अर-राद · 40/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
وَإِن مَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِنَّمَا عَلَيْكَ الْبَلَاغُ وَعَلَيْنَا الْحِسَابُ ۝٤٠
Wa im maa nurriyannaka ba`dal lazee na`iduhum aw nata waffayannaka fa innamaa `alaikal balaaghu wa `alainal hisaab
📖 हिंदी अर्थ
और (ए रसूल) जो जो वायदे (अज़ाब वगैरह के) हम उन कुफ्फारों से करते हैं चाहे, उनमें से बाज़ तुम्हारे सामने पूरे कर दिखाएँ या तुम्हें उससे पहले उठा लें बहर हाल तुम पर तो सिर्फ एहकाम का पहुचा देना फर्ज है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُرِيَنَّكَ — हम तुम्हें दिखा दें।
  • نَعِدُهُمْ — जिसकी हम उन्हें धमकी दे रहे हैं।
  • نَتَوَفَّيَنَّكَ — हम तुम्हें उठा लें (तुम्हारी मृत्यु हो जाए)।
  • الْبَلَاغُ — (संदेश) पहुँचाना।
  • الْحِسَابُ — हिसाब लेना (प्रतिशोध)।

तफ़सीर:

ऐ नबी! अल्लाह तआला आपको सांत्वना देते हुए फ़रमाता है कि ऐ रसूल! चाहे हम आपको जीते-जी उन काफ़िरों पर वह अज़ाब दिखा दें जिसकी हम उन्हें धमकी दे रहे हैं — और यह बिल्कुल संभव है, क्योंकि अल्लाह की शक्ति के आगे कुछ भी असंभव नहीं — या चाहे हम आपको उससे पहले ही उठा लें और आप उसे न देख पाएँ, तो इन दोनों ही स्थितियों में आपका काम केवल संदेश पहुँचाना है। आप पर उन्हें सज़ा देने या उनका हिसाब लेने की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है। यह काम पूर्ण रूप से हमारा है। हम ही उनका हिसाब लेंगे और उन्हें उनके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देंगे।

इस आयत में नबी करीम ﷺ को एक बहुत बड़ी तसल्ली दी गई है। जब आप ﷺ को अपनी क़ौम की ओर से अत्यधिक कष्ट पहुँचता था और वे आपकी बात नहीं मानते थे, तो आपको यह बताया गया कि आपका काम केवल पहुँचाना है, फल देना अल्लाह के हाथ में है। यही हाल इस उम्मत के दावत देने वालों का है — उन्हें भी यही समझना चाहिए कि हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है, हमारा काम केवल सच्चाई पहुँचाना है।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए और परिणाम अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए। जब हम यह विश्वास कर लेंगे कि हिसाब अल्लाह के ज़िम्मे है, तो हमारे दिल से निराशा और घबराहट दूर हो जाएगी। और यह भी याद रखें कि अल्लाह न्याय करने वाला है — वह किसी के साथ ज़ुल्म नहीं करेगा, और हर अच्छे और बुरे कर्म का पूरा बदला देगा। यही वह चीज़ है जो मोमिन के दिल को सुकून देती है और उसे अपने रब पर पूरा भरोसा करने की ताक़त देती है।



📜 आयत 38-42 — अर-राद

38وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا رُسُلًا مِّن قَبْلِكَ وَجَعَلْنَا لَهُمْ أَزْوَاجًا وَذُرِّيَّةً ۚ وَمَا كَانَ لِرَسُولٍ أَن يَأْتِيَ بِآيَةٍ إِلَّا بِإِذْنِ اللَّهِ ۗ لِكُلِّ أَجَلٍ كِتَابٌ
और हमने तुमसे पहले और (भी) बहुतेरे पैग़म्बर भेजे और हमने उनको बीवियाँ भी दी और औलाद (भी अता की) और किसी पैग़म्बर की ये मजाल न थी कि कोई मौजिज़ा ख़ुदा की इजाज़त के बगैर ला दिखाए हर एक वक्त (मौऊद) के लिए (हमारे यहाँ) एक (क़िस्म की) तहरीर (होती) है
39يَمْحُو اللَّهُ مَا يَشَاءُ وَيُثْبِتُ ۖ وَعِندَهُ أُمُّ الْكِتَابِ
फिर इसमें से ख़ुदा जिसको चाहता है मिटा देता है और (जिसको चाहता है बाक़ी रखता है और उसके पास असल किताब (लौहे महफूज़) मौजूद है
40وَإِن مَّا نُرِيَنَّكَ بَعْضَ الَّذِي نَعِدُهُمْ أَوْ نَتَوَفَّيَنَّكَ فَإِنَّمَا عَلَيْكَ الْبَلَاغُ وَعَلَيْنَا الْحِسَابُ
और (ए रसूल) जो जो वायदे (अज़ाब वगैरह के) हम उन कुफ्फारों से करते हैं चाहे, उनमें से बाज़ तुम्हारे सामने पूरे कर दिखाएँ या तुम्हें उससे पहले उठा लें बहर हाल तुम पर तो सिर्फ एहकाम का पहुचा देना फर्ज है
41أَوَلَمْ يَرَوْا أَنَّا نَأْتِي الْأَرْضَ نَنقُصُهَا مِنْ أَطْرَافِهَا ۚ وَاللَّهُ يَحْكُمُ لَا مُعَقِّبَ لِحُكْمِهِ ۚ وَهُوَ سَرِيعُ الْحِسَابِ
और उनसे हिसाब लेना हमारा काम है क्या उन लोगों ने ये बात न देखी कि हम ज़मीन को (फ़ुतुहाते इस्लाम से) उसके तमाम एतराफ (चारो ओर) से (सवाह कुफ्र में) घटाते चले आते हैं और ख़ुदा जो चाहता है हुक्म देता है उसके हुक्म का कोई टालने वाला नहीं और बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
42وَقَدْ مَكَرَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ فَلِلَّهِ الْمَكْرُ جَمِيعًا ۖ يَعْلَمُ مَا تَكْسِبُ كُلُّ نَفْسٍ ۗ وَسَيَعْلَمُ الْكُفَّارُ لِمَنْ عُقْبَى الدَّارِ
और जो लोग उन (कुफ्फार मक्के) से पहले हो गुज़रे हैं उन लोगों ने भी पैग़म्बरों की मुख़ालफत में बड़ी बड़ी तदबीरे की तो (ख़ाक न हो सका क्योंकि) सब तदबीरे तो ख़ुदा ही के हाथ में हैं जो शख़्श जो कुछ करता है वह उसे खूब जानता है और अनक़रीब कुफ्फार को भी मालूम हो जाएगा कि आख़िरत की खूबी किस के लिए है
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अनुवाद — अर-राद 40

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Tuesday, August 18, 2026

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