ताहा · 106/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
فَيَذَرُهَا قَاعًا صَفْصَفًا ۝١٠٦
Fa yazaruhaa qaa`an safsafaa
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार बिल्कुल रेज़ा रेज़ा करके उड़ा डालेगा और ज़मीन को एक चटियल मैदान कर छोड़ेगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَيَذَرُهَا (फ़यज़रुहा): फिर वह उसे छोड़ देगा।
  • قَاعًا (क़ाअन): समतल, बिल्कुल सपाट ज़मीन।
  • صَفْصَفًا (सफ़सफ़न): चिकनी, मुलायम और बिल्कुल सीधी सतह, जिसमें कोई ऊँच-नीच न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस महान घटना का वर्णन कर रही है जो क़यामत के दिन घटित होगी, जब यह पूरी दुनिया अपनी मौजूदा हालत में नहीं रहेगी। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब पहाड़ों को उखाड़कर रेत की तरह बिखेर दिया जाएगा, तो धरती को इस तरह समतल कर दिया जाएगा कि वह एक चिकने, सपाट मैदान में बदल जाएगी। उस पर न कोई पहाड़ होगा, न टीले, न घाटियाँ, न पेड़-पौधे, न कोई इमारत। वह बिल्कुल साफ़ और समतल होगी, जैसे कोई चिकना दर्पण या सपाट मैदान। नज़र जहाँ भी जाएगी, कोई ऊँचाई या गहराई नहीं दिखेगी — सब कुछ एक समान होगा।

यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि यह दुनिया और इसकी सारी रौनक़ें कितनी अस्थायी हैं। आज हम जिन इमारतों, पहाड़ों और बस्तियों पर इतराते हैं, क़यामत के दिन वे सब मिट्टी में मिल जाएँगी। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें इस फ़ानी दुनिया से मोह नहीं रखना चाहिए, बल्कि उस दिन की तैयारी करनी चाहिए जब सारी मख़लूक़ात अल्लाह के सामने हाज़िर होगी।

यह भी एक रहमत की बात है कि उस दिन ज़मीन इतनी समतल होगी कि सभी लोग आराम से इकट्ठा हो सकेंगे और हिसाब के लिए पेश होंगे। यह अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है कि वह जिस चीज़ को चाहे पैदा करे और जिसे चाहे मिटा दे। हमें चाहिए कि इस आयत से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें, ताकि उस दिन हमारा हिसाब आसान हो और हम जन्नत की उस ज़मीन के वारिस बनें जो हमेशा आबाद रहेगी — जहाँ न कोई दुख होगा, न थकान, और न ही कोई अंत।

🎧 सुनें

📜 आयत 104-108 — ताहा

104نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ إِذْ يَقُولُ أَمْثَلُهُمْ طَرِيقَةً إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا يَوْمًا
जो कुछ ये लोग (उस दिन) कहेंगे हम खूब जानते हैं कि जो इनमें सबसे ज्यादा होशियार होगा बोल उठेगा कि तुम बस (बहुत से बहुत) एक दिन ठहरे होगे
105وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْجِبَالِ فَقُلْ يَنسِفُهَا رَبِّي نَسْفًا
(और ऐ रसूल) तुम से लोग पहाड़ों के बारे में पूछा करते हैं (कि क़यामत के रोज़ क्या होगा)
106فَيَذَرُهَا قَاعًا صَفْصَفًا
तो तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार बिल्कुल रेज़ा रेज़ा करके उड़ा डालेगा और ज़मीन को एक चटियल मैदान कर छोड़ेगा
107لَّا تَرَىٰ فِيهَا عِوَجًا وَلَا أَمْتًا
कि (ऐ शख्स) न तो उसमें मोड़ देखेगा और न ऊँच-नीच
108يَوْمَئِذٍ يَتَّبِعُونَ الدَّاعِيَ لَا عِوَجَ لَهُ ۖ وَخَشَعَتِ الْأَصْوَاتُ لِلرَّحْمَٰنِ فَلَا تَسْمَعُ إِلَّا هَمْسًا
उस दिन लोग एक पुकारने वाले इसराफ़ील की आवाज़ के पीछे (इस तरह सीधे) दौड़ पड़ेगे कि उसमें कुछ भी कज़ी न होगी और आवाज़े उस दिन खुदा के सामने (इस तरह) घिघियाएगें कि तू घुनघुनाहट के सिवा और कुछ न सुनेगा
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीRevelation
106आयत

अनुवाद — ताहा 106

सूरा ताहा आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार बिल्कुल रेज़ा रेज़ा…

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Tuesday, August 18, 2026

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