अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِن بَابٍ وَاحِدٍ: एक ही द्वार से
- أَبْوَابٍ مُّتَفَرِّقَةٍ: अलग-अलग द्वारों से
- مَا أُغْنِي: मैं कुछ भी टाल नहीं सकता
- الْحُكْمُ: फैसला, आदेश, निर्णय
- تَوَكَّلْتُ: मैंने भरोसा किया
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत याकूब (अलैहिस्सलाम) के बेटे मिस्र जाने की तैयारी कर रहे थे, तो उन्होंने उन्हें नसीहत करते हुए कहा: "मेरे बेटों! तुम सब एक ही द्वार से मिस्र में प्रवेश न करना, बल्कि अलग-अलग द्वारों से प्रवेश करना।" यह नसीहत उन्होंने इसलिए दी क्योंकि वे अपने बेटों की सुंदरता, शान और अच्छी स्थिति के कारण उन्हें नज़र (बुरी नज़र) लगने से बचाना चाहते थे। उन्हें डर था कि कहीं सब एक साथ एक ही द्वार से प्रवेश करें तो लोगों की नज़र उन पर पड़े और उन्हें कोई नुकसान पहुँचे।
लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि "मैं यह नसीहत इसलिए नहीं कर रहा हूँ कि मैं अल्लाह के फैसले को टाल सकता हूँ। अगर अल्लाह ने तुम्हारे लिए कुछ लिख दिया है, तो वह किसी भी हालत में होकर रहेगा। चाहे तुम एक द्वार से प्रवेश करो या अलग-अलग द्वारों से, अल्लाह की मर्ज़ी के बिना कुछ नहीं हो सकता।" उन्होंने यह बात इसलिए कही ताकि उनके बेटों को यह समझ आए कि वास्तविक ताकत और अधिकार केवल अल्लाह के पास है। फैसला करने का अधिकार केवल अल्लाह को है, वही जो चाहता है करता है।
फिर हज़रत याकूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों को सिखाया कि "मैंने अपने सारे मामलों में अल्लाह पर भरोसा किया है, और जो लोग भरोसा करने वाले हैं, उन्हें भी केवल अल्लाह ही पर भरोसा करना चाहिए।" यानी हर मुसीबत और हर कठिनाई में अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ करने पर क़ादिर (सक्षम) है।
फ़ायदे (लाभ):
- तदबीर (उपाय) करना सुन्नत है: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह पर भरोसा करने का मतलब यह नहीं है कि हम उपाय न करें। हज़रत याकूब (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह पर पूरा भरोसा होने के बावजूद अपने बेटों को अलग-अलग द्वारों से प्रवेश करने की तदबीर बताई। इसलिए मुसलमान को चाहिए कि वह दुनियावी मामलों में उचित उपाय करे और साथ ही अल्लाह पर भरोसा रखे।
- अल्लाह के फैसले पर संतुष्टि: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के फैसले को कोई टाल नहीं सकता। जो कुछ अल्लाह ने लिख दिया है, वह होकर रहेगा। इसलिए हमें हर हाल में अल्लाह की मर्ज़ी पर राज़ी रहना चाहिए।
- भरोसे का सही मक़ाम: हमें अपने भरोसे को केवल अल्लाह पर ही रखना चाहिए। इंसानों पर भरोसा करना, चीज़ों पर भरोसा करना, या अपनी ताकत पर भरोसा करना — यह सब गलत है। सच्चा भरोसा केवल अल्लाह पर होता है, और जो लोग सच्चे मोमिन हैं, वे हर मामले में अल्लाह ही पर भरोसा करते हैं।
- बुरी नज़र से बचाव: इस आयत से यह भी सीख मिलती है कि बुरी नज़र का असर सच्चा है, और उससे बचाव के लिए उचित उपाय करना चाहिए, जैसे कि हज़रत याकूब (अलैहिस्सलाम) ने किया।
- पिता की शफ़क़त: यह आयत माता-पिता के अपनी औलाद के प्रति प्रेम और चिंता को दर्शाती है। हज़रत याकूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों को नसीहत करके यह सिखाया कि माता-पिता को अपनी औलाद की भलाई के लिए हमेशा नसीहत करते रहना चाहिए।
📜 आयत 65-69 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 67
सूरा यूसुफ आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और याक़ूब ने (नसीहतन चलते वक्त बेटो से) कहा ऐ…सूरा आयत 67/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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