अल-इसरा · 90/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
وَقَالُوا لَن نُّؤْمِنَ لَكَ حَتَّىٰ تَفْجُرَ لَنَا مِنَ الْأَرْضِ يَنبُوعًا ۝٩٠
Wa qaaloo lan nu`mina laka hattaa tafjura lanaa minal ardi yamboo`aa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल कुफ्फार मक्के ने) तुमसे कहा कि जब तक तुम हमारे वास्ते ज़मीन से चश्मा (न) बहा निकालोगे हम तो तुम पर हरगिज़ ईमान न लाएँगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَفْجُرَ: तुम फोड़कर निकालो, बहा दो।
  • يَنْبُوعًا: बहता हुआ चश्मा, जल का स्रोत।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब क़ुरआन के अलौकिक और अद्भुत प्रमाण ने मक्का के मुशरिकीन को निरुत्तर कर दिया और वे उसका मुक़ाबला करने में असमर्थ हो गए, तो उन्होंने हठधर्मिता और ज़िद की राह अपनाई। उन्होंने अपनी मनमानी इच्छाओं के अनुसार अलग-अलग चमत्कारों की माँगें करनी शुरू कर दीं। उन्होंने कहा: "ऐ मुहम्मद! हम आप पर कभी ईमान नहीं लाएँगे और न ही आपकी बात मानेंगे, जब तक कि आप हमारे लिए मक्का की धरती से एक ऐसा चश्मा नहीं फोड़ लाते जो लगातार बहता रहे और कभी सूखे नहीं।"

यह उनकी ओर से एक हठधर्मितापूर्ण माँग थी, जो उन्होंने सच्चाई को स्वीकार करने से बचने के लिए रखी थी। वे जानते थे कि रसूलुल्लाह ﷺ सच्चे नबी हैं, लेकिन उनका घमंड और अहंकार उन्हें ईमान लाने से रोक रहा था। अल्लाह तआला ने यह बात क़ुरआन में बयान की ताकि उनकी यह ज़िद और हठधर्मिता इतिहास के पन्नों में अमर हो जाए और आने वाली उम्मतों के लिए सबक बने।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इंसान जब सच्चाई के सामने हार मानने से इनकार करता है, तो वह बहाने बनाना शुरू कर देता है। लेकिन अल्लाह के रसूल ﷺ की सच्चाई के लिए यह काफी था कि वह कुरआन जैसा अद्भुत और चिरस्थायी चमत्कार लेकर आए, जो आज भी अपनी चुनौती पेश करता है। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को हठ और ज़िद से पाक करें और सच्चाई के सामने झुक जाएँ। अल्लाह तआला ने हमें अक्ल और समझ दी है ताकि हम उसकी निशानियों पर ग़ौर करें और ईमान लाएँ। याद रखिए, ईमान की मिठास उसी को मिलती है जो अपने अहंकार को छोड़कर अल्लाह के सामने सर झुका देता है। आइए, हम अपने नबी ﷺ की सुन्नत पर चलें और उनके लाए हुए पैग़ाम को दिल से क़बूल करें, क्योंकि यही हमारी दुनिया और आख़िरत की कामयाबी है।



📜 आयत 88-92 — अल-इसरा

88قُل لَّئِنِ اجْتَمَعَتِ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَىٰ أَن يَأْتُوا بِمِثْلِ هَٰذَا الْقُرْآنِ لَا يَأْتُونَ بِمِثْلِهِ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ ظَهِيرًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अगर सारे दुनिया जहाँन के) आदमी और जिन इस बात पर इकट्ठे हो कि उस क़ुरान का मिसल ले आएँ तो (ना मुमकिन) उसके बराबर नहीं ला सकते अगरचे (उसको कोशिश में) एक का एक मददगार भी बने
89وَلَقَدْ صَرَّفْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ فَأَبَىٰ أَكْثَرُ النَّاسِ إِلَّا كُفُورًا
और हमने तो लोगों (के समझाने) के वास्ते इस क़ुरान में हर क़िस्म की मसलें अदल बदल के बयान कर दीं उस पर भी अक्सर लोग बग़ैर नाशुक्री किए नहीं रहते
90وَقَالُوا لَن نُّؤْمِنَ لَكَ حَتَّىٰ تَفْجُرَ لَنَا مِنَ الْأَرْضِ يَنبُوعًا
(ऐ रसूल कुफ्फार मक्के ने) तुमसे कहा कि जब तक तुम हमारे वास्ते ज़मीन से चश्मा (न) बहा निकालोगे हम तो तुम पर हरगिज़ ईमान न लाएँगें
91أَوْ تَكُونَ لَكَ جَنَّةٌ مِّن نَّخِيلٍ وَعِنَبٍ فَتُفَجِّرَ الْأَنْهَارَ خِلَالَهَا تَفْجِيرًا
या (ये नहीं तो) खजूरों और अंगूरों का तुम्हारा कोई बाग़ हो उसमें तुम बीच बीच में नहरे जारी करके दिखा दो
92أَوْ تُسْقِطَ السَّمَاءَ كَمَا زَعَمْتَ عَلَيْنَا كِسَفًا أَوْ تَأْتِيَ بِاللَّهِ وَالْمَلَائِكَةِ قَبِيلًا
या जैसा तुम गुमान रखते थे हम पर आसमान ही को टुकड़े (टुकड़े) करके गिराओ या ख़ुदा और फरिश्तों को (अपने क़ौल की तस्दीक़) में हमारे सामने (गवाही में ला खड़ा कर दिया
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अनुवाद — अल-इसरा 90

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Tuesday, August 18, 2026

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