अल-इसरा · 95/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
قُل لَّوْ كَانَ فِي الْأَرْضِ مَلَائِكَةٌ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ مَلَكًا رَّسُولًا ۝٩٥
Qul law kaana fil ardi malaaa `ikatuny yamshoona mutma`inneena lanazzalnaa `alaihim minas samaaa`i malakar Rasoolaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ज़मीन पर फ़रिश्ते (बसे हुये) होते कि इत्मेनान से चलते फिरते तो हम उन लोगों के पास फ़रिश्ते ही को रसूल बनाकर नाज़िल करते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ: चैन और सुकून के साथ चलते हों, धरती पर बसे हों और उसमें निवास करते हों।
  • لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ مَلَكًا رَّسُولًا: तो हम उनके पास आसमान से एक फ़रिश्ते को रसूल बनाकर भेजते।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उन मुशरिकों को जवाब दें जो यह अजीब बात समझते हैं कि अल्लाह ने इंसानों में से एक को रसूल बनाकर क्यों भेजा। उनका कहना था कि "यह रसूल फ़रिश्ता क्यों नहीं है?" तो अल्लाह तआला फ़रमाता है: ऐ रसूल! आप उनसे कह दीजिए कि अगर धरती पर फ़रिश्ते बसते और वहाँ चैन और इत्मिनान के साथ चलते-फिरते, जैसे तुम इंसान चलते हो, तो हम उन फ़रिश्तों के पास आसमान से एक फ़रिश्ते को ही रसूल बनाकर भेजते। क्योंकि अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) यही है कि हर क़ौम के पास उसी क़ौम में से रसूल भेजा जाता है, ताकि वह उनसे बात कर सके, वे उसे समझ सकें, और उसकी बात उनके दिलों में उतर सके। फ़रिश्ते इंसानों की तरह नहीं होते, न वे इंसानों के साथ उस तरह घुल-मिल सकते हैं, न उनकी ज़बान और मामूलात इंसानों से मिलते हैं। इसलिए इंसानों के पास इंसान ही रसूल बनकर आया, और यही अल्लाह की हिकमत और रहमत है।

यह बात हमारे लिए बहुत बड़ी नेमत है कि अल्लाह ने हमारे बीच से ही एक इंसान को चुना, जो हमारी तरह खाता-पीता है, चलता-फिरता है, हमारी तकलीफ़ों को समझता है, और हमें राह दिखाता है। अगर रसूल फ़रिश्ता होता, तो हम उससे सीधे बात न कर पाते, न उसकी ज़िंदगी से सीख पाते। यह अल्लाह की महान रहमत है कि उसने हमारे लिए हमारी ही जिंस (जाति) का रसूल भेजा, ताकि हम उसकी सीरत (जीवन) को देखकर उस पर अमल कर सकें और क़यामत के दिन उसकी गवाही हमारे हक़ में हो। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने नबी ﷺ की मुहब्बत को दिल में बसाएँ, उनकी सुन्नत पर चलें, और उनके लाए हुए दीन को पूरी दुनिया तक पहुँचाएँ। यही हमारी कामयाबी है, और यही अल्लाह की रहमत का तक़ाज़ा है।



📜 आयत 93-97 — सूरा अल-इसरा

93أَوْ يَكُونَ لَكَ بَيْتٌ مِّن زُخْرُفٍ أَوْ تَرْقَىٰ فِي السَّمَاءِ وَلَن نُّؤْمِنَ لِرُقِيِّكَ حَتَّىٰ تُنَزِّلَ عَلَيْنَا كِتَابًا نَّقْرَؤُهُ ۗ قُلْ سُبْحَانَ رَبِّي هَلْ كُنتُ إِلَّا بَشَرًا رَّسُولًا
और जब तक तुम हम पर ख़ुदा के यहाँ से एक किताब न नाज़िल करोगे कि हम उसे खुद पढ़ भी लें उस वक्त तक हम तुम्हारे (आसमान पर चढ़ने के भी) क़ायल न होगें (ऐ रसूल) तुम कह दो कि सुबहान अल्लाह मै एक आदमी (ख़ुदा के) रसूल के सिवा आख़िर और क्या हूँ
94وَمَا مَنَعَ النَّاسَ أَن يُؤْمِنُوا إِذْ جَاءَهُمُ الْهُدَىٰ إِلَّا أَن قَالُوا أَبَعَثَ اللَّهُ بَشَرًا رَّسُولًا
(जो ये बेहूदा बातें करते हो) और जब लोगों के पास हिदायत आ चुकी तो उनको ईमान लाने से इसके सिवा किसी चीज़ ने न रोका कि वह कहने लगे कि क्या ख़ुदा ने आदमी को रसूल बनाकर भेजा है
95قُل لَّوْ كَانَ فِي الْأَرْضِ مَلَائِكَةٌ يَمْشُونَ مُطْمَئِنِّينَ لَنَزَّلْنَا عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ مَلَكًا رَّسُولًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि अगर ज़मीन पर फ़रिश्ते (बसे हुये) होते कि इत्मेनान से चलते फिरते तो हम उन लोगों के पास फ़रिश्ते ही को रसूल बनाकर नाज़िल करते
96قُلْ كَفَىٰ بِاللَّهِ شَهِيدًا بَيْنِي وَبَيْنَكُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ بِعِبَادِهِ خَبِيرًا بَصِيرًا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हमारे तुम्हारे दरमियान गवाही के वास्ते बस ख़ुदा काफी है इसमें शक़ नहीं कि वह अपने बन्दों के हाल से खूब वाक़िफ और देखता रहता है
97وَمَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِ ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَلَن تَجِدَ لَهُمْ أَوْلِيَاءَ مِن دُونِهِ ۖ وَنَحْشُرُهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَلَىٰ وُجُوهِهِمْ عُمْيًا وَبُكْمًا وَصُمًّا ۖ مَّأْوَاهُمْ جَهَنَّمُ ۖ كُلَّمَا خَبَتْ زِدْنَاهُمْ سَعِيرًا
और ख़ुदा जिसकी हिदायत करे वही हिदायत याफता है और जिसको गुमराही में छोड़ दे तो (याद रखो कि) फिर उसके सिवा किसी को उसका सरपरस्त न पाआगे और क़यामत के दिन हम उन लोगों का मुँह के बल औंधे और गूँगें और बहरे क़ब्रों से उठाएँगें उनका ठिकाना जहन्नुम है कि जब कभी बुझने को होगी तो हम उन लोगों पर (उसे) और भड़का देंगे
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
95आयत

अनुवाद — अल-इसरा 95

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सूरा आयत 95/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 93–97. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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