यूसुफ · 85/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा यूसुफ
قَالُوا تَاللَّهِ تَفْتَأُ تَذْكُرُ يُوسُفَ حَتَّىٰ تَكُونَ حَرَضًا أَوْ تَكُونَ مِنَ الْهَالِكِينَ ۝٨٥
Qaaloo tallaahi tafta`u tazkuru Yoosufa hattaa takoona haradan aw takoona minal haalikeen
📖 हिंदी अर्थ
(ये देखकर उनके बेटे) कहने लगे कि आप तो हमेशा यूसुफ को याद ही करते रहिएगा यहाँ तक कि बीमार हो जाएगा या जान ही दे दीजिएगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَفْتَأُ: निरंतर करते रहना, बाज़ न आना। इसका अर्थ है "लगातार" या "हमेशा"।
  • حَرَضًا: वह व्यक्ति जो रोग और दुःख के कारण शरीर से बिल्कुल क्षीण हो गया हो, हड्डियों का ढाँचा मात्र रह गया हो।
  • الْهَالِكِينَ: मरने वाले, नष्ट होने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों से कहा कि "मैं अपना दुःख और पीड़ा अल्लाह ही के सामने प्रकट करता हूँ और मैं अल्लाह की ओर से वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते," तो उनके बेटों ने जवाब में कहा: "अल्लाह की क़सम! तुम हमेशा यूसुफ़ का ज़िक्र करते रहोगे और उसके दुःख में डूबे रहोगे, यहाँ तक कि तुम रोग से क्षीण होकर बर्बाद हो जाओगे या मर ही जाओगे।" उनके इस कथन में उनके पिता के प्रति चिंता और नाराज़गी दोनों का अंश था। वे समझते थे कि पिता ने यूसुफ़ की याद में अपनी सेहत और जीवन को ख़तरे में डाल दिया है। उन्होंने यह बात इसलिए कही ताकि पिता को समझाएँ कि इस तरह के अत्यधिक शोक से न तो यूसुफ़ वापस आएगा और न ही तुम्हारी सेहत बचेगी। यह उनकी ओर से एक नसीहत थी, भले ही उनका अंदाज़ कुछ कठोर था।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि दुःख और परेशानी में भी अत्यधिकता नहीं करनी चाहिए। शरीर और जीवन अल्लाह की अमानत हैं, और उन्हें नष्ट करना या ख़तरे में डालना उचित नहीं।
  2. हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की यह स्थिति दिखाती है कि संतान के प्रति माता-पिता का प्रेम कितना गहरा हो सकता है, लेकिन साथ ही यह भी सबक है कि हर मुसीबत में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और धैर्य का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।
  3. इस आयत में अल्लाह के नबी की बेटों की बातचीत से पता चलता है कि परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे को सही रास्ता दिखाना चाहिए, भले ही बात कड़वी लगे। नसीहत का हक़ अदा करना चाहिए।
  4. यह घटना हमें सिखाती है कि मुसीबत के समय में भी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए, क्योंकि हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों को जवाब दिया कि "मैं अल्लाह की ओर से वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते" — यानी अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए।


📜 आयत 83-87 — सूरा यूसुफ

83قَالَ بَلْ سَوَّلَتْ لَكُمْ أَنفُسُكُمْ أَمْرًا ۖ فَصَبْرٌ جَمِيلٌ ۖ عَسَى اللَّهُ أَن يَأْتِيَنِي بِهِمْ جَمِيعًا ۚ إِنَّهُ هُوَ الْعَلِيمُ الْحَكِيمُ
(ग़रज़ जब उन लोगों ने जाकर बयान किया तो) याक़ूब न कहा (उसने चोरी नहीं की) बल्कि ये बात तुमने अपने दिल से गढ़ ली है तो (ख़ैर) सब्र (और ख़ुदा का) शुक्र ख़ुदा से तो (मुझे) उम्मीद है कि मेरे सब (लड़कों) को मेरे पास पहुँचा दे बेशक वह बड़ा वाकिफ़ कार हकीम है
84وَتَوَلَّىٰ عَنْهُمْ وَقَالَ يَا أَسَفَىٰ عَلَىٰ يُوسُفَ وَابْيَضَّتْ عَيْنَاهُ مِنَ الْحُزْنِ فَهُوَ كَظِيمٌ
और याक़ूब ने उन लोगों की तरफ से मुँह फेर लिया और (रोकर) कहने लगे हाए अफसोस यूसुफ पर और (इस क़दर रोए कि) उनकी ऑंखें सदमे से सफेद हो गई वह तो बड़े रंज के ज़ाबित (झेलने वाले) थे
85قَالُوا تَاللَّهِ تَفْتَأُ تَذْكُرُ يُوسُفَ حَتَّىٰ تَكُونَ حَرَضًا أَوْ تَكُونَ مِنَ الْهَالِكِينَ
(ये देखकर उनके बेटे) कहने लगे कि आप तो हमेशा यूसुफ को याद ही करते रहिएगा यहाँ तक कि बीमार हो जाएगा या जान ही दे दीजिएगा
86قَالَ إِنَّمَا أَشْكُو بَثِّي وَحُزْنِي إِلَى اللَّهِ وَأَعْلَمُ مِنَ اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
याक़ूब ने कहा (मै तुमसे कुछ नहीं कहता) मैं तो अपनी बेक़रारी व रंज की शिकायत ख़ुदा ही से करता हूँ और ख़ुदा की तरफ से जो बातें मै जानता हूँ तुम नहीं जानते हो
87يَا بَنِيَّ اذْهَبُوا فَتَحَسَّسُوا مِن يُوسُفَ وَأَخِيهِ وَلَا تَيْأَسُوا مِن رَّوْحِ اللَّهِ ۖ إِنَّهُ لَا يَيْأَسُ مِن رَّوْحِ اللَّهِ إِلَّا الْقَوْمُ الْكَافِرُونَ
ऐ मेरी फरज़न्द (एक बार फिर मिस्र) जाओ और यूसुफ और उसके भाई को (जिस तरह बने) ढूँढ के ले आओ और ख़ुदा की रहमत से ना उम्मीद न हो क्योंकि ख़ुदा की रहमत से काफिर लोगो के सिवा और कोई ना उम्मीद नहीं हुआ करता
यूसुफकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
85आयत

अनुवाद — यूसुफ 85

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Thursday, October 1, 2026

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