अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَشُدَّهُ: अपनी पूरी शारीरिक शक्ति और युवावस्था की परिपक्वता को प्राप्त करना।
- حُكْمًا: समझ-बूझ, नबुव्वत (पैग़म्बरी) और मामलों को सही ढंग से निपटाने की क्षमता।
- عِلْمًا: धर्म की गहरी समझ और फ़िक्ह (धार्मिक ज्ञान)।
- الْمُحْسِنِينَ: वे लोग जो अल्लाह की इबादत में भलाई करते हैं, यानी उसे इस तरह से पूजते हैं जैसे वे उसे देख रहे हों, और अपने सभी कार्यों में अच्छाई अपनाते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) अपनी पूरी जवानी और शारीरिक शक्ति की परिपक्वता को पहुँचे — जो कि अधिकांश उलेमा के अनुसार लगभग तैंतीस वर्ष की आयु है — तो अल्लाह ने उन्हें दो महान चीज़ें प्रदान कीं:
पहली, हुक्म (निर्णय लेने की शक्ति और नबुव्वत): यानी उन्हें मामलों को सही ढंग से सुलझाने, न्याय करने और लोगों के बीच फ़ैसले करने की क्षमता दी गई। यह उनके लिए अल्लाह की ओर से एक विशेष सम्मान और पैग़म्बरी का दर्जा था।
दूसरी, इल्म (ज्ञान): उन्हें धर्म की गहरी समझ, फ़िक्ह और उन चीज़ों का ज्ञान दिया गया जो उनके जीवन के लिए आवश्यक थीं। यह सिर्फ़ सांसारिक ज्ञान नहीं था, बल्कि वह ज्ञान था जो उन्हें सही रास्ते पर चलने और दूसरों को सही रास्ता दिखाने में मदद करता था।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और इसी तरह हम नेकी करने वालों को बदला देते हैं।" यानी जिस तरह हमने यूसुफ़ को उनके अच्छे कर्मों और अल्लाह की इबादत में सच्चाई की वजह से यह सम्मान और ज्ञान दिया, उसी तरह हम अपने उन सभी बंदों को भी नवाज़ते हैं जो अच्छाई करते हैं। यह एक सामान्य नियम है — जो लोग अल्लाह की आज्ञा का पालन करते हैं और अपने कार्यों में भलाई अपनाते हैं, अल्लाह उन्हें समझ, ज्ञान और सफलता प्रदान करता है।
इस आयत में पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के लिए भी तसल्ली है कि जिस तरह यूसुफ़ को उनकी मुश्किलों के बाद सम्मान मिला, उसी तरह आपको भी अपने धैर्य और अच्छाई के बदले में अल्लाह की ओर से मदद और कामयाबी मिलेगी।
फ़ायदे (सीख):
- अच्छाई का बदला अल्लाह देता है: यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे कर्मों का फल अल्लाह के पास सुरक्षित है। जो लोग नेकी करते हैं, चाहे उन्हें दुनिया में पहचान न मिले, अल्लाह उन्हें ज़रूर नवाज़ता है — कभी ज्ञान से, कभी सम्मान से, कभी सफलता से।
- युवावस्था में ज्ञान की अहमियत: हज़रत यूसुफ़ को जवानी में ही हुक्म और इल्म दिया गया। इससे पता चलता है कि युवावस्था सीखने और समझने का सबसे अच्छा समय है। हमें चाहिए कि अपनी जवानी को अल्लाह की इबादत और ज्ञान हासिल करने में लगाएँ।
- इबादत में अच्छाई (इहसान): "मुहसिन" वह है जो अपने काम को बेहतरीन तरीके से करे। हमें अपनी नमाज़, रोज़ा और हर अच्छे काम को पूरे दिल से और अच्छी तरह से करना चाहिए, न कि सिर्फ़ रस्म अदा करने के लिए।
- मुश्किलों के बाद आसानी: यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) ने कई कठिनाइयाँ झेलीं — कुँए में डाला जाना, ग़ुलामी, जेल — लेकिन अल्लाह ने उन्हें उन सबके बाद बड़ा सम्मान दिया। यह हमें सिखाता है कि धैर्य और अच्छाई पर डटे रहने से अल्लाह की मदद ज़रूर आती है।
📜 आयत 20-24 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 22
सूरा यूसुफ आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब यूसुफ अपनी जवानी को पहुँचे तो हमने उनको…सूरा आयत 22/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 20–24. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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