अन-नहल · 5/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
وَالْأَنْعَامَ خَلَقَهَا ۗ لَكُمْ فِيهَا دِفْءٌ وَمَنَافِعُ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ ۝٥
Wal an `amaa khalaqahaa; lakum feehaa dif`unw wa manaafi`u wa minhaa taakuloon
📖 हिंदी अर्थ
उसी ने चरपायों को भी पैदा किया कि तुम्हारे लिए ऊन (ऊन की खाल और ऊन) से जाडे क़ा सामान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَالْأَنْعَامَ: चौपाये (ऊँट, गाय, बैल, भेड़, बकरी आदि)।
  • دِفْءٌ: गर्मी से बचाव, यानी ऊन और बालों से बने कपड़े और तम्बू आदि।
  • مَنَافِعُ: अन्य लाभ (दूध, खाल, सवारी, बोझ ढोना, आदि)।
  • تَأْكُلُونَ: तुम खाते हो (इनका मांस)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बड़ी नेमत (कृपा) का ज़िक्र किया है कि उसने चौपायों (ऊँट, गाय, बैल, भेड़, बकरी) को खासतौर पर इंसानों के लिए पैदा किया। इन जानवरों में इंसानों के लिए कई फायदे रखे हैं:

  1. दिफ़ा (गर्मी से बचाव): इनके ऊन, बाल और रोएं से कपड़े, कंबल, गलीचे और तम्बू बनाए जाते हैं, जिनसे इंसान सर्दी से अपनी हिफाज़त करता है। यह उनकी ज़िंदगी का एक बुनियादी ज़रिया है।
  2. मनाफ़े (अन्य लाभ): इनके दूध से पीने की चीज़ें, खाल से चमड़ा और जूते-चप्पल, और इनकी पीठ पर सवारी करना और सामान ढोना — ये सब इंसान के लिए बड़े काम की चीज़ें हैं। यानी इनसे इंसान को ज़िंदगी के कई ज़रूरी फायदे मिलते हैं।
  3. खाना: इन्हीं चौपायों के मांस से इंसान अपनी भूख मिटाता है और अपने शरीर को ताकत देता है। यानी इनका गोश्त इंसान के लिए रिज़्क़ (आजीविका) का ज़रिया है।

यह आयत बताती है कि अल्लाह ने ये सारे जानवर इंसान की खिदमत के लिए पैदा किए, और इंसान को चाहिए कि वह इन नेमतों को पहचाने और अल्लाह का शुक्र अदा करे।


फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की रहमत और कृपा का अंदाज़ा होता है कि उसने इंसान के लिए चौपायों को इस तरह मुसख़्खर (वश में) किया कि इंसान उन्हें अपने काम में लाता है — यह अल्लाह की कुदरत की निशानी है।
  2. इंसान को चाहिए कि वह इन जानवरों के साथ नेकी और रहम से पेश आए, क्योंकि ये अल्लाह की अमानत हैं और इंसान की खिदमत के लिए दी गई हैं।
  3. यह आयत इंसान को अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनाती है — जब वह गर्म कपड़े पहनता है, दूध पीता है, या मांस खाता है, तो उसे याद रखना चाहिए कि ये सब अल्लाह की देन है।
  4. इससे ईमान मज़बूत होता है कि अल्लाह ही रिज़्क़ देने वाला है, और वही सब कुछ पैदा करने वाला है — इसलिए उसी की इबादत करनी चाहिए और उसी से मदद मांगनी चाहिए।


📜 आयत 3-7 — अन-नहल

3خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ بِالْحَقِّ ۚ تَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
उसी ने सारे आसमान और ज़मीन मसलहत व हिकमत से पैदा किए तो ये लोग जिसको उसका यशरीक बनाते हैं उससे कहीं बरतर है
4خَلَقَ الْإِنسَانَ مِن نُّطْفَةٍ فَإِذَا هُوَ خَصِيمٌ مُّبِينٌ
उसने इन्सान को नुत्फे से पैदा किया फिर वह यकायक (हम ही से) खुल्लम खुल्ला झगड़ने वाला हो गया
5وَالْأَنْعَامَ خَلَقَهَا ۗ لَكُمْ فِيهَا دِفْءٌ وَمَنَافِعُ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
उसी ने चरपायों को भी पैदा किया कि तुम्हारे लिए ऊन (ऊन की खाल और ऊन) से जाडे क़ा सामान है
6وَلَكُمْ فِيهَا جَمَالٌ حِينَ تُرِيحُونَ وَحِينَ تَسْرَحُونَ
इसके अलावा और भी फायदें हैं और उनमें से बाज़ को तुम खाते हो और जब तुम उन्हें सिरे शाम चराई पर से लाते हो जब सवेरे ही सवेरे चराई पर ले जाते हो
7وَتَحْمِلُ أَثْقَالَكُمْ إِلَىٰ بَلَدٍ لَّمْ تَكُونُوا بَالِغِيهِ إِلَّا بِشِقِّ الْأَنفُسِ ۚ إِنَّ رَبَّكُمْ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ
तो उनकी वजह से तुम्हारी रौनक़ भी है और जिन शहरों तक बग़ैर बड़ी जान ज़ोख़म में डाले बगैर के पहुँच न सकते थे वहाँ तक ये चौपाए भी तुम्हारे बोझे भी उठा लिए फिरते हैं इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा शफीक़ मेहरबान है
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अनुवाद — अन-नहल 5

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Tuesday, August 18, 2026

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