अन-नहल · 60/128
अनुवाद उच्चारण — अन-नहल
لِلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ مَثَلُ السَّوْءِ ۖ وَلِلَّهِ الْمَثَلُ الْأَعْلَىٰ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٦٠
Lillazeena laa yu`minoona bil Aakhirati masalus saw`i wa lillaahil masalul a`laa; wa Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
बुरी (बुरी) बातें तो उन्हीं लोगों के लिए ज्यादा मुनासिब हैं जो आख़िरत का यक़ीन नहीं रखते और ख़ुदा की शान के लायक़ तो आला सिफते (बहुत बड़ी अच्छाइया) हैं और वही तो ग़ालिब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَثَلُ السَّوْءِ: बुरी विशेषता, निकृष्ट गुण।
  • الْمَثَلُ الْأَعْلَى: सर्वोच्च और उत्तम गुण।
  • الْعَزِيزُ: वह जो अपनी शक्ति में अजेय हो, जिसे कोई पराजित न कर सके।
  • الْحَكِيمُ: वह जो अपने सभी कार्यों में पूर्ण ज्ञान और दूरदर्शिता से काम करे।

तफ़सीर (व्याख्या):

जो लोग आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते, उनके लिए बुरी विशेषताएँ हैं—जैसे अज्ञानता, कमज़ोरी, आवश्यकता और कुफ़्र। वे अल्लाह के लिए बेटियाँ निर्धारित करते हैं, जो उनकी अपनी दृष्टि में अवमानना की बात है, और इस प्रकार वे अपने लिए निकृष्ट गुण साबित करते हैं। जबकि अल्लाह के लिए सर्वोच्च गुण हैं—पूर्णता, बेनियाज़ी (किसी की आवश्यकता न होना), एकत्व (तौहीद), और सभी सृष्टि से परे होना। वह अपने राज्य में अजेय (अज़ीज़) है, और अपनी सृष्टि, प्रबंधन और व्यवस्था में पूर्ण हिकमत (ज्ञान और युक्ति) वाला है। उसके लिए कोई संतान नहीं, न पुत्र और न पुत्री, क्योंकि संतान की आवश्यकता कमज़ोरी की निशानी है, और अल्लाह इन सब से पाक और उच्च है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के लिए किसी भी प्रकार की कमी या दोष को साबित करना सबसे बड़ा अन्याय है, और उसकी पवित्रता और पूर्णता पर ईमान रखना ही सच्चा ईमान है।
  2. अल्लाह की सर्वोच्च विशेषताओं पर चिंतन करने से इंसान का दिल उसकी महानता से भर जाता है और वह उसकी इबादत में झुक जाता है।
  3. आख़िरत पर ईमान इंसान के अंदर अच्छे कर्मों की प्रेरणा पैदा करता है, क्योंकि वह जानता है कि उसके हर अच्छे या बुरे काम का फल उसे मिलेगा।
  4. यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की शक्ति (अज़्ज़त) और हिकमत (ज्ञान) दोनों पूर्ण हैं, इसलिए उसके हर फैसले और हुक्म में भलाई है, चाहे हमारी समझ में वह कैसा भी हो।


📜 आयत 58-62 — अन-नहल

58وَإِذَا بُشِّرَ أَحَدُهُم بِالْأُنثَىٰ ظَلَّ وَجْهُهُ مُسْوَدًّا وَهُوَ كَظِيمٌ
और अपने लिए (बेटे) जो मरग़ूब (दिल पसन्द) हैं और जब उसमें से किसी एक को लड़की पैदा होने की जो खुशख़बरी दीजिए रंज के मारे मुँह काला हो जाता है
59يَتَوَارَىٰ مِنَ الْقَوْمِ مِن سُوءِ مَا بُشِّرَ بِهِ ۚ أَيُمْسِكُهُ عَلَىٰ هُونٍ أَمْ يَدُسُّهُ فِي التُّرَابِ ۗ أَلَا سَاءَ مَا يَحْكُمُونَ
और वह ज़हर का सा घूँट पीकर रह जाता है (बेटी की) जिसकी खुशखबरी दी गई है अपनी क़ौम के लोगों से छिपा फिरता है (और सोचता है) कि क्या इसको ज़िल्लत उठाके ज़िन्दा रहने दे या (ज़िन्दा ही) इसको ज़मीन में गाड़ दे-देखो तुम लोग किस क़दर बुरा एहकाम (हुक्म) लगाते हैं
60لِلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ مَثَلُ السَّوْءِ ۖ وَلِلَّهِ الْمَثَلُ الْأَعْلَىٰ ۚ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
बुरी (बुरी) बातें तो उन्हीं लोगों के लिए ज्यादा मुनासिब हैं जो आख़िरत का यक़ीन नहीं रखते और ख़ुदा की शान के लायक़ तो आला सिफते (बहुत बड़ी अच्छाइया) हैं और वही तो ग़ालिब है
61وَلَوْ يُؤَاخِذُ اللَّهُ النَّاسَ بِظُلْمِهِم مَّا تَرَكَ عَلَيْهَا مِن دَابَّةٍ وَلَٰكِن يُؤَخِّرُهُمْ إِلَىٰ أَجَلٍ مُّسَمًّى ۖ فَإِذَا جَاءَ أَجَلُهُمْ لَا يَسْتَأْخِرُونَ سَاعَةً ۖ وَلَا يَسْتَقْدِمُونَ
और अगर (कहीं) ख़ुदा अपने बन्दों की नाफरमानियों की गिरफ़त करता तो रुए ज़मीन पर किसी एक जानदार को बाक़ी न छोड़ता मगर वह तो एक मुक़र्रर वक्त तक उन सबको मोहलत देता है फिर जब उनका (वह) वक्त अा पहुँचेगा तो न एक घड़ी पीछे हट सकते हैं और न आगे बढ़ सकते हैं
62وَيَجْعَلُونَ لِلَّهِ مَا يَكْرَهُونَ وَتَصِفُ أَلْسِنَتُهُمُ الْكَذِبَ أَنَّ لَهُمُ الْحُسْنَىٰ ۖ لَا جَرَمَ أَنَّ لَهُمُ النَّارَ وَأَنَّهُم مُّفْرَطُونَ
और ये लोग खुद जिन बातों को पसन्द नहीं करते उनको ख़ुदा के वास्ते क़रार देते हैं और अपनी ही ज़बान से ये झूठे दावे भी करते हैं कि (आख़िरत में भी) उन्हीं के लिए भलाई है (भलाई तो नहीं मगर) हाँ उनके लिए जहन्नुम की आग ज़रुरी है और यही लोग सबसे पहले (उसमें) झोंके जाएँगें
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अनुवाद — अन-नहल 60

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Tuesday, August 18, 2026

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