अल-इसरा · 96/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ بِعِبَادِهِ خَبِيرًا بَصِيرًا ۝٩٦
Qul kafaa billaahi shaheedam bainee wa bainakum; innahoo kaana bi`ibaadihee Khabeeram Baseeraa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हमारे तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते बस ख़ुदा काफी है इसमें शक़ नहीं कि वह अपने बन्दों के हाल से खूब वाक़िफ और देखता रहता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَهِيدًا: गवाह, साक्षी
  • خَبِيرًا: हर चीज़ की पूरी खबर रखने वाला, जानने वाला
  • بَصِيرًا: सब कुछ देखने वाला, दृष्टा

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इनकार करने वालों से कह दीजिए कि मेरे और तुम्हारे बीच गवाही के लिए अल्लाह ही काफी है। वह इस बात का गवाह है कि मैं सच्चा हूँ और वाकई उसका भेजा हुआ रसूल हूँ। मैंने तुम्हें वह सब पहुँचा दिया है जो मुझे पहुँचाने का आदेश दिया गया था। अल्लाह तआला ही मेरी सच्चाई और तुम्हारे झुठलाने का गवाह है।

याद रखो कि अल्लाह अपने बंदों के हाल से पूरी तरह ख़बर रखने वाला है। उसकी नज़र से कोई चीज़ छिपी नहीं है। वह हर बंदे के दिल के राज़, उसकी नीयत और उसके अंदर की हर बात को जानता है। वह देखता है कि कौन हक़ पर है और कौन बातिल पर। वह हर इंसान के अमल को देख रहा है और उसका पूरा-पूरा हिसाब लेगा।

इस आयत में नबी करीम ﷺ के लिए बड़ी तसल्ली है कि जब आपके सामने लोग झूठे इल्ज़ाम लगाते हैं और आपकी बात नहीं मानते, तो आप परेशान न हों। अल्लाह ही काफी है, वह सब कुछ देख और जान रहा है। और इनकार करने वालों के लिए यह बड़ी धमकी है कि उनकी हर हरकत अल्लाह की नज़र में है, और वह उन्हें उनके कर्मों का बदला ज़रूर देगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब हमारे साथ कोई नाइंसाफी हो या लोग हमारी सच्चाई न मानें, तो हमें अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। अल्लाह ही सबसे बड़ा गवाह और न्याय करने वाला है। वह कभी किसी के हक़ को ज़ाया नहीं करता। हमें अपने अमल में सच्चाई और ईमानदारी अपनानी चाहिए, क्योंकि अल्लाह हर चीज़ को देख रहा है और हर नीयत को जानता है। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है — कि हम अल्लाह की नज़र में अपने आप को सच्चा और नेक बनाएँ, चाहे लोग हमें कुछ भी समझें।



📜 आयत 94-98 — अल-इसरा

94وَمَا مَنَعَ النَّاسَ أَن يُؤْمِنُوا إِذْ جَاءَهُمُ الْهُدَىٰ إِلَّا أَن قَالُوا أَبَعَثَ اللَّهُ بَشَرًا رَّسُولًا
(जो ये बेहूदा बातें करते हो) और जब लोगों के पास हिदायत आ चुकी तो उनको ईमान लाने से इसके सिवा किसी चीज़ ने न रोका कि वह कहने लगे कि क्या ख़ुदा ने आदमी को रसूल बनाकर भेजा है
95قُل لَّوْ كَانَ فِي الْأَرْضِ مَلَائِكَةٌ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ مَلَكًا رَّسُولًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ज़मीन पर फ़रिश्ते (बसे हुये) होते कि इत्मेनान से चलते फिरते तो हम उन लोगों के पास फ़रिश्ते ही को रसूल बनाकर नाज़िल करते
96قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ بِعِبَادِهِ خَبِيرًا بَصِيرًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हमारे तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते बस ख़ुदा काफी है इसमें शक़ नहीं कि वह अपने बन्दों के हाल से खूब वाक़िफ और देखता रहता है
97وَمَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِ ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَلَن تَجِدَ لَهُمْ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِهِ ۖ وَنَحْشُرُهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ عُمْيًا وَبُكْمًا وَصُمًّا ۖ مَّأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ كُلَّمَا خَبَتْ زِدْنَاهُمْ سَعِيرًا
और ख़ुदा जिसकी हिदायत करे वही हिदायत याफता है और जिसको गुमराही में छोड़ दे तो (याद रखो कि) फिर उसके सिवा किसी को उसका सरपरस्त न पाआगे और क़यामत के दिन हम उन लोगों का मुँह के बल औंधे और गूँगें और बहरे क़ब्रों से उठाएँगें उनका ठिकाना जहन्नुम है कि जब कभी बुझने को होगी तो हम उन लोगों पर (उसे) और भड़का देंगे
98ذَٰلِكَ جَزَاؤُهُم بِأَنَّهُمْ كَفَرُوا بِآيَاتِنَا وَقَالُوا أَإِذَا كُنَّا عِظَامًا وَرُفَاتًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ خَلْقًا جَدِيدًا
ये सज़ा उनकी इस वज़ह से है कि उन लोगों ने हमारी आयतों से इन्कार किया और कहने लगे कि जब हम (मरने के बाद सड़ गल) कर हड्डियाँ और रेज़ा रेज़ा हो जाएँगीं तो क्या फिर हम नये सिरे से पैदा करके उठाए जाएँगें
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अनुवाद — अल-इसरा 96

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Tuesday, August 18, 2026

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