अन-नहल · 42/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ ۝٤٢
Allazeena sabaroo wa `alaa Rabbihim yatawak kaloon
📖 हिंदी अर्थ
और अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं (आख़िरत का सवाब) जानते होते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • صَبَرُوا – उन्होंने धैर्य रखा (अल्लाह के आदेशों पर अमल करने में, उसकी मनाही से बचने में, और कष्टदायक तक़दीर पर)
  • يَتَوَكَّلُونَ – वे भरोसा करते हैं, अपने सारे मामले अल्लाह को सौंप देते हैं

व्याख्या:

ये वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की राह में हिजरत (प्रवास) किया और अपने घर-बार, रिश्तेदारों और वतन को छोड़ा। उन्होंने अपने समुदाय के लोगों की ओर से होने वाले कष्टों और अत्याचारों पर धैर्य रखा। उन्होंने अल्लाह के आदेशों का पालन करने में, उसके द्वारा मना की गई चीज़ों से बचने में, और उसकी ओर से आने वाली कठिन परिस्थितियों पर भी सब्र किया। साथ ही, वे अपने सारे मामलों में केवल अपने रब पर भरोसा रखते हैं, उसी पर अपना पूरा भरोसा टिकाते हैं और उसी को अपने सारे कार्य सौंप देते हैं। यही वह गुण है जिसके कारण उन्हें यह महान पद और उत्तम प्रतिफल प्राप्त हुआ।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. धैर्य (सब्र) और तवक्कुल (अल्लाह पर भरोसा) — ये दो ऐसे गुण हैं जो मुसलमान को हर मुसीबत में मज़बूत बनाते हैं। जब इंसान इन दोनों को अपना लेता है, तो उसे कोई भी कठिनाई विचलित नहीं कर सकती।
  2. अल्लाह पर सच्चा भरोसा ही इंसान को हर परिस्थिति में सुकून और संतोष प्रदान करता है। जो व्यक्ति अपने रब पर भरोसा करता है, उसे किसी और की मदद की आवश्यकता नहीं रहती।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि धार्मिक मामलों में कष्ट सहना और अल्लाह की राह में त्याग करना कोई बेकार नहीं जाता — अल्लाह ऐसे लोगों को बेहतरीन बदला देता है।
  4. सब्र और तवक्कुल का संगम ही वास्तविक ईमान की पहचान है। ये दोनों गुण इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में सफलता दिलाते हैं।
  5. यह आयत उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अल्लाह की राह में घर-बार छोड़ने या कष्ट उठाने पर मजबूर हों — उन्हें यकीन होना चाहिए कि अल्लाह उनके सब्र का अच्छा बदला देगा।
🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — अन-नहल

40إِنَّمَا قَوْلُنَا لِشَيْءٍ إِذَا أَرَدْنَاهُ أَن نَّقُولَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
हम जब किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करते हैं तो हमारा कहना उसके बारे में इतना ही होता है कि हम कह देते हैं कि 'हो जा' बस फौरन हो जाती है (तो फिर मुर्दों का जिलाना भी कोई बात है)
41وَالَّذِينَ هَاجَرُوا فِي اللَّهِ مِن بَعْدِ مَا ظُلِمُوا لَنُبَوِّئَنَّهُمْ فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً ۖ وَلَأَجْرُ الْآخِرَةِ أَكْبَرُ ۚ لَوْ كَانُوا يَعْلَمُونَ
और जिन लोगों ने (कुफ्फ़ार के ज़ुल्म पर ज़ुल्म सहने के बाद ख़ुदा की खुशी के लिए घर बार छोड़ा हिजरत की हम उनको ज़रुर दुनिया में भी अच्छी जगह बिठाएँगें और आख़िरत की जज़ा तो उससे कहीं बढ़ कर है काश ये लोग जिन्होंने ख़ुदा की राह में सख्तियों पर सब्र किया
42الَّذِينَ صَبَرُوا وَعَلَىٰ رَبِّهِمْ يَتَوَكَّلُونَ
और अपने परवरदिगार ही पर भरोसा रखते हैं (आख़िरत का सवाब) जानते होते
43وَمَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ إِلَّا رِجَالًا نُّوحِي إِلَيْهِمْ ۚ فَاسْأَلُوا أَهْلَ الذِّكْرِ إِن كُنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
और (ऐ रसूल) तुम से पहले आदमियों ही को पैग़म्बर बना बनाकर भेजा किए जिन की तरफ हम वहीं भेजते थे तो (तुम अहले मक्का से कहो कि) अगर तुम खुद नहीं जानते हो तो अहले ज़िक्र (आलिमों से) पूछो (और उन पैग़म्बरों को भेजा भी तो) रौशन दलीलों और किताबों के साथ
44بِالْبَيِّنَاتِ وَالزُّبُرِ ۗ وَأَنزَلْنَا إِلَيْكَ الذِّكْرَ لِتُبَيِّنَ لِلنَّاسِ مَا نُزِّلَ إِلَيْهِمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَفَكَّرُونَ
और तुम्हारे पास क़ुरान नाज़िल किया है ताकि जो एहकाम लोगों के लिए नाज़िल किए गए है तुम उनसे साफ साफ बयान कर दो ताकि वह लोग खुद से कुछ ग़ौर फिक्र करें
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अनुवाद — अन-नहल 42

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Tuesday, August 18, 2026

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