Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَجْعَلُونَ لِلَّهِ مَا يَكْرَهُونَ: वे अल्लाह के लिए वह चीज़ ठहराते हैं जिसे वे स्वयं अपने लिए नापसंद करते हैं, जैसे बेटियाँ।
- وَتَصِفُ أَلْسِنَتُهُمُ الْكَذِبَ: उनकी ज़ुबानें झूठ बोलती हैं।
- الْحُسْنَى: अच्छा परिणाम या अच्छा दर्जा।
- لَا جَرَمَ: निस्संदेह, यक़ीनन, सच्चाई यह है।
- مُفْرَطُونَ: आगे बढ़ाए गए, (नरक में) छोड़ दिए गए, या भुला दिए गए।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन मुशरिकीन (बहुदेववादियों) के बुरे कृत्यों और उनकी मूर्खतापूर्ण सोच को उजागर करती है। वे अल्लाह के लिए वह चीज़ ठहराते हैं जिसे वे स्वयं अपने लिए पसंद नहीं करते — यानी बेटियाँ। जब उनमें से किसी को बेटी होने की ख़बर दी जाती थी तो उसका चेहरा काला पड़ जाता था, फिर भी वे कहते थे कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं। यह उनकी सबसे बड़ी नादानी और कुत्सित सोच थी।
इसके साथ ही, उनकी ज़ुबानें झूठ बोलती थीं कि उनके लिए अच्छा परिणाम है — यानी वे कहते थे कि यदि क़ियामत आएगी भी, तो हमें अच्छा दर्जा मिलेगा, या वे अपने लिए बेटों को "अच्छाई" कहते थे और अल्लाह के लिए बेटियों को ठहराते थे। यह उनका पूर्ण अज्ञान और अहंकार था।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: "निस्संदेह, उनके लिए आग (नरक) है और वे उसमें आगे बढ़ाए गए (छोड़ दिए गए) होंगे।" यानी उनका दावा झूठा है; सच्चाई यह है कि उनका अंजाम नरक है, और वे उसमें इस तरह छोड़ दिए जाएँगे कि वहाँ से कभी निकल नहीं पाएँगे — न भुलाए जाने की राहत मिलेगी, न मौत आएगी, और न ही किसी तरह की कोई राहत। वे उस यातना में हमेशा के लिए पड़े रहेंगे।
फ़ायदे (सीख):
- अल्लाह के लिए कोई ऐसी चीज़ ठहराना जो स्वयं इंसान अपने लिए पसंद नहीं करता, सबसे बड़ा अन्याय और अज्ञान है। यह शिर्क की जड़ है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि बेटियाँ अल्लाह की ओर से एक नेमत (वरदान) हैं, न कि कोई बुराई या शर्म की बात। इस्लाम ने बेटियों को सम्मान दिया और उनकी परवरिश को जन्नत का ज़रिया बताया।
- झूठे दावे और ख़ोखले अहंकार से इंसान अल्लाह की नज़र में कुछ नहीं बदल सकता। अंतिम फ़ैसला अल्लाह के पास है, और वही सच्चा इन्साफ़ करने वाला है।
- जो लोग अल्लाह के साथ साझीदार ठहराते हैं और उसकी नेमतों की नाशुक्री करते हैं, उनका अंजाम नरक है — यह अल्लाह का स्थायी नियम है, जो कभी नहीं बदलता।
- यह आयत मुसलमान को सच्चाई, विनम्रता और अल्लाह की तरफ़ पूर्ण समर्पण की शिक्षा देती है — कि हम अपनी सोच, अपनी ज़ुबान और अपने कृत्यों को अल्लाह की पसंद के अनुसार ढालें, न कि अपनी इच्छाओं के अनुसार।
📜 आयत 60-64 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 62
सूरा अन-नहल आयत 62 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग खुद जिन बातों को पसन्द नहीं करते…सूरा आयत 62/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 60–64. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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