अल-इसरा · 89/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
وَلَقَدْ صَرَّفْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ فَأَبَىٰ أَكْثَرُ النَّاسِ إِلَّا كُفُورًا ۝٨٩
Qa laqad sarrafnaa linnaasi fee haazal quraani min kulli masalin fa abaaa aksarun naasi illaa kufooraa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तो लोगों (के समझाने) के वास्ते इस क़ुरान में हर क़िस्म की मसलें अदल बदल के बयान कर दीं उस पर भी अक्सर लोग बग़ैर नाशुक्री किए नहीं रहते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَرَّفْنَا (सर्रफ़ना): हमने विभिन्न प्रकार से बयान किया, समझाया और तरह-तरह से प्रस्तुत किया।
  • مَثَل (मसल): उदाहरण, नसीहत, सबक और हिदायत की बातें।
  • فَأَبَى (फ़अबा): इनकार किया, मना किया, अस्वीकार किया।
  • كُفُورًا (कुफ़ूरन): सत्य का ज़बरदस्त इनकार, नाशुक्री, हठधर्मिता के साथ अस्वीकार।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बड़ी रहमत और करम का ज़िक्र किया है। उसने इस पवित्र क़ुरआन में इंसानों के लिए हर तरह की मिसालें, नसीहतें, किस्से, आदेश और निषेध इस तरह बयान किए हैं कि उनमें हर दिल के लिए सबक है, हर अक़्ल के लिए रौशनी है और हर ज़िंदगी के लिए राहनुमाई है। अल्लाह ने इन मिसालों को बार-बार, अलग-अलग अंदाज़ में बयान किया ताकि लोग समझें, सीखें और अपनी ज़िंदगी को सही रास्ते पर लाएँ।

मगर अफ़सोस! अधिकतर लोगों ने इन सबके बावजूद सत्य को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने न केवल इनकार किया, बल्कि हठधर्मिता और ज़िद के साथ सत्य का विरोध किया। वे अल्लाह की आयतों को सुनकर भी उनसे मुँह मोड़ते रहे और अपनी ज़िद पर अड़े रहे। यह उनकी नाशुक्री और सत्य के प्रति उनकी सख्त दुश्मनी थी।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने हिदायत का हर ज़रिया मुकम्मल कर दिया है। उसने क़ुरआन को इंसानों के लिए रहमत और हिदायत बनाकर भेजा है। अब जो इसे अपनाएगा वह कामयाब होगा, और जो इसे ठुकराएगा वह नुक़सान में रहेगा। यह हमारे लिए एक बड़ी नेमत है कि हमारे पास अल्लाह की किताब मौजूद है, जो हर ज़माने और हर हालत के लिए रहनुमाई करती है।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम क़ुरआन के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। क्या हम इसे सिर्फ़ पढ़ने के लिए रखते हैं या इसे समझकर अपनी ज़िंदगी में लागू करते हैं? अल्लाह ने इस किताब में हर समस्या का हल रखा है। आइए हम उन अधिकतर लोगों में से न बनें जिन्होंने इसे ठुकराया, बल्कि उन क़मयाब लोगों में से बनें जिन्होंने इसे अपनाया और अपनी ज़िंदगी को सँवारा। क़ुरआन को पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना ही हमारी सच्ची कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 87-91 — अल-इसरा

87إِلَّا رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّ فَضْلَهُ كَانَ عَلَيْكَ كَبِيرًا
मगर ये सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की रहमत है (कि उसने ऐसा किया) इसमें शक़ नहीं कि उसका तुम पर बड़ा फज़ल व करम है
88قُل لَّئِنِ اجْتَمَعَتِ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَىٰ أَن يَأْتُوا بِمِثْلِ هَٰذَا الْقُرْآنِ لَا يَأْتُونَ بِمِثْلِهِ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ ظَهِيرًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अगर सारे दुनिया जहाँन के) आदमी और जिन इस बात पर इकट्ठे हो कि उस क़ुरान का मिसल ले आएँ तो (ना मुमकिन) उसके बराबर नहीं ला सकते अगरचे (उसको कोशिश में) एक का एक मददगार भी बने
89وَلَقَدْ صَرَّفْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ فَأَبَىٰ أَكْثَرُ النَّاسِ إِلَّا كُفُورًا
और हमने तो लोगों (के समझाने) के वास्ते इस क़ुरान में हर क़िस्म की मसलें अदल बदल के बयान कर दीं उस पर भी अक्सर लोग बग़ैर नाशुक्री किए नहीं रहते
90وَقَالُوا لَن نُّؤْمِنَ لَكَ حَتَّىٰ تَفْجُرَ لَنَا مِنَ الْأَرْضِ يَنبُوعًا
(ऐ रसूल कुफ्फार मक्के ने) तुमसे कहा कि जब तक तुम हमारे वास्ते ज़मीन से चश्मा (न) बहा निकालोगे हम तो तुम पर हरगिज़ ईमान न लाएँगें
91أَوْ تَكُونَ لَكَ جَنَّةٌ مِّن نَّخِيلٍ وَعِنَبٍ فَتُفَجِّرَ الْأَنْهَارَ خِلَالَهَا تَفْجِيرًا
या (ये नहीं तो) खजूरों और अंगूरों का तुम्हारा कोई बाग़ हो उसमें तुम बीच बीच में नहरे जारी करके दिखा दो
अल-इसराकुरान सूची
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अनुवाद — अल-इसरा 89

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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