अन-नहल · 128/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
إِنَّ اللَّهَ مَعَ الَّذِينَ اتَّقَوا وَّالَّذِينَ هُم مُّحْسِنُونَ ۝١٢٨
Innal laaha ma`al lazeenat taqaw wal lazeena hum muhsinoon
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग परहेज़गार हैं और जो लोग नेको कार हैं ख़ुदा उनका साथी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اتَّقَوا: जिन्होंने अल्लाह का भय रखते हुए उसके आदेशों का पालन किया और उसकी मनाही से बचे।
  • مُحْسِنُونَ: जो अपने कर्मों को अच्छे ढंग से, ख़ालिस नीयत और सुन्नत के अनुसार करते हैं, और अल्लाह की इबादत इस तरह करते हैं जैसे वे उसे देख रहे हैं।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने बंदों को यह बेशक़ीमती बशारत देता है कि वह उन लोगों के साथ है जो तक़वा (परहेज़गारी) अपनाते हैं और जो एहसान (नेकी) करने वाले हैं। "अल्लाह का साथ होना" का मतलब यह है कि वह उन्हें अपनी ख़ास मदद, हिफ़ाज़त, नुसरत और तौफ़ीक़ अता करता है। तक़वा का मतलब है कि इंसान अल्लाह के हुक्मों को पूरा करे, उसकी नफ़रमानी से बचे, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढाले। एहसान का मतलब है कि इंसान अपने आमाल (कर्मों) को बेहतरीन तरीक़े से अंजाम दे, चाहे वह इबादत हो, या लोगों के साथ अच्छा सुलूक हो, या अपने फ़राइज़ (कर्तव्यों) को अदा करना हो। यानी जो लोग अल्लाह से डरते हैं और अपने कामों में अच्छाई और खूबसूरती पैदा करते हैं, अल्लाह उन्हें अकेला नहीं छोड़ता, बल्कि हर कदम पर उनकी मदद करता है, उनके दिलों को सुकून देता है और उनके कामों में बरकत डालता है। यह साथ दुनिया में भी है और आख़िरत में भी, जहाँ उन्हें जन्नत और अल्लाह की रज़ा का इनाम मिलेगा।

फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की मदद और नुसरत उन्हीं को मिलती है जो तक़वा और एहसान अपनाते हैं — यह सबसे बड़ी कामयाबी की कुंजी है।
  2. यह आयत मुसलमानों को हौसला देती है कि अगर वे अल्लाह के साथ रहेंगे (यानी उसकी इताअत करेंगे), तो अल्लाह भी उनके साथ होगा — यह एक ऐसा रिश्ता है जो कभी नहीं टूटता।
  3. तक़वा सिर्फ़ नमाज़ और रोज़े तक महदूद नहीं, बल्कि हर उस काम में परहेज़गारी है जो अल्लाह को नापसंद है — चाहे वह ज़ुबान का, आँख का, या दिल का हो।
  4. एहसान का मतलब है कि इंसान अपने कामों को सिर्फ़ अल्लाह के लिए और बेहतरीन तरीक़े से करे — यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और उसकी मुहब्बत का ज़रिया बनती है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की मदद का वादा उन लोगों के लिए है जो अच्छाई और नेकी पर क़ायम रहते हैं — इसलिए मुसलमान को चाहिए कि वह हमेशा नेकी पर साबित-क़दम रहे, चाहे हालात कैसे भी हों।


📜 आयत 126-128 — सूरा अन-नहल

126وَإِنْ عَاقَبْتُمْ فَعَاقِبُوا بِمِثْلِ مَا عُوقِبْتُم بِهِ ۖ وَلَئِن صَبَرْتُمْ لَهُوَ خَيْرٌ لِّلصَّابِرِينَ
और हिदायत याफ़ता लोगों से भी खूब वाक़िफ है और अगर (मुख़ालिफीन के साथ) सख्ती करो भी तो वैसी ही सख्ती करो जैसे सख्ती उन लोगों ने तुम पर की थी और अगर तुम सब्र करो तो सब्र करने वालों के वास्ते बेहतर हैं
127وَاصْبِرْ وَمَا صَبْرُكَ إِلَّا بِاللَّهِ ۚ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُ فِي ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُونَ
और (ऐ रसूल) तुम सब्र ही करो (और ख़ुदा की (मदद) बग़ैर तो तुम सब्र कर भी नहीं सकते और उन मुख़ालिफीन के हाल पर तुम रंज न करो और जो मक्कारीयाँ ये लोग करते हैं उससे तुम तंग दिल न हो
128إِنَّ اللَّهَ مَعَ الَّذِينَ اتَّقَوا وَّالَّذِينَ هُم مُّحْسِنُونَ
जो लोग परहेज़गार हैं और जो लोग नेको कार हैं ख़ुदा उनका साथी है
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
128आयत

अनुवाद — अन-नहल 128

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Friday, October 2, 2026

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