अल-कहफ · 54/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ لِلنَّاسِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَكَانَ الْإِنسَانُ أَكْثَرَ شَيْءٍ جَدَلًا ۝٥٤
Wa laqad sarrafnaa fee haazal quraani linnaasi mn kulli masal; wa kaanal insaanu aksara shai`in jadalaa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तो इस क़ुरान में लोगों (के समझाने) के वास्ते हर तरह की मिसालें फेर बदल कर बयान कर दी है मगर इन्सान तो तमाम मख़लूक़ात से ज्यादा झगड़ालू है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ (معاني الكلمات):

  • صَرَّفْنَا: हमने विभिन्न प्रकार से प्रस्तुत किया, अनेक रूपों में बयान किया।
  • مَثَل: उदाहरण, नसीहत, सबक।
  • جَدَلًا: झगड़ा, विवाद, तर्क-वितर्क, हठधर्मिता।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस पवित्र कुरआन में लोगों के लिए हर प्रकार के उदाहरण प्रस्तुत किए हैं—कभी सच्चाई को स्पष्ट करने के लिए, कभी चेतावनी देने के लिए, कभी प्रोत्साहित करने के लिए, और कभी सीधा मार्ग दिखाने के लिए। इन उदाहरणों का उद्देश्य यह है कि लोग सोचें, समझें, सीखें और अपने जीवन को सुधारें। अल्लाह ने कुरआन में हर उस विषय को छुआ है जिसकी मनुष्य को आवश्यकता है—ईमान, अच्छे कर्म, अंतिम दिन, अल्लाह की रहमत, उसकी पकड़, संसार की क्षणभंगुरता, और आख़िरत की स्थायी सफलता।

लेकिन अफसोस की बात यह है कि मनुष्य अपनी स्वभावगत कमजोरी के कारण सत्य को स्वीकार करने के बजाय झगड़ने और तर्क-वितर्क करने में अधिक समय बिताता है। वह हर बात पर सवाल उठाता है, हर सच्चाई को चुनौती देता है, और अक्सर बिना ज्ञान के ही विवाद में पड़ जाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों का हाल है जो अल्लाह की आयतों को नकारते हैं—वे सच्चाई को मानने के बजाय उसे गलत ठहराने की कोशिश में लगे रहते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि कुरआन एक ऐसा ग्रंथ है जो हर युग और हर समाज के लिए मार्गदर्शन लेकर आया है। इसमें कोई कमी नहीं, कोई त्रुटि नहीं। जो व्यक्ति इसे खुले दिल से पढ़ेगा, वह इसमें अपने लिए हर समस्या का समाधान पाएगा। लेकिन जो व्यक्ति हठधर्मिता और झगड़े की नीयत से इसे पढ़ेगा, वह कभी सत्य तक नहीं पहुँच पाएगा।

दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह ने अपनी रहमत से हमारे लिए कुरआन जैसा अमूल्य खज़ाना भेजा है। इसमें हर वह चीज़ मौजूद है जो हमें दुनिया और आख़िरत में सफल बना सकती है। क्या हमें इस पर अमल नहीं करना चाहिए? क्या हमें इसे पढ़कर सीखना नहीं चाहिए? झगड़ा और विवाद हमें केवल दूर ले जाता है, जबकि कुरआन हमें निकट लाता है—अल्लाह के करीब, सच्चाई के करीब, और सच्ची सफलता के करीब।

आइए, हम अपने जीवन में कुरआन को अपना मार्गदर्शक बनाएं, उसकी शिक्षाओं पर अमल करें, और झगड़े-विवाद से बचकर अल्लाह की रहमत और मार्गदर्शन को अपनाएं। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।



📜 आयत 52-56 — अल-कहफ

52وَيَوْمَ يَقُولُ نَادُوا شُرَكَائِيَ الَّذِينَ زَعَمْتُمْ فَدَعَوْهُمْ فَلَمْ يَسْتَجِيبُوا لَهُمْ وَجَعَلْنَا بَيْنَهُم مَّوْبِقًا
और (उस दिन से डरो) जिस दिन ख़ुदा फरमाएगा कि अब तुम जिन लोगों को मेरा शरीक़ ख्याल करते थे उनको (मदद के लिए) पुकारो तो वह लोग उनको पुकारेगें मगर वह लोग उनकी कुछ न सुनेगें और हम उन दोनों के बीच में महलक (खतरनाक) आड़ बना देंगे
53وَرَأَى الْمُجْرِمُونَ النَّارَ فَظَنُّوا أَنَّهُم مُّوَاقِعُوهَا وَلَمْ يَجِدُوا عَنْهَا مَصْرِفًا
और गुनेहगार लोग (देखकर समझ जाएँगें कि ये इसमें सोके जाएँगे और उससे गरीज़ (बचने की) की राह न पाएँगें
54وَلَقَدْ صَرَّفْنَا فِي هَٰذَا الْقُرْآنِ لِلنَّاسِ مِن كُلِّ مَثَلٍ ۚ وَكَانَ الْإِنسَانُ أَكْثَرَ شَيْءٍ جَدَلًا
और हमने तो इस क़ुरान में लोगों (के समझाने) के वास्ते हर तरह की मिसालें फेर बदल कर बयान कर दी है मगर इन्सान तो तमाम मख़लूक़ात से ज्यादा झगड़ालू है
55وَمَا مَنَعَ النَّاسَ أَن يُؤْمِنُوا إِذْ جَاءَهُمُ الْهُدَىٰ وَيَسْتَغْفِرُوا رَبَّهُمْ إِلَّا أَن تَأْتِيَهُمْ سُنَّةُ الْأَوَّلِينَ أَوْ يَأْتِيَهُمُ الْعَذَابُ قُبُلًا
और जब लोगों के पास हिदायत आ चुकी तो (फिर) उनको ईमान लाने और अपने परवरदिगार से मग़फिरत की दुआ माँगने से (उसके सिवा और कौन) अम्र मायने है कि अगलों की सी रीत रस्म उनको भी पेश आई या हमारा अज़ाब उनके सामने से (मौजूद) हो
56وَمَا نُرْسِلُ الْمُرْسَلِينَ إِلَّا مُبَشِّرِينَ وَمُنذِرِينَ ۚ وَيُجَادِلُ الَّذِينَ كَفَرُوا بِالْبَاطِلِ لِيُدْحِضُوا بِهِ الْحَقَّ ۖ وَاتَّخَذُوا آيَاتِي وَمَا أُنذِرُوا هُزُوًا
और हम तो पैग़म्बरों को सिर्फ इसलिए भेजते हैं कि (अच्छों को निजात की) खुशख़बरी सुनाएंऔर (बदों को अज़ाब से) डराएंऔर जो लोग काफिर हैं झूटी झूटी बातों का सहारा पकड़ के झगड़ा करते है ताकि उसकी बदौलत हक़ को (उसकी जगह से उखाड़ फेकें और उन लोगों ने मेरी आयतों को जिस (अज़ाब से) ये लोग डराए गए हॅसी ठ्ठ्ठा (मज़ाक) बना रखा है
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीRevelation
54आयत

अनुवाद — अल-कहफ 54

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Tuesday, August 18, 2026

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