Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفَتَطْمَعُونَ: क्या तुम लालच रखते हो / क्या तुम आशा रखते हो?
- يُؤْمِنُوا لَكُمْ: तुम्हारी बात मानें / तुम पर ईमान लाएँ
- فَرِيقٌ: एक समूह / एक गिरोह
- يَسْمَعُونَ كَلَامَ اللهِ: अल्लाह का कलाम (तौरात) सुनते थे
- يُحَرِّفُونَهُ: उसे बदल देते थे / उसमें तहरीफ़ करते थे
- مِن بَعْدِ مَا عَقَلُوهُ: उसे समझने और जानने के बाद
- وَهُمْ يَعْلَمُونَ: हालाँकि वे जानते थे
तफसीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालो! क्या तुम अब भी यह उम्मीद रखते हो कि यहूदी तुम्हारी बात मान लेंगे और तुम्हारे दीन पर ईमान ले आएँगे? यह कैसी आशा है, जबकि तुमने उनका हाल देखा और जाना है! उनके बुज़ुर्ग और आलिम तौरात पढ़ते थे, अल्लाह का कलाम सुनते थे, उसे अच्छी तरह समझते-बूझते थे, फिर भी वे उसे बदल देते थे। वे उसके शब्दों को उलट-पलट कर उसका अर्थ ही बदल देते थे, और यह सब कुछ जानते-बूझते हुए करते थे। उन्हें पूरा यक़ीन था कि वे झूठ बोल रहे हैं, फिर भी वे अल्लाह की आयतों को अपनी मनमानी से बदलते रहे।
यानी जिन लोगों ने खुद अल्लाह की किताब को सुनकर उसे बदला, उनसे तुम कैसे उम्मीद रख सकते हो कि वे तुम्हारे पैग़म्बर की बात मान लेंगे? उन्होंने तो अल्लाह के साथ ही यह सलूक किया, फिर इंसानों के साथ तो वे और भी बुरा करेंगे। उनके आलिमों ने अपने ज्ञान के बावजूद सच्चाई को छिपाया और उसे तोड़ा-मरोड़ा। उन्होंने अपनी किताब में मौजूद उन स्पष्ट आयतों को भी बदल दिया जो मुहम्मद ﷺ के आने की ख़बर देती थीं।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमें लोगों की सच्चाई और उनके किरदार को देखकर ही उनसे उम्मीद रखनी चाहिए। साथ ही यह भी सबक देती है कि अल्लाह का कलाम कितना पाक और महान है, उसे बदलना या उसमें तहरीफ़ करना सबसे बड़ा गुनाह है। जो लोग अल्लाह की आयतों को जानते-बूझते हुए बदलते हैं, वे अल्लाह की नज़र में सख्त गुनाहगार हैं।
ऐ मुसलमानों! तुम्हें अपने दीन पर भरोसा रखना चाहिए और उन लोगों की परवाह नहीं करनी चाहिए जो सच्चाई को जानकर भी उसका इनकार करते हैं। अल्लाह ने तुम्हें सबसे अच्छा दीन दिया है, और जो लोग उसे ठुकराते हैं, वे अपना ही नुक़सान करते हैं। तुम अपने ईमान पर साबित-क़दम रहो और अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखो, क्योंकि अल्लाह की रहमत उन लोगों के करीब है जो उसकी आयतों पर ईमान लाते हैं और उन पर अमल करते हैं।
📜 आयत 73-77 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 75
सूरा अल-बकरा आयत 75 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुसलमानों) क्या तुम ये लालच रखते हो कि वह तुम्हारा…सूरा आयत 75/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 73–77. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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