अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَجْتَبِيكَ: तुम्हें चुन लेगा, अपनी विशेष कृपा के लिए चुन लेगा।
- تَأْوِيلِ الْأَحَادِيثِ: सपनों की व्याख्या (और घटनाओं के अंजाम तक पहुँचने का ज्ञान)।
- يُتِمُّ نِعْمَتَهُ: अपनी नेमत (कृपा) को पूरा करेगा।
- آلِ يَعْقُوبَ: याकूब (अलैहिस्सलाम) की संतान और उनके घराने के लोग।
तफसीर (व्याख्या):
यह वह बात है जो हज़रत याकूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटे यूसुफ (अलैहिस्सलाम) से कही, जब यूसुफ ने सपना देखा था कि ग्यारह सितारे, सूरज और चाँद उसे सजदा कर रहे हैं। याकूब (अलैहिस्सलाम) ने उसे समझाया कि जिस तरह अल्लाह ने तुम्हें यह महान सपना दिखाकर तुम्हारा सम्मान बढ़ाया है, उसी तरह वह तुम्हें अपनी विशेष कृपा के लिए चुनेगा और तुम्हें सपनों की व्याख्या का ज्ञान सिखाएगा। यानी तुम वह समझ पाओगे जो लोग सपनों में देखते हैं और उसका वास्तविक अर्थ और अंजाम जान सकोगे।
फिर याकूब (अलैहिस्सलाम) ने यह भी बताया कि अल्लाह अपनी नेमत तुम पर और याकूब के घराने पर पूरी करेगा, यानी तुम्हें नबुव्वत (पैग़म्बरी) प्रदान करेगा, ठीक उसी तरह जैसे उसने इससे पहले तुम्हारे पूर्वजों इब्राहीम और इसहाक (अलैहिमुस्सलाम) पर अपनी नेमत पूरी की थी, उन्हें नबी बनाकर और अपने दीन के लिए चुनकर। (यहाँ "अबَوَيْك" से मुराद पिता और दादा हैं, क्योंकि दादा भी पिता ही होता है।)
इसके बाद याकूब (अलैहिस्सलाम) ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह सब कुछ अल्लाह की इच्छा और उसकी बुद्धिमत्ता से होगा, क्योंकि अल्लाह अपने बंदों के हाल को पूरी तरह जानता है और वह जानता है कि कौन उसकी इस विशेष कृपा का हक़दार है। वह अपने कामों में पूर्ण ज्ञान और हिकमत (बुद्धिमत्ता) के साथ फैसला करता है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह पर भरोसा: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। वह उन्हें मुश्किलों के बाद इज़्ज़त और कामयाबी देता है। यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को बचपन में ही यह खुशखबरी दी गई कि उनका भविष्य उज्ज्वल है, भले ही आगे उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़े।
- इल्म की फज़ीलत: अल्लाह ने यूसुफ (अलैहिस्सलाम) को जो सबसे बड़ी नेमत दी, उसमें सपनों की व्याख्या का ज्ञान भी शामिल था। इससे पता चलता है कि इल्म (ज्ञान) अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है, और जो लोग इल्म हासिल करते हैं, अल्लाह उन्हें ऊँचा दर्जा देता है।
- नबुव्वत और नेक खानदान की बरकत: यह आयत बताती है कि अल्लाह नेक लोगों के खानदानों पर अपनी खास कृपा करता है। इब्राहीम, इसहाक, याकूब और यूसुफ (अलैहिमुस्सलाम) — ये सब एक ही सिलसिले में नबी हुए। यह हमें सिखाता है कि नेकी और अच्छाई का सिलसिला पीढ़ी दर पीढ़ी चलता है, इसलिए हमें अपनी औलाद की परवरिश अच्छे तरीके से करनी चाहिए।
- अल्लाह की हिकमत पर यक़ीन: अल्लाह जो कुछ करता है, उसमें गहरी हिकमत होती है। कभी-कभी हमें अपनी ज़िंदगी में मुश्किलें आती हैं, लेकिन अल्लाह का इल्म और हिकमत हमारी समझ से बाहर है। हमें उस पर भरोसा रखना चाहिए और यक़ीन करना चाहिए कि हर हाल में उसका फैसला बेहतर होता है।
- सपनों की अहमियत: इस आयत से सपनों की अहमियत भी पता चलती है, खासकर नबियों के सपने, जो अल्लाह की तरफ से होते हैं। यह हमें सिखाता है कि अच्छे सपने अल्लाह की तरफ से खुशखबरी हो सकते हैं, और हमें उन्हें अच्छा समझना चाहिए, लेकिन उनके पीछे भागना नहीं चाहिए।
📜 आयत 4-8 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 6
सूरा यूसुफ आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (जो तुमने देखा है) ऐसा ही होगा कि तुम्हारा…सूरा आयत 6/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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