अल-बकरा · 10/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ فَزَادَهُمُ اللَّهُ مَرَضًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ ۝١٠
Fee quloobihim mara dun fazzdahumul laahu maradan wa lahum `azaabun aleemum bimaa kaanoo yakziboon
📖 हिंदी अर्थ
उनके दिलों में मर्ज़ था ही अब खुदा ने उनके मर्ज़ को और बढ़ा दिया और चूँकि वह लोग झूठ बोला करते थे इसलिए उन पर तकलीफ देह अज़ाब है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَرَضٌ (मरज़): बीमारी, यहाँ अर्थ है दिल का शक, संदेह और निफ़ाक़ (दोहरापन)।
  • فَزَادَهُمُ اللهُ (फ़ज़ादहुमुल्लाह): तो अल्लाह ने उन्हें बढ़ा दिया।
  • عَذَابٌ أَلِيمٌ (अज़ाबुन अलीम): दर्दनाक और तकलीफ़देह यातना।
  • يَكْذِبُونَ (यकज़िबून): वे झूठ बोलते हैं (अल्लाह और उसके रसूल पर)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इन मुनाफ़िक़ों (कपटियों) के दिलों में शक, संदेह और निफ़ाक़ की बीमारी है। यह बीमारी उनके अंदर पहले से मौजूद थी, और अल्लाह ने उन्हें उनके इसी बुरे रवैये और झूठ की सज़ा के तौर पर और अधिक शक और बीमारी में मुब्तला कर दिया। यानी जब वे सच्चाई को देखकर भी उसे नकारते रहे और अपने दिलों में संदेह पालते रहे, तो अल्लाह ने उनके दिलों को और कठोर कर दिया और उनका संदेह और बढ़ गया। यह अल्लाह की ओर से उनके लिए एक सज़ा है, क्योंकि वे अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के बारे में झूठ बोलते थे और लोगों के सामने ईमान का दिखावा करते थे, जबकि उनके दिलों में कुफ़्र था। उनके इसी झूठ और निफ़ाक़ की वजह से उनके लिए जहन्नम में दर्दनाक यातना तैयार की गई है, जो बहुत ही तकलीफ़देह होगी।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. दिल की बीमारी (शक, हसद, किन्ना, निफ़ाक़) सबसे बड़ी बीमारी है, जो इंसान को अल्लाह की राह से भटका देती है।
  2. अल्लाह की सज़ा का अंदाज़ यह है कि जब इंसान सच्चाई को जानबूझकर नकारता है, तो अल्लाह उसके दिल को और बंद कर देता है, जिससे वह और गुमराह हो जाता है।
  3. झूठ और धोखे की आदत इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देती है और उसे जहन्नम की ओर ले जाती है।
  4. मुनाफ़िक़ों का अंजाम बहुत बुरा है, क्योंकि वे दुनिया में तो मुसलमानों के साथ घुल-मिल जाते हैं, लेकिन आख़िरत में उन्हें सबसे ज़्यादा तकलीफ़देह अज़ाब मिलेगा।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने दिलों को हमेशा साफ़ रखना चाहिए, सच्चाई को कबूल करना चाहिए और झूठ, धोखे और दिखावे से बचना चाहिए, ताकि हम अल्लाह की नाराज़गी और उसकी सज़ा से महफ़ूज़ रहें।
🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — अल-बकरा

8وَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ آمَنَّا بِاللَّهِ وَبِالْيَوْمِ الْآخِرِ وَمَا هُم بِمُؤْمِنِينَ
और बाज़ लोग ऐसे भी हैं जो (ज़बान से तो) कहते हैं कि हम खुदा पर और क़यामत पर ईमान लाए हालाँकि वह दिल से ईमान नहीं लाए
9يُخَادِعُونَ اللَّهَ وَالَّذِينَ آمَنُوا وَمَا يَخْدَعُونَ إِلَّا أَنفُسَهُمْ وَمَا يَشْعُرُونَ
खुदा को और उन लोगों को जो ईमान लाए धोखा देते हैं हालाँकि वह अपने आपको धोखा देते हैं और कुछ शऊर नहीं रखते हैं
10فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٌ فَزَادَهُمُ اللَّهُ مَرَضًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ بِمَا كَانُوا يَكْذِبُونَ
उनके दिलों में मर्ज़ था ही अब खुदा ने उनके मर्ज़ को और बढ़ा दिया और चूँकि वह लोग झूठ बोला करते थे इसलिए उन पर तकलीफ देह अज़ाब है
11وَإِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا تُفْسِدُوا فِي الْأَرْضِ قَالُوا إِنَّمَا نَحْنُ مُصْلِحُونَ
और जब उनसे कहा जाता है कि मुल्क में फसाद न करते फिरो (तो) कहते हैं कि हम तो सिर्फ इसलाह करते हैं
12أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ الْمُفْسِدُونَ وَلَٰكِن لَّا يَشْعُرُونَ
ख़बरदार हो जाओ बेशक यही लोग फसादी हैं लेकिन समझते नहीं
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अनुवाद — अल-बकरा 10

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Tuesday, August 18, 2026

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