अन-नहल · 18/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَإِن تَعُدُّوا نِعْمَةَ اللَّهِ لَا تُحْصُوهَا ۗ إِنَّ اللَّهَ لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝١٨
Wa in ta`uddoo ni`matal laahi laa tuhsoohaa; innal laaha la Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या जो (ख़ुदा इतने मख़लूकात को) पैदा करता है वह उन (बुतों के बराबर हो सकता है जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते तो क्या तुम (इतनी बात भी) नहीं समझते और अगर तुम ख़ुदा की नेअमतों को गिनना चाहो तो (इस कसरत से हैं कि) तुम नहीं गिन सकते हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नِعْمَةَ اللَّهِ: अल्लाह की नेमतें और अनुग्रह।
  • تُحْصُوهَا: उन्हें गिनना, उनकी गिनती पर क़ाबू पाना, उन्हें पूरी तरह से समझना या उनका हिसाब रखना।
  • لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ: निश्चित रूप से बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐ लोगो! यदि तुम अल्लाह की नेमतों को गिनने की कोशिश भी करो, तो तुम उन्हें कभी पूरी तरह से गिन नहीं सकते। उसकी नेमतें इतनी अधिक और इतने प्रकार की हैं कि उनका कोई अंत नहीं। हर साँस, हर पल, हर अंग, हर सुख-सुविधा, हर ज्ञान, हर रिज़्क़ — सब कुछ उसी की देन है। तुम्हारी समझ और तुम्हारी शक्ति उन्हें गिनने से असमर्थ है।

इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है कि वह बड़ा क्षमाशील और अत्यंत दयावान है। उसकी यह क्षमा और दया इस बात का प्रमाण है कि वह तुम्हारी नेमतों के प्रति कृतज्ञता (शुक्र) अदा करने में तुम्हारी कमी को माफ़ कर देता है। वह तुम्हारी नाफ़रमानियों और कमियों के बावजूद तुमसे नेमतें नहीं छीनता, न ही तुम्हें तुरंत सज़ा देता है। बल्कि वह अपनी रहमत से तुम्हें मौक़ा देता है, तुम्हारी ग़लतियों को ढकता है और अपनी नेमतें जारी रखता है। यह उसकी असीम दया और क्षमा का ही परिणाम है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. यह आयत हमें अल्लाह की नेमतों के प्रति कृतज्ञता और विनम्रता सिखाती है। जब हमें यह एहसास होता है कि हम उसकी नेमतों का पूरा हिसाब नहीं कर सकते, तो हमारा दिल उसके प्रति शुक्र और मुहब्बत से भर जाता है।
  2. यह हमें अल्लाह की क्षमा और दया की उम्मीद देती है। हमें सिखाती है कि भले ही हम शुक्र अदा करने में कमी करें, अल्लाह की रहमत हमें घेरे हुए है, बशर्ते हम सच्चे दिल से तौबा करें और उसकी ओर लौटें।
  3. यह आयत हमें अल्लाह की नेमतों को पहचानने और उनकी क़द्र करने की तरफ़ रहनुमाई करती है। जब हम अपने आस-पास देखते हैं — स्वास्थ्य, परिवार, रोज़ी, ईमान — तो हमें महसूस होता है कि अल्लाह ने हम पर कितनी बड़ी मेहरबानियाँ की हैं।
  4. यह हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की नेमतें केवल भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक भी हैं — जैसे ईमान, हिदायत, और क़ुरआन का ज्ञान — जो सबसे बड़ी नेमतें हैं। इनकी क़द्र करना और इन पर अमल करना हमारा फ़र्ज़ है।


📜 आयत 16-20 — सूरा अन-नहल

16وَعَلَامَاتٍ ۚ وَبِالنَّجْمِ هُمْ يَهْتَدُونَ
ताकि (ऐसा न हों) कि ज़मीन तुम्हें लेकर झुक जाए (और तुम्हारे क़दम न जमें) और (उसी ने) नदियाँ और रास्ते (बनाए)
17أَفَمَن يَخْلُقُ كَمَن لَّا يَخْلُقُ ۗ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
ताकि तुम (अपनी अपनी मंज़िले मक़सूद तक पहुँचों (उसके अलावा रास्तों में) और बहुत सी निशानियाँ (पैदा की हैं) और बहुत से लोग सितारे से भी राह मालूम करते हैं
18وَإِن تَعُدُّوا نِعْمَةَ اللَّهِ لَا تُحْصُوهَا ۗ إِنَّ اللَّهَ لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
तो क्या जो (ख़ुदा इतने मख़लूकात को) पैदा करता है वह उन (बुतों के बराबर हो सकता है जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते तो क्या तुम (इतनी बात भी) नहीं समझते और अगर तुम ख़ुदा की नेअमतों को गिनना चाहो तो (इस कसरत से हैं कि) तुम नहीं गिन सकते हो
19وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है कि (तुम्हारी नाफरमानी पर भी नेअमत देता है)
20وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَا يَخْلُقُونَ شَيْئًا وَهُمْ يُخْلَقُونَ
और जो कुछ तुम छिपाकर करते हो और जो कुछ ज़ाहिर करते हो (ग़रज़) ख़ुदा (सब कुछ) जानता है और (ये कुफ्फार) ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों को (हाजत के वक्त) पुकारते हैं वह कुछ भी पैदा नहीं कर सकते
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
18आयत

अनुवाद — अन-नहल 18

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Friday, October 2, 2026

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