अल-इसरा · 88/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
قُل لَّئِنِ اجْتَمَعَتِ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَىٰ أَن يَأْتُوا بِمِثْلِ هَٰذَا الْقُرْآنِ لَا يَأْتُونَ بِمِثْلِهِ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ ظَهِيرًا ۝٨٨
Qul la`inij tama`atil insu waljinnu `alaaa any yaatoo bimisli haazal quraani laa yaatoona bimislihee wa law kaana ba`duhum liba `din zaheeraa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अगर सारे दुनिया जहाँन के) आदमी और जिन इस बात पर इकट्ठे हो कि उस क़ुरान का मिसल ले आएँ तो (ना मुमकिन) उसके बराबर नहीं ला सकते अगरचे (उसको कोशिश में) एक का एक मददगार भी बने
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَئِنِ اجْتَمَعَتِ: अगर इकट्ठे हो जाएँ
  • الْإِنسُ وَالْجِنُّ: इंसान और जिन्नात
  • بِمِثْلِ هَذَا الْقُرْآنِ: इस क़ुरआन जैसी कोई चीज़ लाने पर
  • لَا يَأْتُونَ بِمِثْلِهِ: वे इसके समान नहीं ला सकते
  • ظَهِيرًا: मददगार, सहायक

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप कह दीजिए कि अगर सारे इंसान और सारे जिन्नात — यानी पूरी मख़लूक़ात — इकट्ठे हो जाएँ और वे इस बात पर ज़ोर डाल दें कि वे इस क़ुरआन जैसी कोई किताब या कलाम लाकर दिखाएँ, तो वे हरगिज़ ऐसा नहीं कर सकते। चाहे वे एक-दूसरे के मददगार बन जाएँ, एक-दूसरे का हाथ थाम लें, और अपनी सारी ताक़त, इल्म, हुनर और साज़िशें एक कर दें, फिर भी वे इस क़ुरआन जैसा कुछ नहीं ला सकते।

यह क़ुरआन अल्लाह का कलाम है, और अल्लाह का कलाम उसकी मख़लूक़ात के कलाम से बिल्कुल अलग है। इसकी फ़साहत (स्पष्टता), बलाग़त (प्रभावशीलता), और इसका अंदाज़-ए-बयान ऐसा है कि पूरी दुनिया की अक़्लें उसके सामने झुक जाती हैं। इसकी आयतें दिलों को रौशनी देती हैं, दिमाग़ों को सच्चाई की तरफ़ मोड़ती हैं, और ज़िंदगी के हर पहलू के लिए ऐसा निज़ाम पेश करती हैं जो किसी इंसानी दिमाग़ की उपज नहीं हो सकता।

यह चुनौती सिर्फ़ ज़बानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा सबूत है जो क़यामत तक क़ायम रहेगा। अगर किसी को शक है, तो वह कोशिश करके देख ले — लेकिन इतिहास गवाह है कि अरब के बड़े-बड़े शायर, ख़तीब और अदीब, जो अपनी ज़बान के उस्ताद माने जाते थे, वे भी इसके सामने हार मान चुके हैं। यही इस किताब का सबसे बड़ा चमत्कार है कि यह ख़ुद अपनी सच्चाई का सबूत है।

और ऐ इंसान! जब यह क़ुरआन अल्लाह की तरफ़ से है, तो इसे अपनी ज़िंदगी का रहनुमा बना। इसमें तेरी भलाई है, तेरी दुनिया और तेरी आख़िरत की कामयाबी है। यह वह रास्ता है जो तुझे अल्लाह की मुहब्बत तक पहुँचाता है, और जो इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं होता।

🎧 सुनें

📜 आयत 86-90 — अल-इसरा

86وَلَئِن شِئْنَا لَنَذْهَبَنَّ بِالَّذِي أَوْحَيْنَا إِلَيْكَ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ بِهِ عَلَيْنَا وَكِيلًا
(इसकी हक़ीकत नहीं समझ सकते) और (ऐ रसूल) अगर हम चाहे तो जो (क़ुरान) हमने तुम्हारे पास 'वही' के ज़रिए भेजा है (दुनिया से) उठा ले जाएँ फिर तुम अपने वास्ते हमारे मुक़ाबले में कोई मददगार न पाओगे
87إِلَّا رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّ فَضْلَهُ كَانَ عَلَيْكَ كَبِيرًا
मगर ये सिर्फ तुम्हारे परवरदिगार की रहमत है (कि उसने ऐसा किया) इसमें शक़ नहीं कि उसका तुम पर बड़ा फज़ल व करम है
88قُل لَّئِنِ اجْتَمَعَتِ الْإِنسُ وَالْجِنُّ عَلَىٰ أَن يَأْتُوا بِمِثْلِ هَٰذَا الْقُرْآنِ لَا يَأْتُونَ بِمِثْلِهِ وَلَوْ كَانَ بَعْضُهُمْ لِبَعْضٍ ظَهِيرًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अगर सारे दुनिया जहाँन के) आदमी और जिन इस बात पर इकट्ठे हो कि उस क़ुरान का मिसल ले आएँ तो (ना मुमकिन) उसके बराबर नहीं ला सकते अगरचे (उसको कोशिश में) एक का एक मददगार भी बने
89وَلَقَدْ صَرَّفْنَا لِلنَّاسِ فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ مِن كُلِّ مَثَلٍ فَأَبَىٰ أَكْثَرُ النَّاسِ إِلَّا كُفُورًا
और हमने तो लोगों (के समझाने) के वास्ते इस क़ुरान में हर क़िस्म की मसलें अदल बदल के बयान कर दीं उस पर भी अक्सर लोग बग़ैर नाशुक्री किए नहीं रहते
90وَقَالُوا لَن نُّؤْمِنَ لَكَ حَتَّىٰ تَفْجُرَ لَنَا مِنَ الْأَرْضِ يَنبُوعًا
(ऐ रसूल कुफ्फार मक्के ने) तुमसे कहा कि जब तक तुम हमारे वास्ते ज़मीन से चश्मा (न) बहा निकालोगे हम तो तुम पर हरगिज़ ईमान न लाएँगें
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
88आयत

अनुवाद — अल-इसरा 88

सूरा अल-इसरा आयत 88 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि (अगर सारे दुनिया जहाँन…

सूरा आयत 88/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 86–90. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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