यूसुफ · 104/111
अनुवाद उच्चारण — यूसुफ
وَمَا تَسْأَلُهُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ ۝١٠٤
Wa maa tas`aluhum `alaihi min ajr; in huwa illaa zikrul lil`aalameen
📖 हिंदी अर्थ
हालॉकि तुम उनसे (तबलीगे रिसालत का) कोई सिला नहीं मॉगते और ये (क़ुरान) तो सारे जहाँन के वास्ते नसीहत (ही नसीहत) है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِنْ أَجْرٍ: बदला, पारिश्रमिक या कोई पारिश्रमिक।
  • ذِكْرٌ: नसीहत, याद दिलाने वाली चीज़, उपदेश।
  • لِلْعَالَمِينَ: सारे संसार के लोगों के लिए, सभी मनुष्यों और जिन्नों के लिए।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन लोगों से अपने इस धर्म-प्रचार और क़ुरआन पहुँचाने के बदले में कोई पारिश्रमिक या बदला नहीं माँगते। आपका काम तो केवल उन्हें सीधा रास्ता दिखाना है। यह क़ुरआन जो आप पर उतारा गया है, यह कोई साधारण किताब नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक नसीहत और याद दिलाने वाला संदेश है। हर इंसान और हर जिन्न के लिए यह एक ऐसा ज़रिया है जिससे वह अपने रब को पहचान सके, अपनी ज़िंदगी का सही उद्देश्य समझ सके और अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित हो सके। आपका यह निःस्वार्थ व्यवहार इस बात का सबूत है कि आपका उद्देश्य केवल लोगों की भलाई है, न कि कोई सांसारिक लाभ। अगर लोग समझदार होते तो इसी बात से आपकी सच्चाई को पहचान लेते और आप पर ईमान ले आते।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि दीन की दावत और अच्छे कामों की तरफ़ बुलाना बिल्कुल निःस्वार्थ होना चाहिए। किसी भी धार्मिक कार्य के बदले में दुनियावी मेहनताना या बदला लेना उसकी पवित्रता को खत्म कर देता है।
  2. यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन सिर्फ़ किसी एक ज़माने या किसी एक क़ौम के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए हिदायत और रहमत है। यह हर ज़माने और हर जगह के लोगों के लिए एक जीवंत संदेश है।
  3. एक सच्चे मुसलमान का नज़रिया दुनिया के सभी लोगों के प्रति भलाई और सुधार का होना चाहिए, क्योंकि क़ुरआन का पैग़ाम सारे संसार के लिए है।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि जब हमारा काम ख़ालिस अल्लाह के लिए होता है, तो अल्लाह खुद उसकी कद्र करता है और उसे कामयाब बनाता है, चाहे लोग उसे न मानें।
  5. इससे हमें यह भी समझ आता है कि नबी करीम ﷺ की महानता और सच्चाई का एक बड़ा सबूत यह है कि उन्होंने 23 साल की लंबी मेहनत में कभी किसी से कोई दुनियावी फ़ायदा नहीं उठाया, बल्कि उल्टा उन्होंने तकलीफ़ें सहीं। यह उनके नबी होने की सबसे बड़ी गवाही है।


📜 आयत 102-106 — यूसुफ

102ذَٰلِكَ مِنْ أَنبَاءِ الْغَيْبِ نُوحِيهِ إِلَيْكَ ۖ وَمَا كُنتَ لَدَيْهِمْ إِذْ أَجْمَعُوا أَمْرَهُمْ وَهُمْ يَمْكُرُونَ
(ऐ रसूल) ये किस्सा ग़ैब की ख़बरों में से है जिसे हम तुम्हारे पास वही के ज़रिए भेजते हैं (और तुम्हें मालूम होता है वरना जिस वक्त यूसुफ के भाई बाहम अपने काम का मशवरा कर रहे थे और (हलाक की) तदबीरे कर रहे थे
103وَمَا أَكْثَرُ النَّاسِ وَلَوْ حَرَصْتَ بِمُؤْمِنِينَ
तुम उनके पास मौजूद न थे और कितने ही चाहो मगर बहुतेरे लोग ईमान लाने वाले नहीं हैं
104وَمَا تَسْأَلُهُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا ذِكْرٌ لِّلْعَالَمِينَ
हालॉकि तुम उनसे (तबलीगे रिसालत का) कोई सिला नहीं मॉगते और ये (क़ुरान) तो सारे जहाँन के वास्ते नसीहत (ही नसीहत) है
105وَكَأَيِّن مِّنْ آيَةٍ فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ يَمُرُّونَ عَلَيْهَا وَهُمْ عَنْهَا مُعْرِضُونَ
और आसमानों और ज़मीन में (ख़ुदा की क़ुदरत की) कितनी निशानियाँ हैं जिन पर ये लोग (दिन रात) ग़ुज़ारा करते हैं और उससे मुँह फेरे रहते हैं
106وَمَا يُؤْمِنُ أَكْثَرُهُم بِاللَّهِ إِلَّا وَهُم مُّشْرِكُونَ
और अक्सर लोगों की ये हालत है कि वह ख़ुदा पर ईमान तो नहीं लाते मगर शिर्क किए जाते हैं
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
104आयत

अनुवाद — यूसुफ 104

सूरा यूसुफ आयत 104 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हालॉकि तुम उनसे (तबलीगे रिसालत का) कोई सिला नहीं मॉगते…

सूरा आयत 104/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 102–106. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए