Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَلُومًا (मलूमन): वह व्यक्ति जिसे स्वयं अपनी आत्मा और दूसरे लोग मलामत करें, अर्थात् धिक्कारें और उसे बुरा कहें।
- مَّدْحُورًا (मद्हूरन): हर भलाई से दूर किया हुआ, अपमानित और तिरस्कृत किया हुआ, जिसे रहमत से निकाल दिया गया हो।
तफसीर (व्याख्या):
यह वह सब कुछ है जो आपके रब ने आपको हिकमत (बुद्धि और समझ) के रूप में वह्य (प्रकाशना) के माध्यम से दिया है। इसमें वे सभी आदेश और निषेध शामिल हैं जो पिछली आयातों में बताए गए—अच्छे कर्मों का आदेश, बुरे स्वभाव और नीच कार्यों से रोकना, रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार, अनाथों और गरीबों का ख्याल रखना, वादा पूरा करना, नाप-तौल में पूरा देना, घमंड और अहंकार से बचना—ये सब हिकमत की बातें हैं जो अल्लाह की ओर से उतारी गई हैं।
फिर अल्लाह तआला सबसे महत्वपूर्ण बात पर ज़ोर देते हुए कहता है: "और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ"—यानी ऐ इंसान! अल्लाह के साथ किसी और को उसकी इबादत में शरीक मत करो, चाहे वह कोई मूर्ति हो, कोई व्यक्ति हो या कोई और चीज़। यदि तुमने ऐसा किया, तो तुम्हें जहन्नम की आग में डाल दिया जाएगा, जहाँ तुम अपनी ही आत्मा को मलामत करोगे कि मैंने यह क्यों किया, और लोग भी तुम्हें बुरा कहेंगे। तुम हर भलाई से दूर और अल्लाह की रहमत से निकाले गए होगे—अपमानित, तिरस्कृत और बेसहारा।
फ़ायदे (लाभ और सबक):
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इबादत में किसी को शरीक करना सबसे बड़ा ज़ुल्म और सबसे बड़ा नुक़सान है, जिसका अंजाम जहन्नम की आग है।
- तौहीद (एकेश्वरवाद) ही वह आधार है जिस पर पूरी हिकमत और अच्छे आचरण की इमारत खड़ी होती है। जब दिल अल्लाह से जुड़ता है, तो सारे अच्छे काम अपने आप आसान हो जाते हैं।
- यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम सिर्फ़ कुछ रस्मों का नाम नहीं, बल्कि एक पूरा जीवन-दर्शन है जो हर अच्छाई और हर भलाई को अपने में समेटे हुए है।
- अल्लाह की रहमत से दूर होना और उसकी नाराज़गी पाना—इससे बड़ी कोई असफलता नहीं हो सकती। इसलिए हमें हर उस चीज़ से बचना चाहिए जो हमें अल्लाह से दूर करे।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि सच्ची हिकमत (बुद्धिमत्ता) वही है जो अल्लाह की ओर से आए, और वही इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देती है।
📜 आयत 37-41 — सूरा अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 39
सूरा अल-इसरा आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये बात तो हिकमत की उन बातों में से जो…सूरा आयत 39/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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