अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِنْ حَيْثُ أَمَرَهُمْ أَبُوهُم: उन्होंने (याकूब अलैहिस्सलाम ने) जिन दरवाज़ों से अलग-अलग प्रवेश करने का आदेश दिया था, उन्हीं से।
- مَا كَانَ يُغْنِي: कुछ भी टालने वाला नहीं था, कोई लाभ नहीं पहुँचा सकता था।
- إِلَّا حَاجَةً فِي نَفْسِ يَعْقُوبَ: बल्कि यह केवल याकूब के दिल की एक चाहत (शफ़क़त) थी।
- قَضَاهَا: उन्होंने उसे पूरा कर लिया।
- لَذُو عِلْمٍ: निश्चय ही वे बड़े ज्ञानी थे।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब यूसुफ़ अलैहिस्सलाम के भाई अपने पिता याकूब अलैहिस्सलाम के आदेश के अनुसार अलग-अलग दरवाज़ों से शहर में दाखिल हुए, तो उनके इस तरह प्रवेश करने से अल्लाह का फ़ैसला और उसकी तक़दीर कुछ भी नहीं टल सकती थी। यह कोई ऐसा उपाय नहीं था जो अल्लाह की मर्ज़ी के आगे काम आता। हाँ, यह याकूब अलैहिस्सलाम के दिल में अपने बच्चों के प्रति शफ़क़त और मुहब्बत की वजह से था—वे चाहते थे कि उनकी संतान किसी नज़र या आँख के प्रभाव से बची रहे, इसलिए उन्होंने यह तदबीर (उपाय) की। यह उनके पिता का हक़ और उनकी मुहब्बत का तक़ाज़ा था, जिसे उन्होंने पूरा किया।
याकूब अलैहिस्सलाम को अल्लाह ने जो ज्ञान और समझ दी थी, वे उसके अनुसार ही काम करते थे। वे भली-भाँति जानते थे कि तक़दीर का लिखा टल नहीं सकता, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि इंसान अपनी समझ और उपायों को छोड़ दे। शरीयत और सुन्नत के अनुसार सावधानी बरतना भी ईमान का हिस्सा है। अल्लाह ने उन्हें यह तालीम दी थी कि हर काम में अल्लाह पर भरोसा रखते हुए जायज़ तदबीर करनी चाहिए।
मगर अधिकतर लोग इस हक़ीक़त को नहीं समझते। वे या तो सिर्फ़ तदबीरों पर भरोसा करके अल्लाह को भूल जाते हैं, या फिर तक़दीर का बहाना बनाकर जायज़ उपायों को छोड़ देते हैं। याकूब अलैहिस्सलाम का तरीक़ा यह था कि उन्होंने दोनों को मिलाया—दिल से अल्लाह पर भरोसा और ज़ाहिरी तौर पर जायज़ उपाय। यही सच्चे ईमान की निशानी है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि मुसीबतों और खतरों के समय हमें अपनी समझ और जायज़ उपायों का सहारा लेना चाहिए, लेकिन साथ ही यह यक़ीन भी रखना चाहिए कि असली कार्यकर्ता और निर्णायक केवल अल्लाह है। उसकी मर्ज़ी के बिना कोई चीज़ नहीं हो सकती। यही वह नुक़्ता है जिसे अक्सर लोग भूल जाते हैं—वे अपनी तदबीरों को ही सब कुछ समझ लेते हैं, जबकि हर चीज़ अल्लाह के हाथ में है। जो लोग इस हक़ीक़त को समझ लें, वे कभी निराश नहीं होते और न ही अपने उपायों पर घमंड करते हैं।
📜 आयत 66-70 — यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 68
सूरा यूसुफ आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब ये सब भाई जिस तरह उनके वालिद ने…सूरा आयत 68/111 — यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यूसुफ सुनें, यूसुफ अनुवाद, यूसुफ mp3, यूसुफ pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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