अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بُشِّرَ: खुशखबरी दी गई
- الْأُنثَىٰ: बेटी (लड़की)
- ظَلَّ: रहा, हो गया
- مُسْوَدًّا: काला पड़ गया
- كَظِيمٌ: गुस्से और दुःख से भरा हुआ, जो अपने गुस्से को दबाए हुए हो
तफ़सीर (व्याख्या):
जब इन मुशरिकों में से किसी को बेटी के जन्म की खुशखबरी दी जाती है, तो उसका चेहरा शर्मिंदगी, ग़म और नाराज़गी से काला पड़ जाता है। वह इस खबर को इतना बुरा समझता है कि उसका दिल ग़म और अफ़सोस से भर जाता है, और वह अपने गुस्से को दबाए हुए चुपचाप रहता है। यह स्थिति उसके लिए इतनी असहनीय होती है कि वह न तो कुछ बोल पाता है और न ही अपनी भावनाओं को प्रकट कर पाता है।
यह उनकी जाहिलियत और बुरी सोच का प्रमाण है कि वे बेटियों को अपमान की नज़र से देखते थे, जबकि अल्लाह ने उन्हें यह नेमत दी थी। अफ़सोस की बात यह है कि वे जिस चीज़ को अपने लिए बुरा समझते हैं, उसे अल्लाह की तरफ़ निस्बत करते हैं, यानी वे कहते हैं कि अल्लाह के लिए फ़रिश्ते (जिन्हें वे बेटियाँ मानते थे) हैं, और अपने लिए बेटों को पसंद करते हैं। यह उनकी नासमझी और अल्लाह के प्रति बेअदबी की सबसे बड़ी मिसाल है।
फ़ायदे (सीख):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि बेटियाँ अल्लाह की ओर से एक अनमोल नेमत और इनाम हैं। उन्हें बोझ या अपमान की नज़र से देखना जाहिलियत की निशानी है। इस्लाम ने बेटियों को सम्मान और इज़्ज़त दी है, और उनकी परवरिश को जन्नत का ज़रिया बताया है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अल्लाह की दी हुई हर नेमत पर राज़ी रहना चाहिए, चाहे वह उसकी पसंद के मुताबिक़ न हो। अल्लाह जो देता है, उसमें भलाई होती है, भले ही हमें समझ न आए।
- यहाँ से हमें यह भी सबक मिलता है कि इंसान को अपने गुस्से और नाराज़गी पर क़ाबू रखना चाहिए। मुशरिकों का हाल देखिए कि उन्होंने अल्लाह की नेमत पर नाराज़गी ज़ाहिर की, जबकि एक मोमिन को हर हाल में अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी रहना चाहिए।
- इस आयत से यह भी पता चलता है कि इस्लाम ने लड़कियों के साथ होने वाले किसी भी तरह के भेदभाव और ज़ुल्म को ख़त्म किया है। आज के दौर में भी जो लोग बेटियों के जन्म पर नाराज़ होते हैं या उनके साथ नाइंसाफ़ी करते हैं, वह इसी जाहिलियत की सोच के अनुयायी हैं। हमें चाहिए कि हम बेटियों को अल्लाह की रहमत समझें और उनके साथ प्यार और इंसाफ़ का व्यवहार करें।
📜 आयत 56-60 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 58
सूरा अन-नहल आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अपने लिए (बेटे) जो मरग़ूब (दिल पसन्द) हैं और…सूरा आयत 58/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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