अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- "لِسَانَ صِدْقٍ" का अर्थ है: अच्छी स्मृति, प्रशंसा और सच्ची वाणी जो लोगों की ज़ुबान पर जारी रहे।
- "عَلِيًّا" का अर्थ है: ऊँचा, बुलंद, सम्मानित और सर्वोच्च।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने प्यारे नबियों — इब्राहीम, इस्हाक़ और याक़ूब (अलैहिमुस्सलाम) — का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि हमने उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ा। यह रहमत केवल नबुव्वत तक सीमित नहीं थी, बल्कि हमने उन्हें दुनिया में खूब रिज़्क़, संतान, इल्म, हिकमत और कई तरह की नेमतें अता कीं। यह अल्लाह का विशेष अनुग्रह था जो उसने अपने चुने हुए बंदों को दिया।
फिर अल्लाह ने उनके लिए एक और बड़ी नेमत का ज़िक्र किया — "लिसान सिद्क़ अलिय्यन" यानी हमने उन्हें ऐसा ऊँचा और सच्चा ज़िक्र अता किया जो हमेशा के लिए लोगों की ज़ुबानों पर जारी रहा। उनकी प्रशंसा और अच्छाई का चर्चा सभी धर्मों और समुदायों के लोगों में फैल गया। हर कोई उन्हें प्यार और सम्मान की नज़र से देखता है, उनके अच्छे गुणों को याद करता है और उनके लिए दुआएँ करता है। यह वह मुक़ाम है जो अल्लाह अपने नेक बंदों को देता है — कि उनका नाम और उनकी याद इस दुनिया में पाक और बुलंद रहे।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत का दामन थामने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए। जब अल्लाह किसी बंदे से मुहब्बत करता है, तो उसे दुनिया की नेमतों के साथ-साथ वह चीज़ भी देता है जो मरने के बाद भी ज़िंदा रहती है — अच्छी स्मृति और पुण्य चर्चा। यही असली कामयाबी है कि इंसान अपने जीवन को इस तरह गुज़ारे कि उसकी याद लोगों के दिलों में अच्छाई के साथ रहे।
इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि हमें अपने जीवन में सच्चाई, नेकी और अल्लाह की इबादत को अपनाना चाहिए, ताकि हम भी अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें और हमारा ज़िक्र भी लोगों के बीच अच्छाई के साथ हो। अल्लाह अपने नेक बंदों को दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है।
📜 आयत 48-52 — मरियम
अनुवाद — मरियम 50
सूरा मरियम आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन सबको अपनी रहमत से कुछ इनायत फ़रमाया और…सूरा आयत 50/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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