अन-नहल · 19/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ ۝١٩
Wallaahu ya`lamu maa tusirroona wa maa tu`linoon
📖 हिंदी अर्थ
बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है कि (तुम्हारी नाफरमानी पर भी नेअमत देता है)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تُسِرُّونَ: तुम छिपाते हो, अपने दिलों में रखते हो।
  • تُعْلِنُونَ: तुम प्रकट करते हो, ज़ाहिर करते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला को हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान है। वह उन सभी बातों को जानता है जिन्हें तुम अपने दिलों में छिपाते हो, चाहे वे विचार हों, इरादे हों या भीतरी अवस्थाएँ — और वह उन सभी कार्यों और बातों को भी जानता है जिन्हें तुम अपनी ज़ुबान से बोलते हो या अपने अंगों से करते हो। उसके ज्ञान से कोई भी चीज़ छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी। वह तुम्हारे अंदरूनी और बाहरी हालात से पूरी तरह अवगत है। यही नहीं, वह तुम्हारे इन सारे कर्मों का हिसाब लेगा और उनका पूरा बदला देगा — अच्छे कर्मों का अच्छा बदला और बुरे कर्मों का बुरा बदला। यह आयत अल्लाह के उस ज्ञान की याद दिलाती है जो हर समय हमारे साथ है, चाहे हम अकेले हों या लोगों के बीच।

फ़ायदे (सीख):

  1. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की निगरानी हम पर हर वक़्त है — हमारे छिपे और खुले सभी काम उसके सामने हैं। यह एहसास इंसान को गुनाहों से बचाता है और उसे सच्चाई और ईमानदारी पर चलने की ताक़त देता है।
  2. यह जानना कि अल्लाह हमारे दिल की बातें भी जानता है, हमें अल्लाह से नज़दीकी का एहसास कराता है। जब हम अकेले में उससे दुआ करते हैं या उससे बातें करते हैं, तो वह हमें सुनता और जानता है — यह एक बहुत बड़ी तसल्ली और सुकून की बात है।
  3. यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमारे अंदर और बाहर में फ़र्क़ नहीं होना चाहिए। जो हम दिल में रखते हैं और जो ज़ुबान से कहते हैं, वह एक जैसा होना चाहिए — यही ईमान की निशानी है।
  4. अल्लाह का यह ज्ञान हमें याद दिलाता है कि हमारे हर अच्छे काम का बदला अल्लाह के पास सुरक्षित है, चाहे लोग उसे जानें या न जानें। यह नेकी पर चलने की प्रेरणा देता है और हमें निराशा से बचाता है।


📜 आयत 17-21 — सूरा अन-नहल

17أَفَمَن يَخْلُقُ كَمَن لَّا يَخْلُقُ ۗ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ
ताकि तुम (अपनी अपनी मंज़िले मक़सूद तक पहुँचों (उसके अलावा रास्तों में) और बहुत सी निशानियाँ (पैदा की हैं) और बहुत से लोग सितारे से भी राह मालूम करते हैं
18وَإِن تَعُدُّوا نِعْمَةَ اللَّهِ لَا تُحْصُوهَا ۗ إِنَّ اللَّهَ لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
तो क्या जो (ख़ुदा इतने मख़लूकात को) पैदा करता है वह उन (बुतों के बराबर हो सकता है जो कुछ भी पैदा नहीं कर सकते तो क्या तुम (इतनी बात भी) नहीं समझते और अगर तुम ख़ुदा की नेअमतों को गिनना चाहो तो (इस कसरत से हैं कि) तुम नहीं गिन सकते हो
19وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُسِرُّونَ وَمَا تُعْلِنُونَ
बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है कि (तुम्हारी नाफरमानी पर भी नेअमत देता है)
20وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَا يَخْلُقُونَ شَيْئًا وَهُمْ يُخْلَقُونَ
और जो कुछ तुम छिपाकर करते हो और जो कुछ ज़ाहिर करते हो (ग़रज़) ख़ुदा (सब कुछ) जानता है और (ये कुफ्फार) ख़ुदा को छोड़कर जिन लोगों को (हाजत के वक्त) पुकारते हैं वह कुछ भी पैदा नहीं कर सकते
21أَمْوَاتٌ غَيْرُ أَحْيَاءٍ ۖ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ
(बल्कि) वह ख़ुद दूसरों के बनाए हुए मुर्दे बेजान हैं और इतनी भी ख़बर नहीं कि कब (क़यामत) होगी और कब मुर्दे उठाए जाएगें
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
19आयत

अनुवाद — अन-नहल 19

सूरा अन-नहल आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है कि (तुम्हारी नाफरमानी…

सूरा आयत 19/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए