मुसलमान) दोनों फरीक़ की मसल अन्धे और बहरे और देखने वाले और सुनने वाले की सी है क्या ये दोनो मसल में बराबर हो सकते हैं तो क्या तुम लोग ग़ौर नहीं करते और हमने नूह को ज़रुर उन की क़ौम के पास भेजा
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अनुवाद — हूद 22

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Tuesday, August 18, 2026

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