मरियम · 96/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَيَجْعَلُ لَهُمُ الرَّحْمَٰنُ وُدًّا ۝٩٦
Innal lazeena aamanoo wa `amilus saalihaati sa yaj`alu lahumur Rahmaanu wuddaa
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए अनक़रीब ही खुदा उन की मोहब्बत (लोगों के दिलों में) पैदा कर देगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آمَنُوا: ईमान लाए, अल्लाह और उसके रसूल पर विश्वास किया।
  • الصَّالِحَاتِ: अच्छे कर्म, वे कार्य जो अल्लाह की रज़ा के अनुसार हों।
  • وُدًّا: प्रेम, मुहब्बत, दिलों में जगह।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुक़द्दस कुरआन की एक बहुत ही प्यारी और उम्मीद भरी आयत है, जो अल्लाह के रहमत भरे दरवाज़े की तरफ़ इशारा करती है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिन लोगों ने सच्चे दिल से ईमान लाया — यानी अल्लाह पर, उसके फ़रिश्तों पर, उसकी किताबों पर, उसके रसूलों पर और क़यामत के दिन पर पूरा यक़ीन किया — और फिर उस ईमान के साथ अच्छे कर्म भी किए, यानी अपने अमल को अल्लाह की बताई हुई शरीयत के मुताबिक़ ढाला, नमाज़ पढ़ी, रोज़ा रखा, ज़कात दी, लोगों के साथ भलाई की, सच बोला, ईमानदारी से काम किया, माँ-बाप का ख़याल रखा और हर उस काम से बचे जो अल्लाह ने मना किया है — तो उनके लिए अल्लाह रहमान (बड़ा मेहरबान) एक ख़ास इनाम का वादा करता है।

वह इनाम क्या है? वह यह कि अल्लाह तआला उनके दिलों में लोगों की मुहब्बत डाल देगा। यानी अल्लाह उन्हें लोगों के दिलों में प्यारा बना देगा, लोग उनसे सच्ची मुहब्बत करेंगे, उनकी इज़्ज़त करेंगे और उनके साथ अच्छा सुलूक करेंगे। यह कोई मामूली बात नहीं है — यह अल्लाह की तरफ़ से एक बहुत बड़ी नेमत है। जब अल्लाह किसी बंदे से मुहब्बत करता है, तो वह उसकी मुहब्बत सारे लोगों के दिलों में डाल देता है। यहाँ तक कि ज़मीन के फ़रिश्ते भी उससे मुहब्बत करते हैं, और आसमान वालों में भी उसका ज़िक्र अच्छा होता है।

यह आयत हमें बताती है कि अगर हम चाहते हैं कि लोग हमसे प्यार करें, हमारी इज़्ज़त करें और हमारी बात मानें, तो इसका सबसे अच्छा तरीक़ा यही है कि हम अल्लाह पर ईमान लाएँ और अच्छे कर्म करें। दुनिया में मुहब्बत और इज़्ज़त पाने का सबसे सच्चा रास्ता यही है। जो लोग सिर्फ़ दौलत, ओहदे या ज़बरदस्ती से लोगों का दिल जीतना चाहते हैं, वह कभी कामयाब नहीं होते। लेकिन जो अल्लाह के नेक बंदे होते हैं, अल्लाह ख़ुद उनके लिए लोगों के दिलों में मुहब्बत पैदा कर देता है।

इस आयत में एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है — कि अल्लाह का रहमान होना ही काफ़ी है। वह चाहे तो सबसे ज़्यादा नफ़रत करने वाले दिल को भी मुहब्बत में बदल सकता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को सुधारें, ताकि हम भी उन लोगों में शामिल हो जाएँ जिनके लिए अल्लाह ने यह प्यारा वादा किया है। और याद रखें — अल्लाह का वादा सच्चा है, वह कभी अपना वादा नहीं तोड़ता। जो लोग ईमान और अच्छे कर्मों पर साबित-क़दम रहेंगे, अल्लाह उन्हें दुनिया में भी मुहब्बत देगा और आख़िरत में भी उनकी इज़्ज़त करेगा।

🎧 सुनें

📜 आयत 94-98 — मरियम

94لَّقَدْ أَحْصَاهُمْ وَعَدَّهُمْ عَدًّا
और सबको अच्छी तरह गिन लिया है
95وَكُلُّهُمْ آتِيهِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ فَرْدًا
और ये सब उसके सामने क़यामत के दिन अकेले (अकेले) हाज़िर होंगे
96إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ سَيَجْعَلُ لَهُمُ الرَّحْمَٰنُ وُدًّا
बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे-अच्छे काम किए अनक़रीब ही खुदा उन की मोहब्बत (लोगों के दिलों में) पैदा कर देगा
97فَإِنَّمَا يَسَّرْنَاهُ بِلِسَانِكَ لِتُبَشِّرَ بِهِ الْمُتَّقِينَ وَتُنذِرَ بِهِ قَوْمًا لُّدًّا
(ऐ रसूल) हमने उस कुरान को तुम्हारी (अरबी) जुबान में सिर्फ इसलिए आसान कर दिया है कि तुम उसके ज़रिए से परहेज़गारों को (जन्नत की) खुशख़बरी दो और (अरब की) झगड़ालू क़ौम को (अज़ाबे खुदा से) डराओ
98وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هَلْ تُحِسُّ مِنْهُم مِّنْ أَحَدٍ أَوْ تَسْمَعُ لَهُمْ رِكْزًا
और हमने उनसे पहले कितनी जमाअतों को हलाक कर डाला भला तुम उनमें से किसी को (कहीं देखते हो) उसकी कुछ भनक भी सुनते हो
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अनुवाद — मरियम 96

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Tuesday, August 18, 2026

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