Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- تُؤْتِي أُكُلَهَا: अपना फल देती है।
- كُلَّ حِينٍ: हर समय, हर मौसम में।
- بِإِذْنِ رَبِّهَا: अपने रब की आज्ञा से।
- يَضْرِبُ اللهُ الأَمْثَالَ: अल्लाह मिसालें बयान करता है।
- لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ: ताकि वे सीख लें और समझ जाएँ।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में ईमान की मिसाल एक अच्छे (पाकीज़ा) दरख़्त से दी है। यह दरख़्त हर मौसम में अपने रब की आज्ञा से फल देता रहता है। इसी तरह ईमान की जड़ मोमिन के दिल में मज़बूती से जमी होती है, और उसकी शाखें उसके अच्छे आमाल (कर्म), अच्छे अख़लाक़ (स्वभाव) और नेक बातें होती हैं, जो हर वक़्त अल्लाह की तरफ ऊपर उठती हैं और उसे हर समय इसका सवाब और अच्छा बदला मिलता रहता है। जैसे पेड़ को जड़, तना और ऊँची शाखों की ज़रूरत होती है, उसी तरह ईमान को दिल से तस्दीक़ (सच्चा यक़ीन), ज़ुबान से इक़रार (अभिव्यक्ति) और अंगों से अमल (कर्म) की ज़रूरत होती है।
अल्लाह तआला लोगों के सामने ये मिसालें इसलिए बयान करता है ताकि वे अक़्ल से काम लें, ग़ौर करें और इनसे सबक़ हासिल करें। मिसालों के ज़रिए समझाना इसलिए बेहतर है क्योंकि इससे बात दिल में उतर जाती है और अक़्लमंद लोगों के लिए समझना आसान हो जाता है।
फ़ायदे (सबक़):
- ईमान की हक़ीक़त एक मज़बूत दरख़्त की तरह है — जिसकी जड़ दिल में और शाखें अच्छे आमाल में होती हैं। जिसका ईमान जितना मज़बूत होगा, उसके अच्छे कर्म उतने ही ज़्यादा और लगातार होंगे।
- मोमिन का अमल सिर्फ़ एक मौसम या एक वक़्त तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह हर हालत में — खुशी, ग़म, आसानी और मुश्किल में — नेक काम करता रहता है।
- अल्लाह तआला ने क़ुरआन में मिसालें इसलिए बयान कीं ताकि इंसान उनसे सीखे। इसलिए हमें चाहिए कि क़ुरआन की आयात पर ग़ौर करें और उनसे सबक़ लें।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमारा रिश्ता अल्लाह से जुड़ा होना चाहिए — जैसे पेड़ को पानी और मिट्टी से, वैसे ही मोमिन को अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा से ताक़त मिलती है।
📜 आयत 23-27 — सूरा इब्राहीम
अनुवाद — इब्राहीम 25
सूरा इब्राहीम आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : अपने परवरदिगार के हुक्म से हर वक्त फ़ला (फूला) रहता…सूरा आयत 25/52 — सूरा इब्राहीम إبراهيم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा इब्राहीम सुनें, सूरा इब्राहीम अनुवाद, सूरा इब्राहीम mp3, सूरा इब्राहीम pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा इब्राहीम
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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