मरियम · 25/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
وَهُزِّي إِلَيْكِ بِجِذْعِ النَّخْلَةِ تُسَاقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّا ۝٢٥
Wa huzzeee ilaiki bijiz `in nakhlati tusaaqit `alaiki rutaban janiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और खुरमे की जड़ (पकड़ कर) अपनी तरफ़ हिलाओ तुम पर पक्के-पक्के ताजे खुरमे झड़ पड़ेगें फिर (शौक़ से खुरमे) खाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَهُزِّي: और तुम हिलाओ (झकझोरो)
  • بِجِذْعِ النَّخْلَةِ: खजूर के पेड़ के तने को
  • تُسَاقِطْ: गिरा देगा (झड़ा देगा)
  • رُطَبًا: पके हुए ताज़े खजूर
  • جَنِيًّا: जो अभी-अभी तोड़े गए हों (ताज़े)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वह पवित्र क्षण है जब मरियम (अलैहिस्सलाम) अकेली थीं, नए बच्चे को जन्म देने के बाद कमज़ोर और थकी हुई थीं। उन्हें सांत्वना देने और उनकी परेशानी दूर करने के लिए अल्लाह तआला ने उन्हें एक सरल और प्राकृतिक उपाय बताया — उन्होंने कहा: "इस खजूर के पेड़ के तने को अपनी ओर हिलाओ, उस पर से तुम पर ताज़े, पके हुए खजूर गिरेंगे।"

यह आदेश उनके लिए एक चमत्कार और रहमत था। वह एक अकेली औरत थीं, कमज़ोर थीं, लेकिन अल्लाह ने उन्हें यह सिखाया कि दुआ के साथ-साथ कोशिश भी ज़रूरी है। खजूर का पेड़ जो सूखा और बेजान लग रहा था, वह उनके हिलाने से ताज़े, मीठे और रसीले खजूरों से लद जाता है। यह इस बात की निशानी है कि अल्लाह की कुदरत किसी भी चीज़ को बदल सकती है — सूखे पेड़ से जीवन और मिठास निकाल सकती है।

इस आयत में एक बड़ा सबक है: मुसीबत और कठिनाई के समय में भी इंसान को हार नहीं माननी चाहिए। अल्लाह ने मरियम को सीधे खाना नहीं भेजा, बल्कि उन्हें एक काम दिया — पेड़ को हिलाना। यह इस बात की तालीम है कि अल्लाह की मदद उन लोगों के साथ होती है जो कोशिश करते हैं। जब इंसान अपनी तरफ से पूरी कोशिश करता है, तो अल्लाह उसके लिए रास्ते खोल देता है और उसे ऐसी नेमतें देता है जिनकी उसने कल्पना भी नहीं की होती।

यह हमारे लिए एक प्यारा पैगाम है: चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों, अल्लाह पर भरोसा रखें और अपने हाथ-पैर हिलाते रहें। अल्लाह की रहमत उन लोगों के लिए है जो सब्र और कोशिश के साथ उसकी तरफ रुजू करते हैं। मरियम (अलैहिस्सलाम) की यह कहानी हमें सिखाती है कि अल्लाह हर मुश्किल के बाद आसानी देता है, और उसकी मदद कभी देर नहीं करती — बस ज़रूरत है भरोसे और अमल की।



📜 आयत 23-27 — मरियम

23فَأَجَاءَهَا الْمَخَاضُ إِلَىٰ جِذْعِ النَّخْلَةِ قَالَتْ يَا لَيْتَنِي مِتُّ قَبْلَ هَٰذَا وَكُنتُ نَسْيًا مَّنسِيًّا
फिर (जब जनने का वक्त ़क़रीब आया तो दरदे ज़ह) उन्हें एक खजूर के (सूखे) दरख्त की जड़ में ले आया और (बेकसी में शर्म से) कहने लगीं काश मैं इससे पहले मर जाती और (न पैद होकर)
24فَنَادَاهَا مِن تَحْتِهَا أَلَّا تَحْزَنِي قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا
बिल्कुल भूली बिसरी हो जाती तब जिबरील ने मरियम के पाईन की तरफ़ से आवाज़ दी कि तुम कुढ़ों नहीं देखो तो तुम्हारे परवरदिगार ने तुम्हारे क़रीब ही नीचे एक चश्मा जारी कर दिया है
25وَهُزِّي إِلَيْكِ بِجِذْعِ النَّخْلَةِ تُسَاقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّا
और खुरमे की जड़ (पकड़ कर) अपनी तरफ़ हिलाओ तुम पर पक्के-पक्के ताजे खुरमे झड़ पड़ेगें फिर (शौक़ से खुरमे) खाओ
26فَكُلِي وَاشْرَبِي وَقَرِّي عَيْنًا ۖ فَإِمَّا تَرَيِنَّ مِنَ الْبَشَرِ أَحَدًا فَقُولِي إِنِّي نَذَرْتُ لِلرَّحْمَٰنِ صَوْمًا فَلَنْ أُكَلِّمَ الْيَوْمَ إِنسِيًّا
और (चश्मे का पानी) पियो और (लड़के से) अपनी ऑंख ठन्डी करो फिर अगर तुम किसी आदमी को देखो (और वह तुमसे कुछ पूछे) तो तुम इशारे से कह देना कि मैंने खुदा के वास्ते रोजे क़ी नज़र की थी तो मैं आज हरगिज़ किसी से बात नहीं कर सकती
27فَأَتَتْ بِهِ قَوْمَهَا تَحْمِلُهُ ۖ قَالُوا يَا مَرْيَمُ لَقَدْ جِئْتِ شَيْئًا فَرِيًّا
फिर मरियम उस लड़के को अपनी गोद में लिए हुए अपनी क़ौम के पास आयीं वह लोग देखकर कहने लगे ऐ मरियम तुमने तो यक़ीनन बहुत बुरा काम किया
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अनुवाद — मरियम 25

सूरा मरियम आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और खुरमे की जड़ (पकड़ कर) अपनी तरफ़ हिलाओ तुम…

सूरा आयत 25/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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