अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْفُرْقَانَ (अल-फुरक़ान): वह चीज़ जो सत्य और असत्य, हलाल और हराम के बीच अंतर करे। यहाँ इसका अर्थ तौरात (तोराह) और वह ब्रह्माण्डीय प्रमाण है जो हक़ और बातिल में फ़र्क़ करता है।
- ضِيَاءً (ज़ियाअन): रोशनी, नूर, जो रास्ता दिखाने वाली हो।
- ذِكْرًا (ज़िक्रन): नसीहत, याद दिलाने वाली चीज़, चेतावनी और सबक।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपना बड़ा एहसान और कृपा बयान की है कि उसने मूसा (अलैहिस्सलाम) और हारून (अलैहिस्सलाम) को वह चीज़ अता की जो हक़ और बातिल के बीच फ़ैसला करने वाली थी। यह "फ़ुरक़ान" था — यानी तौरात की किताब, जो सत्य को असत्य से अलग करने वाली थी, और वह ब्राह्मणीय निशानियाँ और मो'जिज़ात भी जिनके ज़रिए मूसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़िरऔन के ज़ुल्म और झूठ का सामना किया। यही नहीं, अल्लाह ने उन्हें "ज़ियाअ" (रोशनी) भी दी — यानी तौरात को नूर और हिदायत बनाया, ताकि लोग अंधेरों से निकलकर रौशनी की तरफ आएँ। और साथ ही यह "ज़िक्र" (नसीहत) थी — यानी उन लोगों के लिए याद दिलाने वाली और सबक लेने का ज़रिया, जो अल्लाह से डरते हैं।
यहाँ अल्लाह ने ख़ास तौर पर "मुत्तक़ीन" (परहेज़गारों) का ज़िक्र किया, क्योंकि असल फ़ायदा और हिदायत उन्हीं को मिलती है जिनके दिल अल्लाह के ख़ौफ़ से भरे होते हैं। यह किताब और रोशनी उन्हीं के लिए रहनुमा बनती है जो अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं और क़यामत के दिन पर ईमान रखते हैं। जो लोग इन हिदायतों से फ़ायदा उठाते हैं, वही सच्चे मुत्तक़ी हैं — जो अपने रब की इबादत में मशगूल रहते हैं और उसके अज़ाब से काँपते हैं।
दावती पहलू (प्रचारात्मक पहलू):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला अपने नबियों को हमेशा हिदायत और रोशनी अता करता है, ताकि वे लोगों को अंधेरों से निकालकर रौशनी की तरफ लाएँ। यही सिलसिला आज भी जारी है — क़ुरआन हमारे लिए वही फ़ुरक़ान, ज़ियाअ और ज़िक्र है। जो शख्स क़ुरआन को पकड़ लेता है, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। अल्लाह ने हम पर यह बड़ा एहसान किया है कि हमें ऐसी किताब दी जो हर ज़माने के लिए रोशनी और नसीहत है। हमें चाहिए कि इस किताब को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, ताकि हम भी उन मुत्तक़ीन में शामिल हों जिनके लिए यह किताब रहनुमा और रहमत बनेगी। याद रखिए, अल्लाह की रोशनी उन्हीं के दिलों में उतरती है जो तक़वा (परहेज़गारी) अपनाते हैं — और तक़वा ही कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 46-50 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 48
सूरा अल-अंबिया आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम ही ने यक़ीनन मूसा और हारून को (हक़…सूरा आयत 48/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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