Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَمْحُو: मिटा देता है, समाप्त कर देता है।
- يُثْبِتُ: स्थिर रखता है, बनाए रखता है।
- أُمُّ الْكِتَابِ: मूल पुस्तक, यानी लौह-ए-महफूज़ (सुरक्षित पट्टिका)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपनी असीम हिकमत (बुद्धिमत्ता) के अनुसार जो चाहता है मिटा देता है और जो चाहता है स्थिर रखता है। यह मिटाना और स्थिर रखना उसके फ़ैसलों, शरई अहकाम (धार्मिक आदेशों) और तक़दीर के मामलों में होता है। कभी वह किसी हुक्म को मंसूख़ (रद्द) कर देता है, तो कभी उसे बरक़रार रखता है। इसी तरह, वह किसी बंदे की नेकियों, बुराइयों, रिज़्क़ (आजीविका), उम्र, सुख-दुख और भलाई-बुराई में जो चाहता है तब्दीली करता है। लेकिन यह सब कुछ उसके इल्म और हिकमत के मुताबिक़ होता है, और उसके पास "उम्मुल किताब" है, जो लौह-ए-महफूज़ है। यह मूल पुस्तक अल्लाह के पास सुरक्षित है, जिसमें कोई परिवर्तन या तब्दीली नहीं होती। जो कुछ भी मिटाया या स्थिर किया जाता है, वह उसी मूल पुस्तक में लिखे हुए के अनुरूप होता है। यानी, अल्लाह का फ़ैसला हमेशा उसके ज्ञान और पूर्व-निर्धारित योजना के अनुसार ही होता है, और उसका हर काम हिकमत पर आधारित है।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला का अधिकार सबसे बड़ा है। वह जो चाहे फ़ैसला करे, और उसके फ़ैसले पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। यह हमें अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण और आत्मसमर्पण की शिक्षा देता है।
- अल्लाह के पास "उम्मुल किताब" (लौह-ए-महफूज़) का होना हमें यक़ीन दिलाता है कि इस कायनात (ब्रह्मांड) का हर ज़र्रा अल्लाह के इल्म और नियंत्रण में है। कोई चीज़ उसके इल्म से बाहर नहीं है, और न ही कोई चीज़ उसकी मर्ज़ी के बिना होती है।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की हिकमत (बुद्धिमत्ता) हर चीज़ पर छाई हुई है। जब हम देखते हैं कि अल्लाह किसी चीज़ को बदलता या मिटाता है, तो हमें यक़ीन होता है कि उसमें कोई भलाई छिपी है, भले ही हमें वह समझ न आए। यह हमारे ईमान को मज़बूत करता है।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि क़ुरआन और पिछली शरीअतों के अहकाम में से जो अल्लाह ने मंसूख़ किए, वह उसकी हिकमत से था, और जो बरक़रार रखे, वह भी उसकी हिकमत से है। इससे हमें यह समझ मिलती है कि इस्लाम एक पूर्ण और अंतिम धर्म है, जो हर ज़माने के लिए मुनासिब है।
- यह आयत हमें अल्लाह के भरोसे और उसकी रहमत की ओर ले जाती है। जब हमें पता चलता है कि अल्लाह अपनी मर्ज़ी से बंदों की हालत बदल सकता है, तो हम उससे उम्मीद रखते हैं कि वह हमारी मुश्किलों को भी आसान कर देगा, हमारे गुनाहों को माफ़ कर देगा और हमारी दुआओं को क़बूल करेगा। यह हमें अल्लाह से जुड़ने और उसकी इबादत में मशगूल रहने की तरग़ीब देता है।
📜 आयत 37-41 — सूरा अर-राद
अनुवाद — अर-राद 39
सूरा अर-राद आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर इसमें से ख़ुदा जिसको चाहता है मिटा देता है…सूरा आयत 39/43 — सूरा अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अर-राद सुनें, सूरा अर-राद अनुवाद, सूरा अर-राद mp3, सूरा अर-राद pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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