Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَسْلِمْ: अपने आपको अल्लाह के हवाले कर दे, उसकी आज्ञा के आगे सिर झुका दे, एकाग्रचित्त होकर उसी की ओर मुड़ जा।
- أَسْلَمْتُ: मैंने आत्मसमर्पण कर दिया, अपना मामला अल्लाह को सौंप दिया।
- رَبِّ الْعَالَمِينَ: सारे संसारों का पालनहार, जो सबको पैदा करता है, पालता है और उनकी देखभाल करता है।
व्याख्या:
यह आयत हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के उस उच्च मक़ाम और उनकी फ़ितरत की पवित्रता को बयान करती है, जिसके कारण अल्लाह ने उन्हें अपना ख़लील (दोस्त) बनाया। जब अल्लाह ने उनसे कहा: "अपने आपको मेरे हवाले कर दे, मेरे आगे सिर झुका दे और मेरी आज्ञा का पालन करने में जुट जा," तो उन्होंने बिना किसी झिझक, बिना किसी देरी और बिना किसी सवाल के तुरंत उत्तर दिया: "मैंने सारे संसारों के पालनहार के हवाले अपने आपको कर दिया।" यानी उन्होंने अपने रब की आज्ञा को सिर माथे पर लिया और पूरे विश्वास के साथ कहा कि मैंने अपना पूरा अस्तित्व, अपनी सारी इच्छाएँ और अपना सारा मामला उस रब के सुपुर्द कर दिया जो सारे जहानों का पालनहार है। यह उनका उत्तर केवल ज़ुबानी इक़रार नहीं था, बल्कि उनके दिल की गहराई से निकला हुआ एक ऐसा एलान था जो उनके पूरे जीवन, उनके कर्मों और उनकी कुर्बानियों से साबित हुआ। उन्होंने अपने जीवन के हर पहलू में — चाहे वह माल हो, औलाद हो या खुद अपनी जान — अल्लाह के हुक्म को सबसे आगे रखा। यही वजह है कि अल्लाह ने उन्हें इमाम-उल-उम्मत (उम्मत के इमाम) बनाया और उन्हें अपनी दोस्ती का शरफ़ अता किया।
फ़ायदे:
- फ़ौरन आज्ञा का पालन: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि जब अल्लाह और उसके रसूल का हुक्म आए तो उस पर फ़ौरन अमल करना चाहिए, बिना देरी और बिना किसी बहाने के। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने बिना किसी झिझक के "أَسْلَمْتُ" कहा, जो हमारे लिए एक बेहतरीन नमूना है।
- इस्लाम ही सच्चा दीन है: यह आयत साबित करती है कि इस्लाम (अल्लाह के आगे सिर झुकाना) ही वह दीन है जिसे अल्लाह ने अपने पैग़म्बरों के लिए पसंद किया। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) जैसे अज़ीम पैग़म्बर को भी यही हुक्म दिया गया और उन्होंने इसे खुशी-खुशी क़बूल किया।
- अल्लाह पर भरोसा: "أَسْلَمْتُ لِرَبِّ الْعَالَمِينَ" में अल्लाह पर पूरा भरोसा और उसके हवाले होने की तालीम है। जब इंसान अपना पूरा मामला अल्लाह के हवाले कर देता है, तो अल्लाह उसे कभी अकेला नहीं छोड़ता और उसकी हिफ़ाज़त करता है।
- अल्लाह की रहमत और मोहब्बत का ज़रिया: हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की इस फ़ौरन फ़रमाँबरदारी ने उन्हें अल्लाह की मोहब्बत और दोस्ती का हक़दार बनाया। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह की रहमत और मोहब्बत पाने का सबसे बड़ा ज़रिया उसकी आज्ञा का पालन और उसके हवाले हो जाना है।
📜 आयत 129-133 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 131
सूरा अल-बकरा आयत 131 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब उनसे उनके परवरदिगार ने कहा इस्लाम कुबूल करो तो…सूरा आयत 131/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 129–133. हिंदी अर्थ: اردو.
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Wednesday, September 30, 2026
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