ताहा · 64/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
فَأَجْمِعُوا كَيْدَكُمْ ثُمَّ ائْتُوا صَفًّا ۚ وَقَدْ أَفْلَحَ الْيَوْمَ مَنِ اسْتَعْلَىٰ ۝٦٤
Fa ajmi`oo kaidakum summma`too saffaa; wa qad aflahal yawma manis ta`laa
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम भी खूब अपने चलत्तर (जादू वग़ैरह) दुरूस्त कर लो फिर परा (सफ़) बाँध के (उनके मुक़ाबले में) आ पड़ो और जो आज डर रहा हो वही फायज़ुलहराम रहा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَأَجْمِعُوا كَيْدَكُمْ: अपनी चाल को मज़बूत और पुख्ता कर लो, उसमें किसी तरह का मतभेद न रखो।
  • صَفًّا: एक पंक्ति में, कतारबद्ध होकर।
  • أَفْلَحَ: सफल हुआ, कामयाब हुआ।
  • اسْتَعْلَى: ऊपर हुआ, ग़ालिब आया, जीत गया।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी लाठी फेंकी और वह साँप बनकर सामने आई, तो जादूगरों ने देखा कि यह कोई आम जादू नहीं, बल्कि एक असाधारण चमत्कार है। उनके दिलों में खलबली मच गई और वे आपस में कानाफूसी करने लगे। फ़िरऔन ने उन्हें डाँटते हुए कहा कि तुम लोगों ने मुझसे वादा किया था कि तुम मूसा को हरा दोगे। अब तुम सब मिलकर अपनी सारी चालों को मज़बूत कर लो, उसमें कोई कमी या मतभेद न रखो, क्योंकि अगर तुममें थोड़ी सी भी फूट पड़ी तो तुम्हारी ताकत खत्म हो जाएगी। फिर एक साथ, एक ही पंक्ति में, एक साथ आगे बढ़ो और अपने जादू का सामान एक साथ फेंको, ताकि लोगों की नज़रों में तुम्हारा रुतबा बढ़े और उनके दिलों में तुम्हारी दहशत पैदा हो। फ़िरऔन ने उन्हें यह भी कहा कि आज उसी की जीत होगी जो अपने विरोधी पर ग़ालिब आएगा। उसका मकसद यह था कि जादूगरों को और भड़काए और उनमें जीत का जज़्बा पैदा करे।

यहाँ एक बहुत बड़ी सीख है कि बातिल (असत्य) की ताकत चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वह आपसी इत्तिफ़ाक़ और एकता से ही काम करती है, लेकिन हक़ (सत्य) की ताकत अल्लाह की तरफ से होती है, जो कभी हारती नहीं। फ़िरऔन और उसके जादूगरों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी लाठी फेंकी, तो उसने उनके सारे जादू को निगल लिया। यह अल्लाह की कुदरत का नमूना था कि सच्चाई झूठ पर हमेशा जीतती है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने कामों में एकता और इत्तिफ़ाक़ रखना चाहिए, क्योंकि एकता में बरकत है। साथ ही, हमें यह भी यकीन रखना चाहिए कि अल्लाह की मदद उन्हीं को मिलती है जो सच्चाई पर डटे रहते हैं, चाहे बातिल की ताकत कितनी भी बड़ी क्यों न हो। आज के दौर में भी अगर हम मुसलमान एक हो जाएँ और अपने दिलों से अल्लाह का डर रखें, तो हमारी कमज़ोरी दूर हो सकती है और हम दुनिया में सच्चाई की बुलंदी का सबब बन सकते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 62-66 — ताहा

62فَتَنَازَعُوا أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ وَأَسَرُّوا النَّجْوَىٰ
और (याद रखो कि) जिसने इफ्तेरा परदाज़ियाँ न की वह यकीनन नामुराद रहा उस पर वह लोग अपने काम में बाहम झगड़ने और सरगोशियाँ करने लगे
63قَالُوا إِنْ هَٰذَانِ لَسَاحِرَانِ يُرِيدَانِ أَن يُخْرِجَاكُم مِّنْ أَرْضِكُم بِسِحْرِهِمَا وَيَذْهَبَا بِطَرِيقَتِكُمُ الْمُثْلَىٰ
(आख़िर) वह लोग बोल उठे कि ये दोनों यक़ीनन जादूगर हैं और चाहते हैं कि अपने जादू (के ज़ोर) से तुम लोगों को तुम्हारे मुल्क से निकाल बाहर करें और तुम्हारे अच्छे ख़ासे मज़हब को मिटा छोड़ें
64فَأَجْمِعُوا كَيْدَكُمْ ثُمَّ ائْتُوا صَفًّا ۚ وَقَدْ أَفْلَحَ الْيَوْمَ مَنِ اسْتَعْلَىٰ
तो तुम भी खूब अपने चलत्तर (जादू वग़ैरह) दुरूस्त कर लो फिर परा (सफ़) बाँध के (उनके मुक़ाबले में) आ पड़ो और जो आज डर रहा हो वही फायज़ुलहराम रहा
65قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِمَّا أَن تُلْقِيَ وَإِمَّا أَن نَّكُونَ أَوَّلَ مَنْ أَلْقَىٰ
ग़रज़ जादूगरों ने कहा (ऐ मूसा) या तो तुम ही (अपने जादू) फेंको और या ये कि पहले जो जादू फेंके वह हम ही हों
66قَالَ بَلْ أَلْقُوا ۖ فَإِذَا حِبَالُهُمْ وَعِصِيُّهُمْ يُخَيَّلُ إِلَيْهِ مِن سِحْرِهِمْ أَنَّهَا تَسْعَىٰ
मूसा ने कहा (मैं नहीं डालूँगा) बल्कि तुम ही पहले डालो (ग़रज़ उन्होंने अपने करतब दिखाए) तो बस मूसा को उनके जादू (के ज़ोर से) ऐसा मालूम हुआ कि उनकी रस्सियाँ और उनकी छड़ियाँ दौड़ रही हैं
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीRevelation
64आयत

अनुवाद — ताहा 64

सूरा ताहा आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम भी खूब अपने चलत्तर (जादू वग़ैरह) दुरूस्त कर…

सूरा आयत 64/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए