अल-अंबिया · 48/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَىٰ وَهَارُونَ الْفُرْقَانَ وَضِيَاءً وَذِكْرًا لِّلْمُتَّقِينَ ۝٤٨
Wa laqad aatainaa Moosa wa haaroonal Furqaana wa diyaa`anw wa zikral lilmuttaqeen
📖 हिंदी अर्थ
और हम ही ने यक़ीनन मूसा और हारून को (हक़ व बातिल की) जुदा करने वाली किताब (तौरेत) और परहेज़गारों के लिए अज़सरतापा बनूँ और नसीहत अता की

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْفُرْقَانَ (अल-फुरक़ान): वह चीज़ जो सत्य और असत्य, हलाल और हराम के बीच अंतर करे। यहाँ इसका अर्थ तौरात (तोराह) और वह ब्रह्माण्डीय प्रमाण है जो हक़ और बातिल में फ़र्क़ करता है।
  • ضِيَاءً (ज़ियाअन): रोशनी, नूर, जो रास्ता दिखाने वाली हो।
  • ذِكْرًا (ज़िक्रन): नसीहत, याद दिलाने वाली चीज़, चेतावनी और सबक।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपना बड़ा एहसान और कृपा बयान की है कि उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) और हारून (अलैहिस्सलाम) को वह चीज़ अता की जो हक़ और बातिल के बीच फ़ैसला करने वाली थी। यह "फ़ुरक़ान" था — यानी तौरात की किताब, जो सत्य को असत्य से अलग करने वाली थी, और वह ब्राह्मणीय निशानियाँ और मो'जिज़ात भी जिनके ज़रिए मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के ज़ुल्म और झूठ का सामना किया। यही नहीं, अल्लाह ने उन्हें "ज़ियाअ" (रोशनी) भी दी — यानी तौरात को नूर और हिदायत बनाया, ताकि लोग अंधेरों से निकलकर रौशनी की तरफ आएँ। और साथ ही यह "ज़िक्र" (नसीहत) थी — यानी उन लोगों के लिए याद दिलाने वाली और सबक लेने का ज़रिया, जो अल्लाह से डरते हैं।

यहाँ अल्लाह ने ख़ास तौर पर "मुत्तक़ीन" (परहेज़गारों) का ज़िक्र किया, क्योंकि असल फ़ायदा और हिदायत उन्हीं को मिलती है जिनके दिल अल्लाह के ख़ौफ़ से भरे होते हैं। यह किताब और रोशनी उन्हीं के लिए रहनुमा बनती है जो अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं और क़यामत के दिन पर ईमान रखते हैं। जो लोग इन हिदायतों से फ़ायदा उठाते हैं, वही सच्चे मुत्तक़ी हैं — जो अपने रब की इबादत में मशगूल रहते हैं और उसके अज़ाब से काँपते हैं।


दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने नबियों को हमेशा हिदायत और रोशनी अता करता है, ताकि वे लोगों को अंधेरों से निकालकर रौशनी की तरफ लाएँ। यही सिलसिला आज भी जारी है — क़ुरआन हमारे लिए वही फ़ुरक़ान, ज़ियाअ और ज़िक्र है। जो शख्स क़ुरआन को पकड़ लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। अल्लाह ने हम पर यह बड़ा एहसान किया है कि हमें ऐसी किताब दी जो हर ज़माने के लिए रोशनी और नसीहत है। हमें चाहिए कि इस किताब को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम भी उन मुत्तक़ीन में शामिल हों जिनके लिए यह किताब रहनुमा और रहमत बनेगी। याद रखिए, अल्लाह की रोशनी उन्हीं के दिलों में उतरती है जो तक़वा (परहेज़गारी) अपनाते हैं — और तक़वा ही कामयाबी की कुंजी है।



📜 आयत 46-50 — सूरा अल-अंबिया

46وَلَئِن مَّسَّتْهُمْ نَفْحَةٌ مِّنْ عَذَابِ رَبِّكَ لَيَقُولُنَّ يَا وَيْلَنَا إِنَّا كُنَّا ظَالِمِينَ
और (ऐ रसूल) अगर कहीं उनको तुम्हारे परवरदिगार के अज़ाब की ज़रा सी हवा भी लग गई तो वे सख्त! बोल उठे हाय अफसोस वाक़ई हम ही ज़ालिम थे
47وَنَضَعُ الْمَوَازِينَ الْقِسْطَ لِيَوْمِ الْقِيَامَةِ فَلَا تُظْلَمُ نَفْسٌ شَيْئًا ۖ وَإِن كَانَ مِثْقَالَ حَبَّةٍ مِّنْ خَرْدَلٍ أَتَيْنَا بِهَا ۗ وَكَفَىٰ بِنَا حَاسِبِينَ
और क़यामत के दिन तो हम (बन्दों के भले बुरे आमाल तौलने के लिए) इन्साफ़ की तराज़ू में खड़ी कर देंगे तो फिर किसी शख्स पर कुछ भी ज़ुल्म न किया जाएगा और अगर राई के दाने के बराबर भी किसी का (अमल) होगा तो तुम उसे ला हाज़िर करेंगे और हम हिसाब करने के वास्ते बहुत काफ़ी हैं
48وَلَقَدْ آتَيْنَا مُوسَىٰ وَهَارُونَ الْفُرْقَانَ وَضِيَاءً وَذِكْرًا لِّلْمُتَّقِينَ
और हम ही ने यक़ीनन मूसा और हारून को (हक़ व बातिल की) जुदा करने वाली किताब (तौरेत) और परहेज़गारों के लिए अज़सरतापा बनूँ और नसीहत अता की
49الَّذِينَ يَخْشَوْنَ رَبَّهُم بِالْغَيْبِ وَهُم مِّنَ السَّاعَةِ مُشْفِقُونَ
जो बे देखे अपने परवरदिगार से ख़ौफ खाते हैं और ये लोग रोज़े क़यामत से भी डरते हैं
50وَهَٰذَا ذِكْرٌ مُّبَارَكٌ أَنزَلْنَاهُ ۚ أَفَأَنتُمْ لَهُ مُنكِرُونَ
और ये (कुरान भी) एक बाबरकत तज़किरा है जिसको हमने उतारा है तो क्या तुम लोग इसको नहीं मानते
अल-अंबियाकुरान सूची
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48आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 48

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Saturday, October 3, 2026

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