अल-बकरा · 224/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَلَا تَجْعَلُوا اللَّهَ عُرْضَةً لِّأَيْمَانِكُمْ أَن تَبَرُّوا وَتَتَّقُوا وَتُصْلِحُوا بَيْنَ النَّاسِ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ۝٢٢٤
Wa laa taj`alul laaha `urdatal li aymaanikum an tabarroo wa tattaqoo wa tuslihoo bainan naas; wallaahu Samee`un `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
और (मुसलमानों) तुम अपनी क़समों (के हीले) से ख़ुदा (के नाम) को लोगों के साथ सुलूक करने और ख़ुदा से डरने और लोगों के दरमियान सुलह करवा देने का मानेअ न ठहराव और ख़ुदा सबकी सुनता और सब को जानता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عُرْضَةً (उर्ज़तन): रुकावट, बाधा, ढाल या बहाना।
  • لِأَيْمَانِكُمْ (लिअयमानिकुम): अपनी क़समों के लिए।
  • أَن تَبَرُّوا (अन तबर्रू): नेकी करने से।
  • وَتَتَّقُوا (व तत्तक़ू): परहेज़गारी और डर से बचने से।
  • وَتُصْلِحُوا (व तुस्लिहू): सुधार करने से।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुसलमानों को नसीहत करता है कि वे अपनी क़समों को अल्लाह के नाम से इस तरह न बाँधें कि वह उनके लिए नेकी, परहेज़गारी और लोगों के बीच सुधार करने में रुकावट बन जाए। यानी अगर किसी ने किसी अच्छे काम से दूर रहने की क़सम खा ली हो, जैसे कि रिश्तेदारों से मिलना-जुलना, किसी की मदद करना, या दो लोगों में सुलह कराना, तो उसे चाहिए कि वह अपनी क़सम को तोड़ दे और वह नेक काम करे, और क़सम तोड़ने का कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) अदा करे। अल्लाह को अपनी क़समों के पीछे छिपकर नेकी से बचना सही नहीं है। अल्लाह तआला सब कुछ सुनता और जानता है — वह तुम्हारी नीयतों और कामों से पूरी तरह वाक़िफ़ है, और उसी के पास तुम्हें अपने कर्मों का बदला देना है।


फ़ायदे (लाभ और सबक):

  1. इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह का नाम कभी भी नेकी और भलाई से बचने का बहाना नहीं बनना चाहिए। अल्लाह का नाम तो सच्चाई और भलाई की तरफ ले जाने वाला है।
  2. क़सम खाने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, और अगर क़सम खा ली है तो उसे नेकी के रास्ते में रुकावट नहीं बनने देना चाहिए।
  3. इस्लाम में लोगों के बीच सुलह कराना और भलाई फैलाना बहुत बड़ी नेकी है, और इसे किसी भी वजह से नहीं छोड़ना चाहिए।
  4. अल्लाह तआला हमारी हर बात सुनता है और हर नीयत जानता है, इसलिए हमें अपने दिल और ज़ुबान दोनों को साफ़ रखना चाहिए।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि दीन में आसानी है — अगर गलती से कोई क़सम हो जाए जो नेकी से रोके, तो उसका हल कफ़्फ़ारा अदा करके नेकी करना है, न कि नेकी छोड़ देना।


📜 आयत 222-226 — अल-बकरा

222وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْمَحِيضِ ۖ قُلْ هُوَ أَذًى فَاعْتَزِلُوا النِّسَاءَ فِي الْمَحِيضِ ۖ وَلَا تَقْرَبُوهُنَّ حَتَّىٰ يَطْهُرْنَ ۖ فَإِذَا تَطَهَّرْنَ فَأْتُوهُنَّ مِنْ حَيْثُ أَمَرَكُمُ اللَّهُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ التَّوَّابِينَ وَيُحِبُّ الْمُتَطَهِّرِينَ
(ऐ रसूल) तुम से लोग हैज़ के बारे में पूछते हैं तुम उनसे कह दो कि ये गन्दगी और घिन की बीमारी है तो (अय्यामे हैज़) में तुम औरतों से अलग रहो और जब तक वह पाक न हो जाएँ उनके पास न जाओ पस जब वह पाक हो जाएँ तो जिधर से तुम्हें ख़ुदा ने हुक्म दिया है उन के पास जाओ बेशक ख़ुदा तौबा करने वालो और सुथरे लोगों को पसन्द करता है तुम्हारी बीवियाँ (गोया) तुम्हारी खेती हैं
223نِسَاؤُكُمْ حَرْثٌ لَّكُمْ فَأْتُوا حَرْثَكُمْ أَنَّىٰ شِئْتُمْ ۖ وَقَدِّمُوا لِأَنفُسِكُمْ ۚ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعْلَمُوا أَنَّكُم مُّلَاقُوهُ ۗ وَبَشِّرِ الْمُؤْمِنِينَ
तो तुम अपनी खेती में जिस तरह चाहो आओ और अपनी आइन्दा की भलाई के वास्ते (आमाल साके) पेशगी भेजो और ख़ुदा से डरते रहो और ये भी समझ रखो कि एक दिन तुमको उसके सामने जाना है और ऐ रसूल ईमानदारों को नजात की ख़ुश ख़बरी दे दो
224وَلَا تَجْعَلُوا اللَّهَ عُرْضَةً لِّأَيْمَانِكُمْ أَن تَبَرُّوا وَتَتَّقُوا وَتُصْلِحُوا بَيْنَ النَّاسِ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और (मुसलमानों) तुम अपनी क़समों (के हीले) से ख़ुदा (के नाम) को लोगों के साथ सुलूक करने और ख़ुदा से डरने और लोगों के दरमियान सुलह करवा देने का मानेअ न ठहराव और ख़ुदा सबकी सुनता और सब को जानता है
225لَّا يُؤَاخِذُكُمُ اللَّهُ بِاللَّغْوِ فِي أَيْمَانِكُمْ وَلَٰكِن يُؤَاخِذُكُم بِمَا كَسَبَتْ قُلُوبُكُمْ ۗ وَاللَّهُ غَفُورٌ حَلِيمٌ
तुम्हारी लग़ो (बेकार) क़समों पर जो बेइख्तेयार ज़बान से निकल जाए ख़ुदा तुम से गिरफ्तार नहीं करने का मगर उन कसमों पर ज़रुर तुम्हारी गिरफ्त करेगा जो तुमने क़सदन (जान कर) दिल से खायीं हो और ख़ुदा बख्शने वाला बुर्दबार है
226لِّلَّذِينَ يُؤْلُونَ مِن نِّسَائِهِمْ تَرَبُّصُ أَرْبَعَةِ أَشْهُرٍ ۖ فَإِن فَاءُوا فَإِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
जो लोग अपनी बीवियों के पास जाने से क़सम खायें उन के लिए चार महीने की मोहलत है पस अगर (वह अपनी क़सम से उस मुद्दत में बाज़ आए) और उनकी तरफ तवज्जो करें तो बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अल-बकरा 224

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Tuesday, August 18, 2026

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