मरियम · 51/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مُوسَىٰ ۚ إِنَّهُ كَانَ مُخْلَصًا وَكَانَ رَسُولًا نَّبِيًّا ۝٥١
Wazkur fil Kitaabi Moosaaa; innahoo kaana mukhlasanw wa kaana Rasoolan Nabiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) कुरान में (कुछ) मूसा का (भी) तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह (मेरा) बन्दा और साहिबे किताब व शरीयत नबी था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुख़्लिसन (مُخْلَصًا): चुना हुआ, ख़ालिस किया हुआ, जिसे अल्लाह ने अपनी बंदगी और रिसालत के लिए विशेष रूप से चुन लिया हो।
  • रसूलन (رَسُولًا): पैग़म्बर जिसे अल्लाह की ओर से लोगों तक संदेश पहुँचाने का काम सौंपा गया हो।
  • नबिय्यन (نَبِيًّا): नबी, वह व्यक्ति जिसे अल्लाह की ओर से वह़्य (प्रकाशना) आती हो।

तफ़सीर:

ऐ नबी! इस किताब (क़ुरआन) में मूसा (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करो। बेशक वह अल्लाह के चुने हुए बंदों में से थे, जिन्हें अल्लाह ने अपनी बंदगी, नबुव्वत और रिसालत के लिए ख़ास कर लिया था। वह रसूल भी थे और नबी भी। यानी अल्लाह ने उन्हें दोनों मर्तबे एक साथ अता किए — नबुव्वत उनके और अल्लाह के बीच का रिश्ता था, जिसमें उन पर वह़्य उतरती थी, और रिसालत उनके और लोगों के बीच का रिश्ता था, जिसमें वह अल्लाह का पैग़ाम लोगों तक पहुँचाते थे। वह उन महान रसूलों में से थे जिन्हें अज़्म (दृढ़ संकल्प) वाले रसूल कहा जाता है।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने चुने हुए बंदों को किस तरह इज़्ज़त देता है। मूसा (अलैहिस्सलाम) की यह फ़ज़ीलत उनके अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी बंदगी की बदौलत थी। जब हम इन पैग़म्बरों के क़िस्से पढ़ते हैं, तो हमें उनके जैसा बनने की कोशिश करनी चाहिए — अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की बंदगी के लिए ख़ालिस करना, उसकी राह में सब्र और इस्तिक़ामत दिखाना। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की रहमत और फ़ज़ीलत उसके नेक बंदों के लिए हमेशा मौजूद है, और जो लोग अल्लाह के लिए अपनी ज़िंदगी ख़ालिस कर लेते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया और आख़िरत में सरबुलंदी अता करता है। इसलिए हमें भी चाहिए कि अपने अमल को ख़ालिस करें, नीयत को दुरुस्त करें और अल्लाह के दीन की ख़िदमत में अपना हिस्सा अदा करें।



📜 आयत 49-53 — मरियम

49فَلَمَّا اعْتَزَلَهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ وَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ ۖ وَكُلًّا جَعَلْنَا نَبِيًّا
ग़रज़ इबराहीम ने उन लोगों को और जिसे ये लोग खुदा को छोड़कर परसतिश किया करते थे छोड़ा तो हमने उन्हें इसहाक़ व याकूब (सी औलाद) अता फ़रमाई और हर एक को नुबूवत के दर्जे पर फ़ायज़ किया
50وَوَهَبْنَا لَهُم مِّن رَّحْمَتِنَا وَجَعَلْنَا لَهُمْ لِسَانَ صِدْقٍ عَلِيًّا
और उन सबको अपनी रहमत से कुछ इनायत फ़रमाया और हमने उनके लिए आला दर्जे का ज़िक्रे ख़ैर (दुनिया में भी) क़रार दिया
51وَاذْكُرْ فِي الْكِتَابِ مُوسَىٰ ۚ إِنَّهُ كَانَ مُخْلَصًا وَكَانَ رَسُولًا نَّبِيًّا
और (ऐ रसूल) कुरान में (कुछ) मूसा का (भी) तज़किरा करो इसमें शक नहीं कि वह (मेरा) बन्दा और साहिबे किताब व शरीयत नबी था
52وَنَادَيْنَاهُ مِن جَانِبِ الطُّورِ الْأَيْمَنِ وَقَرَّبْنَاهُ نَجِيًّا
और हमने उनको (कोहे तूर) की दाहिनी तरफ़ से आवाज़ दी और हमने उन्हें राज़ व नियाज़ की बातें करने के लिए अपने क़रीब बुलाया
53وَوَهَبْنَا لَهُ مِن رَّحْمَتِنَا أَخَاهُ هَارُونَ نَبِيًّا
और हमने उन्हें अपनी ख़ास मेहरबानी से उनके भाई हारून को (उनका वज़ीर बनाकर) इनायत फ़रमाया
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
51आयत

अनुवाद — मरियम 51

सूरा मरियम आयत 51 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) कुरान में (कुछ) मूसा का (भी) तज़किरा…

सूरा आयत 51/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 49–53. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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