हूद · 21/123
अनुवाद उच्चारण — सूरा हूद
أُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ ۝٢١
Ulaaa`ikal lazeena khasirooo anfusahum wa dalla `anhum maa kaanoo yaftaroon
📖 हिंदी अर्थ
ये वह लोग हैं जिन्होंने कुछ अपना ही घाटा किया और जो इफ्तेरा परदाज़ियाँ (झूठी बातें) ये लोग करते थे (क़यामत में सब) उन्हें छोड़ के चल होगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ: अपने आप को घाटे में डाला, अपनी आत्मा को तबाह किया।
  • ضَلَّ عَنْهُم: उनसे खो गया, गायब हो गया, उनसे दूर हो गया।
  • يَفْتَرُونَ: झूठ गढ़ते थे, मनगढ़ंत बातें बनाते थे।

तफसीर:

ये वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की इबादत छोड़कर मूर्तियों और झूठे देवताओं की पूजा की। उन्होंने अपनी आत्माओं को सबसे बड़ा नुकसान पहुँचाया, क्योंकि उन्होंने अपने आप को अल्लाह की रहमत और जन्नत से वंचित कर लिया और अपने लिए जहन्नम की आग खरीद ली। वे यह झूठ गढ़ते थे कि ये मूर्तियाँ और देवता उनके लिए सिफ़ारिश करेंगे और उन्हें अल्लाह के पास ले जाएँगे, लेकिन क़ियामत के दिन ये सब उनसे गायब हो जाएँगे। न तो ये मूर्तियाँ उनके काम आएँगी, न उनके झूठे दावे, और न ही उनके मनगढ़ंत शरीक। वे पूरी तरह अकेले और बेसहारा रह जाएँगे, और उनका सारा भरोसा धूल में मिल जाएगा।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि सबसे बड़ा घाटा वह है जब इंसान अपनी आत्मा को अल्लाह से दूर कर ले। दुनिया का कोई भी नुकसान इस नुकसान के बराबर नहीं हो सकता।
  2. अल्लाह के सिवा किसी और पर भरोसा करना, चाहे वह मूर्ति हो, इंसान हो या कोई और चीज़, बिल्कुल बेकार है। क़ियामत के दिन सब झूठा साबित होगा।
  3. यह आयत हमें तौहीद (अल्लाह की एकता) की अहमियत समझाती है — सिर्फ अल्लाह ही सच्चा सहारा है, और उसी की इबादत करनी चाहिए।
  4. इंसान को चाहिए कि वह अपने जीवन में झूठ और मनगढ़ंत बातों से बचे, क्योंकि ये चीज़ें उसे अल्लाह से दूर कर देती हैं और आख़िरत में उसके लिए शर्मिंदगी का सबब बनती हैं।
  5. यह आयत मुसलमानों को यह पाठ देती है कि वे अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, ताकि वे उन लोगों में से न हों जो अपनी आत्मा को खो दें।


📜 आयत 19-23 — सूरा हूद

19الَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا وَهُم بِالْآخِرَةِ هُمْ كَافِرُونَ
जो ख़ुदा के रास्ते से लोगों को रोकते हैं और उसमें कज़ी (टेढ़ा पन) निकालना चाहते हैं और यही लोग आख़िरत के भी मुन्किर है
20أُولَٰئِكَ لَمْ يَكُونُوا مُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ مِنْ أَوْلِيَاءَ ۘ يُضَاعَفُ لَهُمُ الْعَذَابُ ۚ مَا كَانُوا يَسْتَطِيعُونَ السَّمْعَ وَمَا كَانُوا يُبْصِرُونَ
ये लोग रुए ज़मीन में न ख़ुदा को हरा सकते है और न ख़ुदा के सिवा उनका कोई सरपरस्त होगा उनका अज़ाब दूना कर दिया जाएगा ये लोग (हसद के मारे) न तो (हक़ बात) सुन सकते थे न देख सकते थे
21أُولَٰئِكَ الَّذِينَ خَسِرُوا أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا يَفْتَرُونَ
ये वह लोग हैं जिन्होंने कुछ अपना ही घाटा किया और जो इफ्तेरा परदाज़ियाँ (झूठी बातें) ये लोग करते थे (क़यामत में सब) उन्हें छोड़ के चल होगी
22لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِي الْآخِرَةِ هُمُ الْأَخْسَرُونَ
इसमें शक़ नहीं कि यही लोग आख़िरत में बड़े घाटा उठाने वाले होगें
23إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَأَخْبَتُوا إِلَىٰ رَبِّهِمْ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ الْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
बेशक जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए और अपने परवरदिगार के सामने आजज़ी से झुके यही लोग जन्नती हैं कि ये बेहश्त में हमेशा रहेगें
हूदकुरान सूची
123आयत
मक्कीअवतरण स्थान
21आयत

अनुवाद — हूद 21

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Saturday, October 3, 2026

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