Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَكَأَيِّنْ مِنْ آيَةٍ: कितनी ही निशानियाँ और प्रमाण।
- يَمُرُّونَ عَلَيْهَا: वे उनके पास से गुज़रते हैं और उन्हें देखते हैं।
- مُعْرِضُونَ: उनसे मुँह मोड़ने वाले, ध्यान न देने वाले।
तफ़सीर:
आसमानों और ज़मीन में अल्लाह तआला की वहदानियत (एकता) और क़ुदरत पर दलालत करने वाली कितनी ही निशानियाँ बिखरी हुई हैं — जैसे सूरज, चाँद, सितारे, पहाड़, दरख़्त, समुद्र और बेशुमार मख़लूक़ात। ये सारी चीज़ें अपनी रचना और निज़ाम से अल्लाह के वजूद, उसके इल्म और उसकी तदबीर की गवाही देती हैं। इंसान इन निशानियों के बीच रहता है, दिन-रात इन्हें देखता है, इनके पास से गुज़रता है, लेकिन अफ़सोस कि वह इन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करता, इनसे सबक़ नहीं लेता और इन्हें अपनी आँखों से देखकर भी इनसे आँखें बंद किए रहता है। वह इन्हें महज़ बेजान चीज़ें समझता है, जबकि ये उसे उसके रब की तरफ़ बुला रही हैं। वह इनसे इ'राज़ करता है और अपनी ग़फ़लत में डूबा रहता है, न तो इन पर सोचता है और न ही इनसे कोई नसीहत हासिल करता है।
फ़ायदे:
- यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की मज़बूती के लिए किताब पढ़ने के साथ-साथ कायनात (ब्रह्मांड) की निशानियों पर ग़ौर करना भी बेहद ज़रूरी है। जो शख्स जितना ज़्यादा अल्लाह की बनाई हुई चीज़ों पर सोचेगा, उसका ईमान उतना ही पुख्ता होगा।
- अल्लाह की निशानियाँ हर जगह मौजूद हैं, लेकिन फ़ायदा सिर्फ़ उन्हीं को मिलता है जो इन पर दिल लगाकर ग़ौर करते हैं। आँखों से देखना काफ़ी नहीं, बल्कि दिल की आँखों से देखना असली चीज़ है।
- यह आयत हमें ग़ाफ़िल (लापरवाह) ज़िंदगी से बचाती है और सिखाती है कि हर पल, हर चीज़ में अल्लाह की याद और उसकी क़ुदरत का नज़ारा है। जो शख्स इस नज़रिए से ज़िंदगी गुज़ारता है, उसका दिल हमेशा अल्लाह से जुड़ा रहता है और वह कभी अकेला महसूस नहीं करता।
- इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपने आस-पास की चीज़ों को बेकार न समझें, बल्कि हर चीज़ में अल्लाह की हिकमत और रहमत के निशान तलाश करें। यही वह रास्ता है जो इंसान को सच्ची मुहब्बत और यक़ीन की मंज़िल तक पहुँचाता है।
📜 आयत 103-107 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 105
सूरा यूसुफ आयत 105 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की क़ुदरत की) कितनी…सूरा आयत 105/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 103–107. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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