अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ: चैन और सुकून के साथ चलते हों, धरती पर बसे हों और उसमें निवास करते हों।
- لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ مَلَكًا رَّسُولًا: तो हम उनके पास आसमान से एक फ़रिश्ते को रसूल बनाकर भेजते।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप उन मुशरिकों को जवाब दें जो यह अजीब बात समझते हैं कि अल्लाह ने इंसानों में से एक को रसूल बनाकर क्यों भेजा। उनका कहना था कि "यह रसूल फ़रिश्ता क्यों नहीं है?" तो अल्लाह तआला फ़रमाता है: ऐ रसूल! आप उनसे कह दीजिए कि अगर धरती पर फ़रिश्ते बसते और वहाँ चैन और इत्मिनान के साथ चलते-फिरते, जैसे तुम इंसान चलते हो, तो हम उन फ़रिश्तों के पास आसमान से एक फ़रिश्ते को ही रसूल बनाकर भेजते। क्योंकि अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) यही है कि हर क़ौम के पास उसी क़ौम में से रसूल भेजा जाता है, ताकि वह उनसे बात कर सके, वे उसे समझ सकें, और उसकी बात उनके दिलों में उतर सके। फ़रिश्ते इंसानों की तरह नहीं होते, न वे इंसानों के साथ उस तरह घुल-मिल सकते हैं, न उनकी ज़बान और मामूलात इंसानों से मिलते हैं। इसलिए इंसानों के पास इंसान ही रसूल बनकर आया, और यही अल्लाह की हिकमत और रहमत है।
यह बात हमारे लिए बहुत बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने हमारे बीच से ही एक इंसान को चुना, जो हमारी तरह खाता-पीता है, चलता-फिरता है, हमारी तकलीफ़ों को समझता है, और हमें राह दिखाता है। अगर रसूल फ़रिश्ता होता, तो हम उससे सीधे बात न कर पाते, न उसकी ज़िंदगी से सीख पाते। यह अल्लाह की महान रहमत है कि उसने हमारे लिए हमारी ही जिंस (जाति) का रसूल भेजा, ताकि हम उसकी सीरत (जीवन) को देखकर उस पर अमल कर सकें और क़यामत के दिन उसकी गवाही हमारे हक़ में हो। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने नबी ﷺ की मुहब्बत को दिल में बसाएँ, उनकी सुन्नत पर चलें, और उनके लाए हुए दीन को पूरी दुनिया तक पहुँचाएँ। यही हमारी कामयाबी है, और यही अल्लाह की रहमत का तक़ाज़ा है।
📜 आयत 93-97 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 95
सूरा अल-इसरा आयत 95 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ज़मीन पर फ़रिश्ते…सूरा आयत 95/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 93–97. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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