अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सब्र करें।
- صَبْرُكَ إِلَّا بِاللَّهِ: आपका धैर्य अल्लाह ही की मदद और तौफ़ीक़ से है।
- وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ: उन (काफ़िरों) के कारण दुखी न हों।
- ضَيْقٍ: तंगी, संकट, मन की बेचैनी।
- يَمْكُرُونَ: वे चालें चलते हैं, धोखा और कपट करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! आप धैर्य और सब्र को अपनाएँ, चाहे आपको अल्लाह के मार्ग में कितनी भी तकलीफ़ें और मुश्किलें क्यों न उठानी पड़ें। याद रखें कि आपका सब्र आपके अपने बूते पर नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह अल्लाह की मदद और उसकी तौफ़ीक़ से है। वही आपको सब्र की ताक़त देता है और आपके दिल को मज़बूत करता है। इसलिए आपको चाहिए कि उसी से मदद माँगें और उसी पर भरोसा रखें।
फिर अल्लाह तआला आपको तसल्ली देते हुए फ़रमाता है कि जो लोग आपकी दावत को नहीं मानते और ईमान नहीं लाते, उनके हाल पर आप दुखी और उदास न हों। आपने अपना फ़र्ज़ अदा कर दिया है, हिदायत देना आपका काम नहीं, बल्कि अल्लाह के हाथ में है। और जो लोग आपके खिलाफ़ चालें चल रहे हैं, आपके दीन को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं और तरह-तरह की साज़िशें कर रहे हैं, उनकी इन मक्कारियों से आपका दिल तंग और बेचैन न हो। क्योंकि उनकी ये सारी चालें आख़िरकार उन्हीं पर उलटकर आएँगी और उन्हीं के लिए बर्बादी और अज़ाब का सबब बनेंगी। अल्लाह उनकी साज़िशों से आपकी हिफ़ाज़त करेगा और आपको कामयाबी देगा।
फ़ायदे (उपदेश):
- सब्र अल्लाह की मदद से आता है: यह आयत हमें सिखाती है कि सब्र करना कोई आसान काम नहीं है, बल्कि यह अल्लाह की ख़ास मदद से ही मुमकिन है। इसलिए जब भी हम किसी मुश्किल में हों, तो अल्लाह से सब्र की दुआ करें और उसी से मदद माँगें।
- निराशा और उदासी से बचें: जब हमारी कोई अच्छी कोशिश नाकाम हो जाए या लोग हमारी बात न मानें, तो हमें दुखी और उदास नहीं होना चाहिए। हमारा काम कोशिश करना है, नतीजा अल्लाह के हाथ में है। यही सोच हमें निराशा से बचाती है।
- दुश्मनों की चालों से घबराएँ नहीं: जो लोग हमारे खिलाफ़ साज़िशें करते हैं, उनकी चालों से हमें डरना या बेचैन नहीं होना चाहिए। अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उनकी साज़िशें उन्हीं पर भारी पड़ती हैं। यह विश्वास हमें मन की शांति देता है।
- अल्लाह पर भरोसा: यह आयत हमें सिखाती है कि हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें। वही हमारा सहारा है, वही हमें ताक़त देता है और वही हमारे दुश्मनों से हमारी रक्षा करता है। जिसे अल्लाह का भरोसा हो, वह कभी अकेला और कमज़ोर नहीं होता।
📜 आयत 125-128 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 127
सूरा अन-नहल आयत 127 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम सब्र ही करो (और ख़ुदा की…सूरा आयत 127/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 125–128. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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