अन-नहल · 17/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
أَفَمَن يَخْلُقُ كَمَن لَّا يَخْلُقُ ۗ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ۝١٧
Afamany yakhluqu kamallaa yakhluq; afalaa tazak karoon
📖 हिंदी अर्थ
ताकि तुम (अपनी अपनी मंज़िले मक़सूद तक पहुँचों (उसके अलावा रास्तों में) और बहुत सी निशानियाँ (पैदा की हैं) और बहुत से लोग सितारे से भी राह मालूम करते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अफ़मन यख़्लुक़ु: क्या जो पैदा करता है (अल्लाह)
  • कमन ला यख़्लुक़ु: उसके समान है जो पैदा नहीं करता (मूर्तियाँ और झूठे देवता)
  • अफ़ला तज़क्करून: क्या तुम नसीहत और सीख नहीं लेते?

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में एक अत्यंत स्पष्ट और तर्कपूर्ण प्रश्न पूछ रहा है — क्या वह जो सृष्टि करता है, वह उसके समान हो सकता है जो कुछ भी सृष्टि नहीं करता? यानी, अल्लाह जो आसमान, ज़मीन, पहाड़, नदियाँ, इंसान, जानवर, पेड़-पौधे — सब कुछ पैदा करता है, क्या वह उन मूर्तियों और झूठे देवताओं के बराबर हो सकता है जो न तो कुछ पैदा करते हैं, न किसी को फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न ही नुक़सान?

यह प्रश्न स्वयं ही उत्तर दे देता है — बिल्कुल नहीं! जो सृष्टिकर्ता है, वह सृष्टि नहीं करने वालों से कभी बराबर नहीं हो सकता। फिर भी, कुछ लोग इन निर्जीव मूर्तियों को अल्लाह का भागीदार बना लेते हैं और उनकी पूजा करते हैं। यह कितनी बड़ी नासमझी और भ्रम की बात है!

अल्लाह फरमाता है: "क्या तुम नसीहत नहीं लेते?" यानी, क्या तुम्हारी अक़्ल और समझ इस कदर मृत हो गई है कि तुम इस सरल सत्य को नहीं समझते? जो खुद कुछ बनाने की क्षमता नहीं रखता, वह पूजा का हक़दार कैसे हो सकता है? पूजा तो केवल उसी की होनी चाहिए जो सब कुछ बनाने वाला है।

फ़ायदे (सीख):

  1. तौहीद (एकेश्वरवाद) की सबसे बड़ी दलील: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पूजा का सबसे बड़ा प्रमाण उसकी सृष्टि है। जो सृष्टि करता है, वही पूजा का हक़दार है।
  2. अक़्ल का इस्तेमाल: इस्लाम हमें सिखाता है कि हम अपनी अक़्ल और समझ का इस्तेमाल करें। अंधी पैरवी और बिना सोचे-समझे रीति-रिवाज़ों का पालन इस्लाही तरीक़ा नहीं है।
  3. अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर: जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — यह विशाल ब्रह्मांड, यह सुंदर प्रकृति, हमारा अपना शरीर — तो हमें अल्लाह की महानता का अहसास होता है। यह अहसास हमें उसकी इबादत की ओर खींचता है।
  4. सच्ची आज़ादी: मूर्तियों और झूठे देवताओं की पूजा से मुक्त होकर केवल अल्लाह की इबादत करना ही सच्ची आज़ादी है। यह इंसान को ग़ुलामी से निकालकर सच्चे मालिक की ओर ले जाती है।
  5. नसीहत लेने की तरग़ीब: अल्लाह हमें बार-बार नसीहत लेने की तरग़ीब देता है। क़ुरआन की हर आयत हमारे लिए एक सबक़ है, बशर्ते हम उसे खुले दिल से पढ़ें और समझें।
🎧 सुनें

📜 आयत 15-19 — अन-नहल

15وَأَلْقَىٰ فِي الْأَرْضِ رَوَاسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمْ وَأَنْهَارًا وَسُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
और (दरिया को तुम्हारे ताबेए) इसलिए (कर दिया) कि तुम लोग उसके फज़ल (नफा तिजारत) की तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो और उसी ने ज़मीन पर (भारी भारी) पहाड़ों को गाड़ दिया
16وَعَلَامَاتٍ ۚ وَبِالنَّجْمِ هُمْ يَهْتَدُونَ
ताकि (ऐसा न हों) कि ज़मीन तुम्हें लेकर झुक जाए (और तुम्हारे क़दम न जमें) और (उसी ने) नदियाँ और रास्ते (बनाए)
17أَفَمَن يَخْلُقُ كَمَن لَّا يَخْلُقُ ۗ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
ताकि तुम (अपनी अपनी मंज़िले मक़सूद तक पहुँचों (उसके अलावा रास्तों में) और बहुत सी निशानियाँ (पैदा की हैं) और बहुत से लोग सितारे से भी राह मालूम करते हैं
18وَإِن تَعُدُّوا نِعْمَةَ اللَّهِ لَا تُحْصُوهَا ۗ إِنَّ اللَّهَ لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
तो क्या जो (ख़ुदा इतने मख़लूकात को) पैदा करता है वह उन (बुतों के बराबर हो सकता है जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते तो क्या तुम (इतनी बात भी) नहीं समझते और अगर तुम ख़ुदा की नेअमतों को गिनना चाहो तो (इस कसरत से हैं कि) तुम नहीं गिन सकते हो
19وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है कि (तुम्हारी नाफरमानी पर भी नेअमत देता है)
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीRevelation
17आयत

अनुवाद — अन-नहल 17

सूरा अन-नहल आयत 17 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि तुम (अपनी अपनी मंज़िले मक़सूद तक पहुँचों (उसके अलावा…

सूरा आयत 17/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए