अल-बकरा · 8/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ آمَنَّا بِاللَّهِ وَبِالْيَوْمِ الْآخِرِ وَمَا هُم بِمُؤْمِنِينَ ۝٨
Wa minan naasi mai yaqoolu aamannaa billaahi wa bil yawmil aakhiri wa maa hum bimu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कहते हैं कि हम खुदा पर और क़यामत पर ईमान लाए हालाँकि वह दिल से ईमान नहीं लाए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آمَنَّا بِاللَّهِ: हम अल्लाह पर ईमान लाए।
  • بِالْيَوْمِ الْآخِرِ: आख़िरत के दिन (क़ियामत के दिन) पर।
  • وَمَا هُم بِمُؤْمِنِينَ: हालाँकि वे वास्तव में ईमानवाले नहीं हैं।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों का हाल बयान कर रहा है जो मुँह से ईमान का दावा करते हैं, लेकिन उनके दिल ईमान से ख़ाली होते हैं। ये वे मुनाफ़िक़ (दो-मुँहे) लोग हैं जो मुसलमानों के बीच रहते हैं, अपनी जान और माल की हिफ़ाज़त के लिए अपनी ज़ुबान से कहते हैं: "हम अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान लाए हैं।" लेकिन उनके दिल इस दावे की तस्दीक़ नहीं करते। वे न तो सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं, न क़ियामत के दिन पर यक़ीन रखते हैं। उनका यह दावा सिर्फ़ ज़बानी है, दिली नहीं।

यह आयत मुनाफ़िक़ों की पहचान कराती है और बताती है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का इक़रार नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अमल की पाबंदी है। अल्लाह के नज़दीक वही ईमान क़ाबिल-ए-क़ुबूल है जो दिल की गहराइयों से निकले और जिसका असर इंसान के अमल में नज़र आए।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हमें अपने ईमान को सिर्फ़ ज़ुबानी दावे तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि अपने दिलों को सच्चे ईमान से मुनव्वर करना चाहिए। अल्लाह तआला हर इंसान के दिल का हाल जानता है, और वही हमारे ईमान की सच्चाई का इम्तिहान लेगा। हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को अमल के साथ मज़बूत करें, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनका दावा झूठा है और जिनके लिए आख़िरत में शर्मिंदगी और अज़ाब है।

याद रखें, अल्लाह तआला सब कुछ देख रहा है और सब कुछ जानता है। वह न तो किसी के दिल की बात से बेख़बर है और न ही किसी का अमल उससे छिपा है। इसलिए हमें अपने दिलों को साफ़ रखना चाहिए और अपने ईमान को सच्चा बनाना चाहिए, ताकि हम अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बन सकें।

🎧 सुनें

📜 आयत 6-10 — अल-बकरा

6إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا سَوَاءٌ عَلَيْهِمْ أَأَنذَرْتَهُمْ أَمْ لَمْ تُنذِرْهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ
बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र इख़तेयार किया उनके लिए बराबर है (ऐ रसूल) ख्वाह (चाहे) तुम उन्हें डराओ या न डराओ वह ईमान न लाएँगे
7خَتَمَ اللَّهُ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ وَعَلَىٰ سَمْعِهِمْ ۖ وَعَلَىٰ أَبْصَارِهِمْ غِشَاوَةٌ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
उनके दिलों पर और उनके कानों पर (नज़र करके) खुदा ने तसदीक़ कर दी है (कि ये ईमान न लाएँगे) और उनकी ऑंखों पर परदा (पड़ा हुआ) है और उन्हीं के लिए (बहुत) बड़ा अज़ाब है
8وَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ آمَنَّا بِاللَّهِ وَبِالْيَوْمِ الْآخِرِ وَمَا هُم بِمُؤْمِنِينَ
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कहते हैं कि हम खुदा पर और क़यामत पर ईमान लाए हालाँकि वह दिल से ईमान नहीं लाए
9يُخَادِعُونَ اللَّهَ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَمَا يَخْدَعُونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَ
खुदा को और उन लोगों को जो ईमान लाए धोखा देते हैं हालाँकि वह अपने आपको धोखा देते हैं और कुछ शऊर नहीं रखते हैं
10فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ فَزَادَهُمُ اللَّهُ مَرَضًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ
उनके दिलों में मर्ज़ था ही अब खुदा ने उनके मर्ज़ को और बढ़ा दिया और चूँकि वह लोग झूठ बोला करते थे इसलिए उन पर तकलीफ देह अज़ाब है
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अनुवाद — अल-बकरा 8

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Tuesday, August 18, 2026

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