अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُخَادِعُونَ (युखादि'ऊन): धोखा देने की कोशिश करना, चालाकी करना।
- وَمَا يَخْدَعُونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ (वमा यखदा'ऊना इल्ला अन्फुसहुम): वे अपने सिवा किसी को धोखा नहीं देते।
- وَمَا يَشْعُرُونَ (वमा यश'उरून): और उन्हें इसका एहसास (अनुभव) भी नहीं होता।
तफसीर (व्याख्या):
ये मुनाफ़िक़ (कपटी) लोग अपनी नादानी और अहमकी की वजह से समझते हैं कि वे अल्लाह तआला और ईमानवालों को धोखा दे सकते हैं। वे ज़ाहिर में ईमान का इज़हार करते हैं, लेकिन दिल में कुफ्र छिपाए रखते हैं। उन्हें लगता है कि यूँ दिखावा करके वे मुसलमानों को अपने असली हाल से बेखबर रख सकते हैं और अल्लाह की पकड़ से बच सकते हैं।
लेकिन हक़ीक़त ये है कि उनका ये धोखा उनकी अपनी जानों पर ही भारी पड़ता है। वे जिसे धोखा देना चाहते हैं, असल में वे खुद अपने आपको ही धोखा दे रहे हैं। इसकी वजह ये है कि अल्लाह तआला हर छुपी और खुली चीज़ को जानता है, यहाँ तक कि दिलों के राज़ भी उससे पोशीदा नहीं हैं। और ईमानवालों को भी अल्लाह ने उनके हालात और उनके असलियत से आगाह कर दिया है। लेकिन इन मुनाफ़िक़ों को अपनी इस हालत का एहसास तक नहीं होता, क्योंकि उनके दिल बीमार और ख़राब हो चुके हैं। वे समझते हैं कि वे चालाक हैं, जबकि असल में वे सबसे ज़्यादा नादान हैं, क्योंकि उनके धोखे का अंजाम उन्हीं पर लौटकर आता है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह से धोखा नहीं किया जा सकता: अल्लाह तआला हर चीज़ का इल्म रखता है, छुपी और खुली। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह के सामने सच्चा और ख़ालिस हो, क्योंकि उससे कोई बात छुपी नहीं है।
- धोखे का अंजाम बुरा होता है: जो लोग दूसरों को धोखा देने की कोशिश करते हैं, असल में वे खुद अपना ही नुक़्सान करते हैं। धोखे की सज़ा उन्हीं को भुगतनी पड़ती है, भले ही उन्हें इसका एहसास देर से हो।
- ईमान की पहचान: ये आयत हमें सिखाती है कि ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का इक़रार नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अमल की पाबंदी है। जो लोग दिखावे के लिए ईमान का इज़हार करते हैं, वे अल्लाह के नज़दीक कपटी हैं।
- दिल की सफ़ाई की अहमियत: मुनाफ़िक़ों के दिल ख़राब होने की वजह से उन्हें अपनी ग़लती का एहसास नहीं होता। इससे हमें सबक मिलता है कि दिल को साफ़ रखें और नेकियों पर अमल करते रहें, ताकि हमारी समझ और बसीरत सही रहे।
- मुसलमानों की हिफ़ाज़त: अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें मुनाफ़िक़ों के हाल से आगाह करता है, ताकि वे उनके धोखे में न आएँ। ये ईमानवालों के लिए अल्लाह की तरफ़ से एक रहमत और मेहरबानी है।
📜 आयत 7-11 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 9
सूरा अल-बकरा आयत 9 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : खुदा को और उन लोगों को जो ईमान लाए धोखा…सूरा आयत 9/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 7–11. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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