Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَرْغَبُ عَنْ – मुँह मोड़ना, त्याग करना, छोड़ देना।
- مِلَّةِ – धर्म, पद्धति, तरीका।
- سَفِهَ نَفْسَهُ – अपनी जान को नुकसान पहुँचाया, अपनी आत्मा को हल्का और बेक़दर किया, अर्थात् मूर्खता और नासमझी से काम लिया।
- اصْطَفَيْنَاهُ – हमने उसे चुन लिया, विशेष रूप से चुनाव किया।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के धर्म से मुँह मोड़ते हैं। यह धर्म वास्तव में इस्लाम और एकेश्वरवाद का मूल है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हज़रत इब्राहीम के धर्म को छोड़कर किसी और रास्ते को अपनाने वाला वही व्यक्ति होता है जिसने अपनी आत्मा को मूर्खता और नासमझी का शिकार बना लिया हो। ऐसा व्यक्ति अपनी ही जान को नुकसान पहुँचाता है, क्योंकि वह सत्य को छोड़कर असत्य की ओर भागता है और अपने लिए अपमान और विनाश का सामान करता है।
अल्लाह तआला ने हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को दुनिया में ही चुन लिया था और उन्हें नबी, रसूल और अपना ख़लील (दोस्त) बनाया। यह चुनाव अल्लाह की ओर से था, जो उनकी पवित्रता, ईमान और आज्ञाकारिता की वजह से हुआ। आख़िरत में भी वह उन सलीह (नेक) बंदों में से होंगे जिन्होंने अल्लाह के सारे आदेशों को पूरा किया और अपने रब की रज़ा के लिए हर क़ुर्बानी दी। उनका मुक़ाम आख़िरत में बहुत ऊँचा होगा और वह जन्नत में नबियों के साथ होंगे।
फ़ायदे (उपदेश और सबक):
- हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का धर्म ही सच्चा धर्म है, और वह इस्लाम ही है। जो कोई इससे मुँह मोड़ता है, वह अपनी ही आत्मा को नुकसान पहुँचाता है।
- सच्चे दीन से दूर होने की जड़ मूर्खता और नासमझी है। अक़्लमंद इंसान वही है जो अल्लाह के भेजे हुए दीन को अपनाए।
- अल्लाह तआला जिसे चाहता है अपनी विशेष रहमत से चुन लेता है, और यह चुनाव अल्लाह की तरफ़ से होता है, किसी की सिफ़ारिश से नहीं।
- आख़िरत की कामयाबी उन्हीं के लिए है जो दुनिया में अल्लाह के आदेशों पर चलते हैं और नेक बंदों में शामिल होते हैं।
- यह आयत मुसलमानों को अपने दीन पर गर्व करने और उसे मज़बूती से थामे रहने की तरग़ीब देती है, क्योंकि यही वह रास्ता है जिसे अल्लाह ने अपने प्यारे नबी इब्राहीम के लिए चुना।
📜 आयत 128-132 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 130
सूरा अल-बकरा आयत 130 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कौन है जो इबराहीम के तरीक़े से नफरत करे…सूरा आयत 130/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 128–132. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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