अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ख़ुदिल-किताब: तौरात (पवित्र ग्रंथ) को।
- बिक़ुव्वतिन: पूरी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के साथ।
- अल-हुक्म: नबुव्वत (पैग़म्बरी), अथवा गहरी समझ और निर्णय की शक्ति।
- सबिय्यन: छोटी उम्र में, बाल्यावस्था में ही।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत याह्या (अलैहिस्सलाम) पैदा हुए और वे उस उम्र को पहुँचे जब वे बात समझने और आदेश ग्रहण करने के काबिल हुए, तो अल्लाह तआला ने उन्हें सम्बोधित करते हुए फ़रमाया: "ऐ याह्या! तौरात को पूरी शक्ति, गंभीरता और परिश्रम के साथ थामो।" यानी उन्हें आदेश दिया गया कि वे इस पवित्र ग्रंथ को सिर्फ पढ़ें ही नहीं, बल्कि उसके शब्दों को याद करें, उसके अर्थों को समझें, और उस पर पूरी तरह अमल करें। यह एक बड़ी ज़िम्मेदारी थी, और अल्लाह ने उन्हें यह अमानत सौंपी।
इसके साथ ही अल्लाह तआला ने उन्हें बचपन में ही "हुक्म" (नबुव्वत और गहरी समझ) प्रदान कर दी। वे अभी छोटी उम्र के थे, किशोरावस्था में ही थे, कि उन्हें असाधारण बुद्धि, दिव्य ज्ञान, और सही निर्णय लेने की क्षमता दे दी गई। यह अल्लाह की विशेष कृपा थी कि उन्होंने इतनी कम उम्र में ही इतना उच्च मर्तबा पा लिया।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि अल्लाह की ओर से मिलने वाला ज्ञान और समझ उम्र की कसौटी पर निर्भर नहीं होता। अल्लाह जिसे चाहता है, उसे हिक्मत (ज्ञान और समझ) प्रदान करता है। साथ ही, यह भी सीख मिलती है कि अल्लाह के आदेशों को पूरी गंभीरता, मेहनत और लगन के साथ अपनाना चाहिए। जिस तरह हज़रत याह्या ने कम उम्र में ही अल्लाह की किताब को मज़बूती से थामा, हमें भी चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें — चाहे हमारी उम्र कुछ भी हो। अल्लाह की रहमत और फज़ल से कोई भी उम्र में ज्ञान और हिदायत पा सकता है, बशर्ते दिल में सच्ची लगन और नियत हो।
📜 आयत 10-14 — मरियम
अनुवाद — मरियम 12
सूरा मरियम आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ग़रज़ यहया पैदा हुए और हमने उनसे कहा) ऐ यहया…सूरा आयत 12/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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