मरियम · 13/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
وَحَنَانًا مِّن لَّدُنَّا وَزَكَاةً ۖ وَكَانَ تَقِيًّا ۝١٣
Wa hanaanam mil ladunnaa wa zakaatanw wa kaana taqiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उन्हें बचपन ही में अपनी बारगाह से नुबूवत और रहमदिली और पाक़ीज़गी अता फरमाई

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَنَانًا: रहमत (दया) और महब्बत (प्रेम)।
  • مِّن لَّدُنَّا: अपनी ओर से (अल्लाह की ओर से)।
  • وَزَكَاةً: पवित्रता, गुनाहों से पाकी, बरकत और रहमत।
  • تَقِيًّا: अल्लाह का ख़ौफ रखने वाला, आज्ञाकारी, परहेज़गार।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने हज़रत याह्या (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उन्हें अपनी ओर से हनान (रहमत और महब्बत) अता की। यानी उन्हें लोगों के दिलों में मुहब्बत और क़ुबूलियत दी, और उनके वालिदैन (माता-पिता) के लिए भी उन्हें रहमत बनाया। साथ ही हमने उन्हें ज़कात (पवित्रता और गुनाहों से पाकी) प्रदान की — यानी उन्हें गुनाहों से मासूम रखा, उनके अख़लाक़ को पाकीज़ा बनाया और उनके जीवन में बरकत रखी। यह अल्लाह की विशेष रहमत थी जो उन्हें बचपन से ही मिली।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और वह परहेज़गार थे।" यानी वह अल्लाह का ख़ौफ रखने वाले, उसके हुक्मों की पालना करने वाले और उसकी मनाही से बचने वाले थे। उन्होंने अपनी ज़िंदगी में तक़वा (परहेज़गारी) को अपनाया, अल्लाह की इबादत में मशग़ूल रहे और उसकी रज़ा के लिए काम किया।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को दुनिया में भी इज़्ज़त देता है और आख़िरत में भी। हज़रत याह्या (अलैहिस्सलाम) की पाकीज़गी और तक़वा उन्हें अल्लाह के ख़ास बंदों में शुमार करता है। हमें भी चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में तक़वा अपनाएँ, अल्लाह के हुक्मों पर अमल करें और गुनाहों से बचें, ताकि हम भी अल्लाह की रहमत और महब्बत के हक़दार बन सकें। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन्हीं पर होती है जो उसके ख़ौफ़ के साथ ज़िंदगी गुज़ारते हैं।



📜 आयत 11-15 — मरियम

11فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِ مِنَ الْمِحْرَابِ فَأَوْحَىٰ إِلَيْهِمْ أَن سَبِّحُوا بُكْرَةً وَعَشِيًّا
फिर ज़करिया (अपने इबादत के) हुजरे से अपनी क़ौम के पास (हिदायत देने के लिए) निकले तो उन से इशारा किया कि तुम लोग सुबह व शाम बराबर उसकी तसबीह (व तक़दीस) किया करो
12يَا يَحْيَىٰ خُذِ الْكِتَابَ بِقُوَّةٍ ۖ وَآتَيْنَاهُ الْحُكْمَ صَبِيًّا
(ग़रज़ यहया पैदा हुए और हमने उनसे कहा) ऐ यहया किताब (तौरेत) मज़बूती के साथ लो
13وَحَنَانًا مِّن لَّدُنَّا وَزَكَاةً ۖ وَكَانَ تَقِيًّا
और हमने उन्हें बचपन ही में अपनी बारगाह से नुबूवत और रहमदिली और पाक़ीज़गी अता फरमाई
14وَبَرًّا بِوَالِدَيْهِ وَلَمْ يَكُن جَبَّارًا عَصِيًّا
और वह (ख़ुद भी) परहेज़गार और अपने माँ बाप के हक़ में सआदतमन्द थे और सरकश नाफरमान न थे
15وَسَلَامٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَيَوْمَ يَمُوتُ وَيَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا
और (हमारी तरफ से) उन पर (बराबर) सलाम है जिस दिन पैदा हुए और जिस दिन मरेंगे और जिस दिन (दोबारा) ज़िन्दा उठा खड़े किए जाएँगे
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
13आयत

अनुवाद — मरियम 13

सूरा मरियम आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उन्हें बचपन ही में अपनी बारगाह से नुबूवत…

सूरा आयत 13/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए