Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَتَوَارَىٰ: छिपना, किसी से छुपकर रहना।
- مِن سُوءِ مَا بُشِّرَ بِهِ: उस बुरी खबर के कारण जो उसे दी गई (अर्थात बेटी के जन्म की खबर)।
- أَيُمْسِكُهُ عَلَىٰ هُونٍ: क्या वह उसे अपमान और ज़िल्लत के साथ जीवित रखेगा?
- أَمْ يَدُسُّهُ فِي التُّرَابِ: या उसे मिट्टी में दबा देगा (ज़िंदा दफ़न कर देगा)?
- أَلَا سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ: सुन लो, कितना बुरा फ़ैसला है जो वे करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अरब के मशरिक़ीन (बुतपरस्तों) में से किसी को बेटी के जन्म की ख़ुशख़बरी दी जाती थी, तो वह शर्मिंदगी और ग़म के मारे अपने लोगों से छिपता फिरता था। उसे डर था कि कहीं लोग उसे देख न लें और उसका मज़ाक़ न उड़ाएँ। वह सोचता था कि आख़िर इस बच्ची के साथ क्या किया जाए — क्या उसे ज़िल्लत और अपमान के साथ जीवित रखा जाए, या उसे ज़िंदा मिट्टी में दफ़न कर दिया जाए? यह उस काल के लोगों की घिनौनी सोच थी कि बेटियाँ उनके लिए बोझ और शर्म की बात थीं।
अल्लाह तआला इस आयत में उनके इस बुरे रवैये की निंदा करते हुए फ़रमाते हैं: "सुन लो! कितना बुरा फ़ैसला है जो ये लोग करते हैं।" वे अपने लिए बेटों को पसंद करते थे, लेकिन अल्लाह के लिए बेटियाँ मानते थे — यानी वे अपने रब के लिए वह चीज़ क़रार देते थे जिसे वे ख़ुद अपने लिए बुरा समझते थे। यह उनका सबसे बड़ा अन्याय और अज्ञानता थी।
फ़ायदे (सबक):
- बेटियाँ अल्लाह की ओर से अनमोल उपहार हैं — इस्लाम ने बेटियों को सम्मान दिया है और उनके पालन-पोषण को जन्नत का ज़रिया बताया है। यह आयत हमें सिखाती है कि बेटियों पर खुश होना चाहिए, न कि शर्मिंदा होना।
- अल्लाह की बनाई हुई क़ुदरत पर राज़ी रहना चाहिए — इंसान को चाहिए कि अल्लाह के फ़ैसले पर संतुष्ट रहे। अल्लाह जो देता है, उसमें भलाई होती है, भले ही हमारी समझ में वह बुरा क्यों न लगे।
- जाहिलियत के रिवाजों से बचना — यह आयत उन बुरे रिवाजों की निंदा करती है जो इंसानियत के ख़िलाफ़ हैं। इस्लाम ने इन सबको मिटाकर इंसान को सम्मान दिया।
- अल्लाह की नज़र में सब इंसान बराबर हैं — चाहे बेटा हो या बेटी, अल्लाह के यहाँ दोनों की एक जैसी क़द्र है। इस्लाम ने बेटियों को जीने का हक़ दिया और उन्हें समाज में इज़्ज़त दी।
- अल्लाह की निंदा से बचना — जो लोग अल्लाह के लिए वह चीज़ मानते हैं जो वे ख़ुद अपने लिए पसंद नहीं करते, वे सबसे बड़ी नाइंसाफ़ी करते हैं। हमें अल्लाह के बारे में अच्छी सोच रखनी चाहिए और उसकी पाक ज़ात के लिए सिर्फ़ अच्छी बातें ही कहनी चाहिए।
📜 आयत 57-61 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 59
सूरा अन-नहल आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह ज़हर का सा घूँट पीकर रह जाता है…सूरा आयत 59/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
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Thursday, October 1, 2026
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