अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَصَّىٰ: वसीयत की, आदेश दिया, नसीहत की।
- بِهَا: इस (धर्म/इस्लाम) की।
- اصْطَفَىٰ: चुन लिया, विशेष रूप से चुन लिया।
- فَلَا تَمُوتُنَّ: तुम हरगिज़ मत मरो।
- مُسْلِمُونَ: आज्ञाकारी, समर्पित (अल्लाह के)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी औलाद को इस्लाम की वसीयत की। यानी उन्होंने अपने बेटों को सख्ती से नसीहत की कि वे इसी दीन (इस्लाम) पर क़ायम रहें। हज़रत इब्राहीम ने अपने बेटों — हज़रत इस्माईल और हज़रत इस्हाक़ — को, और हज़रत याक़ूब ने अपने बारह बेटों को यही वसीयत की।
उन्होंने अपने बेटों से कहा: "ऐ मेरे बेटों! अल्लाह ने तुम्हारे लिए इस दीन को चुन लिया है — यानी इस्लाम को, जो अल्लाह के सामने पूर्ण समर्पण का नाम है। यही वह दीन है जो सभी अंबिया की शिक्षा रहा है। इसलिए तुम इस पर मज़बूती से जमे रहो, और खबरदार! मौत तुम्हें कभी ऐसी हालत में न आए कि तुम इस्लाम पर न हो। यानी तुम्हारी ज़िंदगी का आख़िरी लम्हा भी इस्लाम की हालत में ही हो।"
इस वसीयत का मतलब यह था कि वे चाहते थे कि उनकी औलाद न सिर्फ़ ज़िंदगी भर मुसलमान रहे, बल्कि उनकी मौत भी इस्लाम की हालत में हो। यह एक बहुत बड़ी नसीहत है — कि इंसान अपनी पूरी ज़िंदगी अल्लाह की इताअत में गुज़ारे, और उसकी मौत भी ईमान की हालत में हो। यही सबसे बड़ी कामयाबी है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें भी अपनी औलाद को इस्लाम की तालीम देनी चाहिए, और उन्हें हमेशा इस बात की नसीहत करते रहना चाहिए कि वे अल्लाह के दीन पर क़ायम रहें। जिस तरह अंबिया ने अपनी औलाद को इस्लाम की वसीयत की, उसी तरह हमें भी अपने बच्चों को नेकी, ईमान और अल्लाह की इताअत की तालीम देनी चाहिए।
और यह भी याद रखें कि इस्लाम ही वह दीन है जिसे अल्लाह ने अपने बंदों के लिए पसंद किया है। यह दीन फ़ितरत का दीन है, और यही वह रास्ता है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला ने हम पर बहुत बड़ा एहसान किया है कि हमें इस दीन को नसीब किया। हमें चाहिए कि इस नेअमत की क़द्र करें, और इसे अपनी औलाद तक पहुँचाने की कोशिश करें।
याद रखिए — इस्लाम सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल और अमल का समर्पण है। जो इंसान सच्चे दिल से अल्लाह के सामने झुक जाए, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक़ ढाल ले, वही सच्चा मुसलमान है। और यही वह हालत है जिसमें मौत आना हर मोमिन की आरज़ू होनी चाहिए।
📜 आयत 130-134 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 132
सूरा अल-बकरा आयत 132 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और इसी तरीके क़ी इबराहीम ने अपनी औलाद से वसीयत…सूरा आयत 132/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 130–134. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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