Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَفْتَأُ: निरंतर करते रहना, बाज़ न आना। इसका अर्थ है "लगातार" या "हमेशा"।
- حَرَضًا: वह व्यक्ति जो रोग और दुःख के कारण शरीर से बिल्कुल क्षीण हो गया हो, हड्डियों का ढाँचा मात्र रह गया हो।
- الْهَالِكِينَ: मरने वाले, नष्ट होने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों से कहा कि "मैं अपना दुःख और पीड़ा अल्लाह ही के सामने प्रकट करता हूँ और मैं अल्लाह की ओर से वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते," तो उनके बेटों ने जवाब में कहा: "अल्लाह की क़सम! तुम हमेशा यूसुफ़ का ज़िक्र करते रहोगे और उसके दुःख में डूबे रहोगे, यहाँ तक कि तुम रोग से क्षीण होकर बर्बाद हो जाओगे या मर ही जाओगे।" उनके इस कथन में उनके पिता के प्रति चिंता और नाराज़गी दोनों का अंश था। वे समझते थे कि पिता ने यूसुफ़ की याद में अपनी सेहत और जीवन को ख़तरे में डाल दिया है। उन्होंने यह बात इसलिए कही ताकि पिता को समझाएँ कि इस तरह के अत्यधिक शोक से न तो यूसुफ़ वापस आएगा और न ही तुम्हारी सेहत बचेगी। यह उनकी ओर से एक नसीहत थी, भले ही उनका अंदाज़ कुछ कठोर था।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि दुःख और परेशानी में भी अत्यधिकता नहीं करनी चाहिए। शरीर और जीवन अल्लाह की अमानत हैं, और उन्हें नष्ट करना या ख़तरे में डालना उचित नहीं।
- हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) की यह स्थिति दिखाती है कि संतान के प्रति माता-पिता का प्रेम कितना गहरा हो सकता है, लेकिन साथ ही यह भी सबक है कि हर मुसीबत में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और धैर्य का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।
- इस आयत में अल्लाह के नबी की बेटों की बातचीत से पता चलता है कि परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे को सही रास्ता दिखाना चाहिए, भले ही बात कड़वी लगे। नसीहत का हक़ अदा करना चाहिए।
- यह घटना हमें सिखाती है कि मुसीबत के समय में भी अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए, क्योंकि हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपने बेटों को जवाब दिया कि "मैं अल्लाह की ओर से वह जानता हूँ जो तुम नहीं जानते" — यानी अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए।
📜 आयत 83-87 — सूरा यूसुफ
अनुवाद — यूसुफ 85
सूरा यूसुफ आयत 85 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये देखकर उनके बेटे) कहने लगे कि आप तो हमेशा…सूरा आयत 85/111 — सूरा यूसुफ يوسف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूसुफ सुनें, सूरा यूसुफ अनुवाद, सूरा यूसुफ mp3, सूरा यूसुफ pdf. आयत 83–87. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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